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ट्रेनों के शौचालय से बदबू भगाने के लिए लगेंगे एग्जॉस्ट फैन और वेंचुरी

Train

चलती ट्रेनों में बायो टॅायलेट वाले शौचालय से आने वाली बदबू से यात्रियों को जल्द राहत मिलेगी। रेलवे अपने सभी कन्वेंशनल (पुराने) कोचों में बदलाव करने जा रहा है। इसमें एसी और नॉन एसी कोचों के टॉयलेट में एग्जॉस्ट फैन और वेंचुरी सिस्टम लगाया जाएगा। रेलवे इसके लिए करीब 2.10 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के 733 कोचों में इसे लगाएगा। इसके बाद टॉयलेट चोकिंग के समय कोचों में बदबू नहीं फैलेगी और यात्रियों को राहत मिलेगी। 

ट्रेनों के शौचालय से निकलने वाले मल को पटरी पर गिरने से रोकने के लिए रेलवे ने ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाए हैं। ताकि, पटरियों और लाइन को गंदा और जंग लगने से बचा सके। लेकिन, यहीं टॉयलेट आज यात्रियों के लिए मुसीबत बन चुके हैं। दरअसल, बायो टॉयलेट की चोकिंग के बाद कोचों में बुरी तरह बदबू भर जाती है। यह हाल तब है जब स्लीपर कोच में शौचालय की खिड़कियां खुली रहती हैं। वहीं, एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों का तो बैठना तक दूभर हो जाता है। लेकिन, अब यात्रियों को इस परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए रेलवे ट्रेनों में एग्जॉस्ट फैन और वेंचुरी सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। ताकि, चोकिंग के समय कोचों में बदबू न फैले। 

क्या है वेंचुरी सिस्टम
नॉन एसी कन्वेंशनल कोच में वेंचुरी सिस्टम लगेगा। यह स्टेनलेस स्टील का बना होगा। इसके एक तरफ जाली दार मुंह होगा, जिसको टॉयलेट के नीचे लगाया जाएगा। जबकि, इससे जुड़ी रॉड में दो मुंह होंगे। एक मुंह ट्रेन की दिशा में होगा जबकि दूसरा विपरीत दिशा में होगा। एक मुंह से ट्रेन चलने पर साफ हवा टॉयलेट में जाएगी, जिससे भारी और बदबूदार हवा नीचे बैठ जाएगी और दूसरी तरफ से भारी हवा दाब पाकर निकलती रहेगी। विपरीत दिशा वाला मुंह वैक्यूम जैसा काम करेगा। रेलवे इसे अपने सभी 599 नॉन एसी कन्वेंशनल कोच में लगाएगा। एक कोच के चार टॉयलेट को वेंचुरी से लैस करने में रेलवे को करीब 30 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

एसी कोच में लगेगा एग्जॉस्ट सिस्टम
एसी कोच में टॉयलेट से लेकर सभी खिड़कियां दरवाजे बंद रहते हैं। ऐसे में टॉयलेट चोकिंग से यात्रियों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। इसके लिए प्रत्येक शौचालय में अंदर की ओर से एग्जॉस्ट फैन लगेगा। ताकि, एग्जॉस्ट फैन गंदी और बदबूदार हवा को लगातार बाहर फेंकता रहे। इसको तैयार करने में रेलवे को प्रत्येक कोच पर 24 हजार रुपये का भार आयेगा। 174 एसी कन्वेंशनल कोचों में यह बदलाव होगा।

उत्तर रेलवे के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया कि बायो टॉयलेट वाले यात्रियों की पेरशानियां बढ़ रही हैं। इसके लिए रेलवे अब एग्जॉस्ट फैन और वेंचुरी का इस्तेमाल करेगा। ताकि, यात्रियों को सफर के दौरान मुसीबतें न उठानी पड़ें।

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  • Web Title:Exhaust fan and Venturi will be used to get rid of smell from toilets of trains