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हिन्दुपुर और ककवन में काफूर हुईं ईद की खुशियां

हिन्दूपुर बिल्लहौर में रोता बिलखता परिवार

1 / 2हिन्दूपुर बिल्लहौर में रोता बिलखता परिवार

ककवन में गम में डूबा परिवार

2 / 2ककवन में गम में डूबा परिवार

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कल तक ईद की तैयारियों में जुटे बिल्हौर के हिन्दुपुर गांव और ककवन के चार परिवारों को मैनपुरी हादसे ने झकझोर दिया। हादसे में यहां के 6 लोगों की मौत की सूचना से परिवार और पूरे गांव में मातम पसरा गया। खास बात यह रही कि हिन्दुपुर और ककवन के सभी मृतक आपस में एक दूसरे के रिश्तेदार हैं। शाम को जब किसी के घर से एक तो किसी के घर से तीन-तीन जनाजे उठे तो पूरा गांव रो पड़ा। पुलिस सुरक्षा के साथ सभी मृतकों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। 
दो बेटों की मौत से टूट गया कुतुबुद्दीन
बिल्हौर कोतवाली क्षेत्र के हिन्दूपुर गांव निवासी कुतुबुद्दीन के दो बेटे हसमुद्दीन व शहारूख व रईश खां का बेटा रेहान जयपुर में कपड़ों की सिलाई का काम करते थे। ईद के पर्व पर तीनों बच्चों और परिवार के लिए उपहार लेकर ईद का त्योहार मनाने घर आ रहे थे। अचानक मैंनपुरी में हुए हादसे में तीनों की मौत हो गई। बुधवार सुबह सूचना मिलने पर कुतुबुद्दीन और रईश के परिजन मैनपुरी के लिए रवाना हो गए। देर शाम जब वह लौटे तो साथ में थे कफन में लिपटे उनके कलेजे के टुकड़े। हसमुद्दीन की कुछ वर्ष पूर्व ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी रोशनी अपने दो साल मासूम को गोद लेकर फफक पड़ी। सास शायरा बहू और दुदमुंहे का मुंह देखकर खुदा को कोस रही थी, जिसने उसके कलेजे के टुकड़े को छीन लिया। हसमुद्दीन की दोनों बहनों का भी करुण क्रंदन देख हर कोई रो पड़ा। 
रईस की छिन गई बुढ़ापा की लाठी
इसी गांव के रईस के बुढ़ापे की लाठी यानी बेटा रेहान (17) भी काल के गाल में समा गया। रेहान भी जयपुर कमाने गया था। ईद पर वापस लौटने की खुशी में पूरा घर उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था। रईस बेटे की मौत की सूचना पर आवाक र गया। सरपर हाथ रखकर इस कदर गुमसुम हो गया कि मानों उसकी आंखे भी पथरा गईं। 
दर्जियाना से निकले तीन जनाजे
ककवन के दर्जियाना मोहल्ला निवासी महबूब के भी दो बेटों जहांगीर और मुस्तकीम भी हादसे का शिकार हुए। ईद की तैयारियों में जुटे परिवार पर दो जवान बेटों की मौत की खबर किसी बमवर्षा से कम नहीं थी। घर में मातम और कोहराम मच गया। अब परिवार में अब कमाने वाला वृद्ध महबूब के अलावा बड़ा भाई आजाद है जो दिल्ली में एक प्राइवेट नौकरी करता है। महबूब के भतीजे हासिम उर्फ सुल्ली पुत्र जमील को भी इस हादसे ने मौत की नींद सुला दिया। वह अपने चचेरे भाईयों संग जयपुर में काम करता था। ईद सभी भाई साथ घर लौट रहा था। दोनों ही परिवारों बेहद गरीब हैं। शाम को जब घर से तीन जनाजे उठे तो पूरे गांव फफक पड़ा। 

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  • Web Title:Family of Hindupur and Kakwan in trauma this Eid