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स्मार्ट मीटर मामले में जांच रिपोर्ट दबाने जुटे बिजली विभाग अधिकारी,उपभोक्ता परिषद ने किया खुलासा 

बिजली कंपनियों के लिए स्मार्ट मीटर अब सिरदर्द बन गया है। कंपनियों से जुड़े अधिकारी मीटर की खामियां छुपाने के साथ ही जांच रिपोर्ट तक दबाने में जुटे हैं। उ.प्र. विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मध्यांचल और...

स्मार्ट मीटर मामले में जांच रिपोर्ट दबाने जुटे बिजली विभाग अधिकारी,उपभोक्ता परिषद ने किया खुलासा 
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊFri, 21 Aug 2020 07:20 PM
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बिजली कंपनियों के लिए स्मार्ट मीटर अब सिरदर्द बन गया है। कंपनियों से जुड़े अधिकारी मीटर की खामियां छुपाने के साथ ही जांच रिपोर्ट तक दबाने में जुटे हैं। उ.प्र. विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मध्यांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा नोएडा स्थित लेबोरेटरी से मिले जांच रिपोर्ट दबाने का खुलासा ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के सामने किया है। बताया है कि मार्च-अप्रैल में ही इन दोनों कंपनियों के पास स्मार्ट मीटर जांच की रिपोर्ट आ गई थी, लेकिन अधिकारी कोरोना का हवाला देकर झूठ बोलते रहे हैं।
 
पूरे प्रकरण से अवगत होने के बाद ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने परिषद को आश्वासन दिया है कि गुमराह कर रिपोर्ट दबाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्मार्ट मीटर में भार जंपिंग का मुद्दा जनवरी 2020 में उठा था। जिसके बाद ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। जांच कमेटी ने कुछ भार जंपिंग मीटरों की क्षेत्रवार जांच के लिए नोडल आफिसर नियुक्त किए थे। इन मीटरों को केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) नोएडा भेजा गया था। इसके बाद से अब तक अधिकारी बार-बार यही कहते रहे कि लैब कोरोना कैंटोमेंट जोन में है, जांच लंबित है।

स्मार्ट मीटरों की लैब रिपोर्ट छिपाते रहे अधिकारी
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने सीपीआरआई के एक उच्चाधिकारी से इस मुद्दे पर बात की तो कहानी कुछ और निकली। उक्त अधिकारी ने बताया कि मध्यांचल व पूर्वांचल के मीटरों की रिपोर्ट मार्च-अप्रैल में ही भेजी जा चुकी है। कुछ जांच लंबित भी हैं। परिषद अध्यक्ष ने यह सवाल निदेशक वाणिज्य के सामने रखा तो उन्होंने माना कि यह सूचना सही है, छानबीन की जा रही है। अवधेश वर्मा ने बताया है कि भार जंपिंग की जांच में स्मार्ट मीटर में कुछ गंभीर खामियां पाई गई हैं। उन्होंने ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि इसकी सत्यता की जांच की जानी चाहिए। रिपोर्ट मिलने के बाद भी अधिकारी अब तक चुप क्यों थे? यह उपभोक्ताओं के साथ छल है। 

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