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Hindustan Special: बचपन में राजपथ से जो देखा था सपना वह हुआ साकार, कैप्टन बनकर गणतंत्र दिवस परेड में हुई शामिल

किसी चीज को पाने की चाहत और लगन यदि सच्ची हो तो पूरी कायनात उसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ कैप्टन प्रीति पाल के साथ। साल 2000 में जब वह महज पांच साल की थी तो राजपथ पर मिलिट्री...

Hindustan Special: बचपन में राजपथ से जो देखा था सपना वह हुआ साकार, कैप्टन बनकर गणतंत्र दिवस परेड में हुई शामिल
Dinesh Rathourपंकज वत्स,बरेलीFri, 16 Feb 2024 08:18 PM
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किसी चीज को पाने की चाहत और लगन यदि सच्ची हो तो पूरी कायनात उसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ कैप्टन प्रीति पाल के साथ। साल 2000 में जब वह महज पांच साल की थी तो राजपथ पर मिलिट्री परेड देखकर उसके मन में देशभक्ति की भावना जागी। उसे आर्मी की वर्दी से लगाव हो गया। इसके बाद परिस्थितियां ऐसी बनती चली गईं कि 2015 में उसने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की परीक्षा पास की और लेफ्टिनेंट बनी। 26 जनवरी 2024 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर परेड में शामिल होकर उसने अपने सपने को जीवंत किया।

बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में निदेशक के प्रधान निजी सचिव विद्यानंद पाल ने बताया कि 1996 में उनके घर में एक फूल सी बच्ची का जन्म हुआ। साल 2000 में जब प्रीति करीब पांच साल की थी तो वह उसे लेकर दिल्ली घूमने गए थे। वहां राजपथ के माइल स्टोन पर उसने तस्वीरें भी खिंचवाई। इसके बाद राजपथ पर हुई परेड को उसने जब टीवी पर देखा तो आर्मी संबंधित कई सवाल पूछने लगी। बिहार के डेहरी ऑन सोन के रहने वाले विद्यानंद ने बताया कि धीरे-धीरे आर्मी से संबंधित टीवी सीरियल और देशभक्ति आधारित फिल्मों में उसकी रुचि बढ़ती चली गई। विद्यानंद कहते हैं कि 2014 में सेंट फ्रांसिस से इंटर की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने उसे मेडिकल की तैयारी करने कोटा भेजा था।

26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर परेड में हुई शामिल

प्रीति पाल ने इस साल दिल्ली के कर्त्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया। यह भी बता दूं कि देश के इतिहास में पहली बार मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के अधिकारियों को परेड में शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ था। परेड की उस टुकड़ी में कैप्टन प्रीति भी शामिल हुईं। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए उनका पूरा परिवार कर्त्तव्य पथ की दर्शक दीर्घा में उपस्थित था। कैप्टन प्रीति की मां शर्मिला पाल गृहणी हैं। उनका छोटा भाई अनुभव पाल गाजियाबाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।

ऐसे भरा एमएनएस का फॉर्म

विद्यानंद ने बताया कि कोटा में तैयारी के दौरान और उसके बाद दो बार प्रीति ने नीट की परीक्षा दी लेकिन अच्छे नंबर नहीं आने के कारण दाखिला नहीं लिया। उसी दौरान 2015 में उनके एक जानने वाले ने कहा कि आर्मी के मेडिकल नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) में वैकेंसी निकली है। बिटिया ने मेडिकल की तैयारी की है तो उसे फॉर्म भरवा दिया जाए। आर्मी से संबंधित फॉर्म भरने की बात पर प्रीति की आंखों में पहली बार उन्होंने चमक देखी।

पहले प्रयास में पास की परीक्षा

प्रीति पाल ने 2015 में पहली बार एमएनएस का फॉर्म भरा था। अप्रैल में जब रिजल्ट आया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अप्रैल में लखनऊ में इंटरव्यू में सफलता मिलने के बाद दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में चार साल तक उसकी पढ़ाई हुई। इसके बाद 25 जुलाई 2014 को प्रीति लेफ्टिनेंट बनकर जालंधर के मिलिट्री अस्पताल में तैनात हुई। 2021 में प्रीति को प्रमोशन मिला। अब वह कैप्टन हैं और मिलिट्री हॉस्पिटल रुड़की में तैनात हैं।

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