ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News उत्तर प्रदेशसारी जिम्मेदारी विधायकों की तो... कैबिनेट मंत्री की हार पर डॉन ब्रजेश सिंह के MLA भतीजे सुशील सिंह का कहां निशाना?

सारी जिम्मेदारी विधायकों की तो... कैबिनेट मंत्री की हार पर डॉन ब्रजेश सिंह के MLA भतीजे सुशील सिंह का कहां निशाना?

भाजपा की हार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के साथ उसके आसपास की सीटों पर ऐसा लगता है संगठन और सरकार के बीच एक दूसरे को निशाने पर लेने की प्रतियोगिता चल रही है।

सारी जिम्मेदारी विधायकों की तो... कैबिनेट मंत्री की हार पर डॉन ब्रजेश सिंह के MLA भतीजे सुशील सिंह का कहां निशाना?
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,वाराणसीWed, 05 Jun 2024 09:46 PM
ऐप पर पढ़ें

लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में मिली हार ने उसके नेताओं को अंदर तक हिलाकर रख गिया है। खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और उसके आसपास की सीटों पर ऐसा लगता है संगठन और सरकार के बीच एक दूसरे को निशाने पर लेने की प्रतियोगिता शुरू हो गई है। जहां एक ओर पीएम मोदी बेहद कम मार्जिन से अपनी सीट जीत सके हैं वहीं बगल की चंदौली सीट केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय हार गए हैं। चंदौली की पांच में से दो विधानसभा सीटें वाराणसी जिले में ही आती हैं। ऐसे में निशाना वाराणसी से लेकर चंदौली तक लगाया जा रहा है। कहीं इशारों में हमले हो रहे हैं तो कहीं खुलकर प्रतिरोध हो रहा है। ऐसा ही प्रतिरोध डॉन ब्रजेश सिंह के भतीजे और चंदौली की सैयदराजा सीट से भाजपा विधायक सुशील सिंह की तरफ से हुआ है। 

अपनी काशी में ही पीएम मोदी को मिले कम वोट और पड़ोसी जिले चंदौली में कैबिनेट मंत्री की हार के बाद भाजपा संगठन के नेताओं ने ठीकरा जनप्रतिनिधियों यानी विधायकों पर फोड़ा। इसका जवाब सुशील सिंह ने फेसबुक पर दिया है। सुशील सिंह ने लिखा कि जब सारी जिम्मेदारी जिले के माननीय विधायकों और माननीय राज्यसभा सांसदों की ही है तो संगठन का क्या काम, समीक्षा करिए आरोप ना लगाइए। हार से सीखना है किसी को जिम्मेदार नहीं बनाना है। अनावश्यक टिप्पड़ी करने से बेहतर है अपनी अपनी कमियों पर ध्यान देते हुए उन कमियों को सुधारा जाए, अभी भी समय है। 

सुशील सिंह ने किसी का नाम तो नहीं लिखा लेकिन उनका इशारा कैबिनेट मंत्री के कुछ खास लोगों की ओर था जो संगठन के पदों पर आसीन हैं। महेंद्र नाथ पांडेय की हार के लिए सुशील सिंह ने बिल्कुल साफगोई से यह भी कहा कि इस बार बहुत ज्यदा एंटी इनकंबेंसी थी। हम लोगों ने लगातार मेहनत की। भीषण गर्मी में लगातार भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। उन्होंने हार का दूसरा कारण ओबीसी की जातियों का वोट इस बार भाजपा को नहीं मिलना भी माना। उन्होंने कहा कि इस बार मौर्य वोट हमें नहीं मिला है। उनका इशारा बसपा प्रत्याशी सत्येंद्र कुमार मौर्या की तरफ था। सत्येंद्र को 1 लाख 59 हजार 903 वोट मिले हैं। जबकि भाजपा प्रत्याशी महेंद्र नाथ पांडेय केवल 21565 वोटों से सपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह से हारे हैं। 

इस बार चुनाव के पहले चरण से ही क्षत्रिय वोटों को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। कई क्षत्रिय संगठनों ने खुलकर भाजपा का विरोध भी शुरू कर दिया था। यहां तक कि क्षत्रियों का संगठन करणी सेना ने भी भाजपा के विरोध की आवाज बुलंद की थी। इसके बाद भी पूर्वांचल में सुशील सिंह के चाचा डॉन ब्रजेश सिंह पहली बार भाजपा के लिए वोट मांगने निकले थे।

Advertisement