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27 नवंबर, 2020|5:05|IST

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यूपीसीडा घोटाला, ईडी ने भी शुरू की अरुण मिश्रा की जांच

यूपीसीडा के प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा के खिलाफ जांच की फाइल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फिर खोल दी है। एजेंसी उसकी काली कमाई और स्रोत की जांच करेगी। देहरादून, हरिद्वार और कानपुर के पांच बैंकों में फर्जी दस्तावेजों से खोले गए खातों की नए सिरे से पड़ताल होगी। इन 23 खातों से करीब 12 करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया।

अरुण मिश्रा पर चलने वाला सबसे बड़ा मामला आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का है। ईडी सूत्रों के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक के पांच कर्मचारियों और कुछ लोगों ने देहरादून और हरिद्वार में कई फर्जी बैंक खाते खोले। इन खातों में 3.31 करोड़ रुपये जमा किए गए, जिन्हें बाद में बैंक कर्मियों की मिलीभगत से निकाल लिया गया। कानपुर मे स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और सिंडीकेट बैंक में 18 फर्जी खाते खोले गए। यह खाते खोलने के लिए जाली ड्राइविंग लाइसेंसों और नकली पैन कार्डों को इस्तेमाल किया गया। इन खातों से 8.20 करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया। इस तरह 23 खातों से 12 करोड़ रुपए के कालेधन का ट्रांजेक्शन हुआ है। ये रकम खातों से बाहर आने के बाद किसकी जेब में गई, किस चैनल से गई, जांच शुरू की गई है।

पांच बार सस्पेंड, एक बार बर्खास्त
अरुण मिश्रा नौकरी में पांच बार निलंबित हुआ। एक बार बर्खास्त हुआ। इसके बावजूद नौकरी में है। अफसरों का कहना है कि अरुण मिश्रा इकलौता शख्स है जो ईडी, सीबीआई, एसआईटी की जांच, जेल जाने के बावजूद नौकरी पर बना हुआ है। 

जानकार बताते हैं कि अरुण मिश्रा अपने खिलाफ जांच करने वाले अधिकारी को ही भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसाकर बदला लेने में माहिर है। कुछ अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके उसने यूपीएसआईडीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक अमित घोष के खिलाफ 1100 करोड़ रुपए के घपले और 300 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी के आरोप की विजिलेंस जांच के फर्जी आदेश जारी करवा लिए थे। इस पर राज्य में हड़कंप मच गया था। सचिवालय के तीन अधिकारियों को हटा दिया गया था। इस फर्जीवाड़े के लिए 3 जून 2017 को अरुण मिश्र के खिलाफ एसआईटी ने मामला दर्ज किया था। 11 महीने जांच के बाद उसे सस्पेंड किया गया था।

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  • Web Title:ed also started investigation of arun mishra in upsida scam kanpur uttar pradesh