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महिला सिविल जज ने की थी खुदकुशी, डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किया खुलासा

बदायूं में रविवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन ज्योत्सना राय के शव का पोस्टमार्टम किया गया। एक महिला और दो पुरुष डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी में शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में...

महिला सिविल जज ने की थी खुदकुशी, डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किया खुलासा
Dinesh Rathourहिन्दुस्तान,बदायूंSun, 04 Feb 2024 07:29 PM
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बदायूं में रविवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन ज्योत्सना राय के शव का पोस्टमार्टम किया गया। एक महिला और दो पुरुष डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी में शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हैंगिग (खुदकुशी) आई है। परिवार के लोगों ने पुलिस पर विवेचना में लापरवाही और डॉक्टरों के पोस्टमार्टम हाउस पर देरी से आने का आरोप लगाया। इसे लेकर जिला जज ने संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिये हाईकोर्ट को पत्र लिखा है। वहीं दूसरी ओर रविवार सुबह 11 बजे पोस्टमार्टम के बाद सिविल जज के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिग के कारण मौत होने की पुष्टि हुई। जजी परिसर में सिविल जज के पार्थिव शरीर को लाया गया। यहां न्यायिक अधिकारियों व कर्मियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद परिजन सिविल जज के शव को एंबुलेंस से अयोध्या ले गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुदकशी की बात उजागर होने के बाद अब पुलिस खुदकशी के पीछे के कारणों की जांच करेगी। 

ये है पूरा मामला

मऊ जिले के तराईडीह गांव की रहने वाली सिविल जज जूनियर डिवीजन ज्योत्सना राय (29) की अगस्त 2023 में बदायूं में तैनाती हुई थी। वह बदायूं के जजी कॉलोनी के सरकारी आवास में रहतीं थीं। शनिवार सुबह ज्योत्सना राय का शव उनके आवास में फंदे से लटका मिला था। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को वीडियोग्राफी में नीचे उतारा था। शनिवार शाम को बदायूं पहुंचे सिविल जज के पिता अशोक राय ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। 

पुलिस की तफ्तीश पर आपत्ति, भाई ने उठाये कई सवाल

बनारस जिले में रेलवे विभाग में सिविल इंजीनियर के पद पर तैनात भाई हिमांशु शेखर राय रविवार सुबह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। जहां अपनी इकलौती बहन ज्योत्सना राय की मौत पर वह बार-बार बेसुध होते दिखाई दिए। उन्होंने अपनी बहन की मौत के मामले में पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाए। कहा, उनकी बहन जजी आवास के दूसरी मंजिल पर रहती थीं, लेकिन यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। बताया कि आवास के पीछे के हिस्से की बाउंड्रीबाल के समीप जाली वाले दरवाजे पर भी लॉक ही नहीं था। पुलिस अधिकारियों ने उसके भी फिंगर प्रिंट लेना जरूरी नहीं समझा। बाथरूम का दरवाजा खुला था। बाउंड्रीवॉल के सहारे कोई भी अंदर से आवास का मुख्य दरवाजा बंद कर जाली के सहारे निकल सकता है। पुलिस को कम से कम जांच तो अच्छे से करना चाहिए था। डायरी में कई पेज फटे हुए थे। लेकिन इसकी भी पुलिस ने जांच नहीं की। पुलिस को कुछ देखना चाहिए था। क्या डायरी के दूसरे पन्नों पर प्रिंट था। इसकी भी गहनता से जांच करनी चाहिए थी। जो भी हुआ हो, लेकिन इन बातों को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए था।

जमीन खरीदने से पहले मौत की खबर से टूटा परिवार

भाई हिमांशु शेखर राय ने बताया कि बहन ज्योत्सना के लिये परिवार के लोग लखनऊ में जमीन खरीदने वाले थे। इसके लिये शनिवार का दिन ही तय हुआ था, परिवार के लोग सुबह जाने की तैयारी कर रहे थे लेकिन बहन की मौत की खबर से सब कुछ बर्बाद हो गया। ज्योत्सना इकलौती बहन होने के चलते वह परिवार की लाड़ली थी। भाई का कहना है कि बहन के साथ क्या हुआ। कुछ समझ नहीं आ रहा है।

जजी परिसर में सीसीटीवी न होने पर उठाये सवाल

भाई ने जजी परिसर कॉलोनी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। कहा यहां सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए हैं। कौन आ रहा, कौन जा रहा है। इसका कैसे पता चलेगा। सुरक्षा गार्ड भी नहीं रहते हैं। ऐसे में कोई न कोई किसी के साथ अनहोनी की घटना घट सकती है।

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