ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News उत्तर प्रदेशसपा के इस गणित की काट खोजना BJP का बड़ा चैलेंज, लोकसभा चुनाव के नतीजों से निकला संदेश

सपा के इस गणित की काट खोजना BJP का बड़ा चैलेंज, लोकसभा चुनाव के नतीजों से निकला संदेश

BJP Politics in Uttar Pradesh: समाजवादी पार्टी के जातीय समीकरण का गुणा-गणित अगर यूं ही बना रहा तो तीन साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा संकेत हैं।

सपा के इस गणित की काट खोजना BJP का बड़ा चैलेंज, लोकसभा चुनाव के नतीजों से निकला संदेश
Ajay Singhविशेष संवाददाता,लखनऊWed, 05 Jun 2024 01:23 PM
ऐप पर पढ़ें

BJP Challenge in Uttar Pradesh: लोकसभा चुनावों के नतीजों ने उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से नए संकेत दे दिए हैं। समाजवादी पार्टी के जातीय समीकरण का गुणा-गणित अगर यूं ही बना रहा तो तीन साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा संकेत हैं। अव्वल तो उसे अपने संगठन को चाक-चौबंद करना होगा। वहीं पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जातीय समीकरण बिठाना कठिन चुनौती होगा। साथ ही युवाओं और रोजगार पर ध्यान देना भी जरूरी नज़र आ रहा है।

बढ़ रहा समाजवादी पार्टी का वोट प्रतिशत

समाजवादी पार्टी भले ही लगातार वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव, वर्ष 2017 का विधानसभा, वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव और वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव हारी लेकिन उसने लड़ना या यूं कहें संघर्ष करना नहीं छोड़ा। वर्ष 2022 के चुनाव में सपा ने भाजपा की रणनीति की तर्ज पर गैर-यादव ओबीसी के साथ ही गैर-जाटव दलितों कार्ड खेला था। समाजवादी पार्टी ने भाजपा के खेमे में शामिल रहे ओम प्रकाश राजभर के अलावा दारा सिंह चौहान को साथ लेकर बिसात बिछाई थी और 125 सीटें हासिल कर भाजपा को कड़ी चुनौती पेश की थी। 

कुछ इसी तर्ज पर अखिलेश यादव ने इस बार लोकसभा चुनाव  में पीडीए या यूं कहें गैर-यादव गैर-मुस्लिम रणनीति के तहत ओबीसी और दलित प्रत्याशियों को तवज्जो दी। यही कारण है कि बीते विधानसभा चुनाव में जहां समाजवादी पार्टी का वोट प्रतिशत 32 फीसदी था, वह 2024 में बढ़कर 33 फीसदी से ज्यादा जाता दिखाई दे रहा है।

कानून-व्यवस्था के बूले लौटी थी योगी सरकार

वर्ष 2022 के चुनावों में 37 साल बाद किसी सियासी दल की सरकार लगातार दूसरी बार बन सकी थी। कहना गलत न होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर लगाम के बूते ही सत्ता दोबारा हासिल की थी। यह बात दीगर है कि भाजपा की सीटें वर्ष 2017 की 325 की तुलना में 2022 में 255 तक सीमित हो गई थीं। भाजपा संगठन ने बीते विधानसभा चुनावों में जातीय गुणा-गणित बिठाते हुए कुर्मी समाज के भी दो दर्जन से अधिक प्रत्याशियों को टिकट दिए थे। वहीं निषाद पार्टी छह और कुर्मियों की राजनीति करने वाले अपना दल के 12 प्रत्याशी जीते थे। भाजपा ने गैर-जाटव वोट बैंक के समीकरण को भी बखूबी साधा था। लब्बोलुआब यह कि अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा को अपना घर संजोये रखने के लिए जातीय समीकरण के साथ ही संगठन के भी कील कांटे दुरुस्त करने होंगे।

नहीं चला धर्म का कार्ड

अयोध्या में राममंदिर निर्माण को भुनाने की कोशिश में भारतीय जनता पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पार्टी ने कई बार इसे मुद्दा बनाने की कोशिश की लेकिन सपा के जातीय गणित के आगे यह कार्ड नहीं चला। मसलन, अयोध्या लोकसभा चुनाव में जहां राम मंदिर का निर्माण हुआ, भाजपा न केवल हारी बल्कि भाजपा फैजाबाद मंडल में पड़ने वाली सभी पांच सीटों पर अंबेडकरनगर, अमेठी, अयोध्या, सुलतानपुर व बाराबंकी लोकसभा सीटें हार गई।