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हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार दूधनाथ सिंह पंचतत्व में विलीन

doodhnath singh

हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार, कवि एवं आलोचक दूधनाथ सिंह का शुक्रवार को इलाहाबाद में अंतिम संस्कार कर दिया गया। सिंह के बड़े बेटे ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के मौके पर बड़ी संख्या में लेखक, शिक्षा शास्त्री, पत्रकार और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

हिन्दी जगत को अलविदा कह गए कथाशिल्पी दूधनाथ सिंह

वह 81 वर्ष के थे। सिंह गत एक वर्ष से कैंसर से पीड़ित थे। उन्होंने गुरुवार रात इलाहाबाद में एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में दो बेटे एवं एक बेटी है। दो वर्ष पूर्व उनकी लेखिका पत्नी का निधन हो गया था। सिंह के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच और प्रगतिशील लेखक संघ ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और इसे हिंदी साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया है। हिंदी के प्रख्यात कवि अशोक वाजपेयी, साहित्य अकादमी से सम्मानित लेखक उदय प्रकाश, आलोचक वीरेंद्र यादव समेत अनेक लेखकों पत्रकारों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

सिंह जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष थे और इलाहाबाद विश्विद्यालय में हिंदी विभाग में प्रोफेसर भी रहे। जनवादी लेखक संघ के महासचिव मुरली मनोहर प्रसाद सिंह ने अपने शोक संदेश में कहा कि, दूधनाथ सिंह ने साहित्य की सभी विधाओं में लेखन किया है। उन्होंने कहानियों, उपन्यास, कविता, आलोचना और नाटक में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 'आखिरी कलाम' उपन्यास के लिए वह याद किए जाएंगे।

जन संस्कृति मंच के रामजी राय ने भी सिंह के निधन पर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी है। प्रगतिशील लेखक संघ के वीरेंद्र यादव ने कहा कि, सिंह अपने महत्वपूर्ण उपन्यास आखिरी कलाम के अलावा सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' तथा महादेवी वर्मा पर अपनी आलोचनात्मक पुस्तक के लिए याद किए जाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कहा कि, वह उनके छात्र रहे हैं और उन्होंने एक गुरु खो दिया। उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत क्षति है। वह हिंदी के प्रतिबद्ध लेखक थे।

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  • Web Title:Famous writer doodhnath Singh cremated in allahabad