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दुबई वालों को भा रही बुलंदशहर में बनने वाली फैब्रिक डॉल, यूपी की इंदु ने गांव में किया कमाल

बुलंदशहर के एक गांव में तैयार की जा रही फैब्रिक डॉल दुबई के मॉल में लोगों को खूब पसंद आ रही। दुबई में बिकने वाली हर डॉल के साथ इन्हें तैयार कर रही ग्रामीण महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

दुबई वालों को भा रही बुलंदशहर में बनने वाली फैब्रिक डॉल, यूपी की इंदु ने गांव में किया कमाल
Ajay Singhअमित राणा,बुलंदशहरSun, 21 Apr 2024 02:04 PM
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Bulandshahr Fabric Doll: बुलंदशहर के एक गांव में तैयार की जा रही फैब्रिक डॉल दुबई के मॉल में लोगों को खूब पसंद आ रही है। दुबई में बिकने वाली हर डॉल के साथ इन्हें तैयार कर रही ग्रामीण महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जी हां यूपी के बुलंदशहर में तैयार की जा रही फैब्रिक डॉल की देश-विदेश में धूम मच रही है। इस सब के पीछे है जनपद के अनूपशहर के गांव बिचौला निवासी इंदु सिंह।

इंदु सिंह ने ही कभी इन ग्रामीण महिलाओं की दुर्दशा व अभावों की जिंदगी देख आई विलेज नामक कंपनी की नींव रखी थी। कंपनी में ग्रामीण परिवेश की हजारों महिलाओं ने ट्रेनिंग ली जिसके बाद उन महिलाओं को रोजगार मिला। आज उन महिलाओं द्वारा कैरी बैग, एनवायरमेंट फ्रेंडली बैग, डायरी, सूट कवर, फाइल फोल्डर, फैबरिक डॉल इत्यादि सामान बनाए जा रहे हैं। बनाई गई फेवरिक डॉल की दुबई में जबरदस्त मांग है।

जानिये इंदु सिंह की यह कहानी उनकी जुबानी
हापुड़ के गांव छपकौली में पैदा हुई इन्दु सिंह ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव से हुई। उसके बाद उन्होंने हाई स्कूल एवं इंटर हापुड़ से किया। वहीं से उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन कंप्लीट की। ग्रेजुएशन के पश्चात उनकी शादी अनूपशहर ब्लॉक क्षेत्र के गांव बिचौला के प्रतिष्ठित गणपत परिवार के चौधरी अतुल कुमार सिंह से हुई। इंदु सिंह ने गांव में महिलाओं की खराब स्थिति को देखा। तो महिलाओं को रोजगार दिलाने की मन में ठानी। इसके बाद उन्होंने परिवार की मदद से अनूपशहर में आई विलेज नामक कंपनी स्थापित की जिसमें अब महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है।

दुबई में बढ़ रही फैब्रिक डॉल की मांग
आई विलेज कंपनी में काम कर रही महिलाओं के द्वारा बनाए गए उत्पादों की दुबई मांग बढ़ रही है। दुबई की नामी कंपनी डमी के साथ ही विश्व की प्रतिष्ठित कंपनी अमेजॉन प्रतिवर्ष आई विलेज कंपनी से करोड़ों का सामान खरीद कर अपनी साइट पर ऑनलाइन बेच रही हैं। इसके अलावा देश की कई प्रतिष्ठित कंपनियां भी अनूपशहर के गांव की इस कंपनी में तैयार किया जा रहे सामान को खरीद रही है। इंदू सिंह वर्ष 2006 से परदादा परदादी एजुकेशन सोसाइटी के प्रशासनिक विभाग से जुड़ी हुई है। परदादा परदादी एजुकेशन सोसाइटी के फाउंडर वीरेंद्र सैम के सहयोग से आई विलेज कंपनी की शुरुआत की थी।

हजारों ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार
इंदू सिंह ने बताया कि उन्होंने अब तक इस कंपनी के द्वारा हजारों ग्रामीण परिवेश की महिलाओं एवं युवतियों को प्रशिक्षण देकर रोजगार प्रदान किया है। कंपनी देहात की महिलाओं के लिए आय का साधन बन रही है, साथ ही उन्हें परिवार में सम्मान के साथ रहने का अवसर दे रही है।

कोरोना काल में हजारों महिलाओं को प्रशिक्षण दिया
इंदू सिंह ने बताया कि उन्होंने 2015 में इस कंपनी को शुरू किया था। अब तक हजारों महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कोरोना काल में महिलाओं को फाइल फोल्डर, फैब्रिक डॉल की डिजाइन और बनाने की तकनीक के बारे में ट्रेनिंग दी। कंपनी से 1200 महिलाओं को सीधे रोजगार मिला। उन्होंने बताया कंपनी में ऐसी महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है जो अपने घर से कभी निकली नहीं जिन्हें कोई काम करना नहीं आता।

गांव की महिलाओं की जिंदगी बदल रही
इंदू सिंह ने बताया कि हम ऐसी महिलाओं के साथ काम करते हैं जिन्हें सही मायनों में काम की जरूरत होती है। ऐसी महिलाएं जो प्रताड़ित हैं, जिनके पति काम नही करते हैं, उन्हें अपनी कंपनी से जोड़ती हैं। ऐसी सैकड़ों महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं। मैं यही कहना चाहती हूं कि आपका विजन स्पष्ट होना चाहिए। कंपनी में रोजगार प्रकार अब गांव की महिलाओं की जिंदगी बदल रही है और खुशहाली जीवन जी रही है।

परिवार ने दिया साथ तो इंदु ने हौसलों से भरी उड़ान
इंदू सिंह की शादी गांव बिचौला के शिक्षित परिवार में हुई। पति अतुल कुमार सिंह और उनकी सास राजेश्वरी देवी ने उनका सहयोग किया तो इंदु ने हौसलों से उड़ान भरनी शुरू कर दी। इंदू सिंह ने बताया कि वह मेरी सास कम दोस्त अधिक थी। पति अतुल कुमार नोएडा विकास प्राधिकरण में प्रोजेक्ट इंजीनियर केमिकल के पद पर रहे। वर्तमान में अनूपशहर के ब्लॉक प्रमुख हैं। शुरुआत में कुछ कठिनाइयां आई लेकिन परिवार के सपोर्ट से मकसद में कामयाब हुई।

रोजगार पा रही महिलाएं बोली
अनूपशहर क्षेत्र के गांव एचौरा निवासी एवं कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर कार्यरत दुर्गेश ने बताया कि वह पिछले 4 साल से यहां काम कर रही है। शुरुआत में उन्हे 4 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे अब उन्हें 10 हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं। उन्होंने बताया कि अब वह यहां नौकरी कर परिवार की सहायता कर रही है। आज की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी है एवं आत्मनिर्भर है। गांव खुशहालगढ़ निवासी सफलता ने बताया कि उनके पास पढ़ाई के लिए रुपए नहीं थे।  उन्हें इस कंपनी के बारे में बताया गया फिर उन्होंने यहां आकर बैग प्रिंटिंग में काम करना प्रारंभ किया। अब वह यहां पर 6 से 8 हजार रुपए प्रतिमाह कमा कर अपनी पढ़ाई कर रही है।