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26 अक्तूबर, 2020|1:01|IST

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बिना दवा के ज्यादा कुपोषित बच्चों की जिन्दगी बचाएंगे डॉक्टर

malnourished children

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर बिना दवा अति कुपोषित बच्चों की जिन्दगी बचाने पर काम करेंगे। देसी खानपान के जरिए उनका कुपोषण दूर करेंगे। इसके लिए शोध को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मंजूरी दे दी है। साथ ही तीन साल में अति कुपोषित बच्चों के लिए नई गाइडलाइन तैयार करने का सुझाव दिया है। 

फिलहाल, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों के तहत अति कुपोषित बच्चों को बचाने के लिए एंटीबायोटिक के साथ विटामिन और कैल्शियम दिए जाते हैं। फिर भी इनकी मौत की आशंका दस गुना रहती है। 

बाल रोग में हर महीने आते 100 बच्चे
भारत समेत विश्व में जन्म ले रहे बच्चों में 6.4 फीसदी अति कुपोषण की जद में होते हैं। निमोनिया, संक्रमण, दिल, गुर्दे और जिगर की बीमारी होने के कारण इन्हें अस्पतालों में बने पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कर इलाज किया जाता है। जीएसवीएस मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विभाग के पोषण पुनर्वास केन्द्र में हर महीने सौ अति कुपोषित बच्चे भर्ती किए जाते हैं। इसको देखते हुए यहां के डॉक्टरों ने शोध के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया है।

शोध प्रोजेक्ट में बताया कैसे करेंगे ठीक
डॉक्टरों का तर्क है कि बचपन में ही एंटीबायोटिक देने से बच्चों में दवा के प्रति रेजिस्टेंस विकसित हो जाता है। साथ ही प्राकृतिक विकास प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए बाल रोग विभाग के प्रोजेक्ट में कहा गया है कि अति कुपोषित बच्चों के लिए भारतीय खाद्य पदार्थों के मिश्रण का डाइट चार्ट बनाया जाएगा। दूध, दही, पनीर से लेकर मूंगफली, चना, दालों के व्यंजन इन बच्चों को दिए जाएंगे। साथ में अलग-अलग विटामिन्स और कैल्शियम दिए जाएंगे। 

बच्चों का डाटा बैंक बनाया जा रहा
बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. यशवंत राव के मुताबिक, ऐसे बच्चों में स्वास्थ्य से जुड़ी कई जटिलताओं के कारण ही एंटीबायोटिक दवाएं देने का प्रावधान है। इससे निजात पाने के लिए शोध पर काम शुरू कर दिया गया है। बच्चों का डाटा बनाया जा रहा है। पोषण पुनर्वास केन्द्र में अति कुपोषित बच्चे हैं, लेकिन शोध का एक हिस्सा यह भी है कि उन्हें माता-पिता के पास रख कर भी इलाज की गाइडलाइन बनाई जाए। 

हम सालों से चली आ रही डब्ल्यूएचओ की अति कुपोषित पांच साल तक के बच्चों को एंटीबायोटिक देने की गाइडलाइन बदलने के लिए शोध करेंगे। बिना दवा सिर्फ खानपान से इन बच्चों को ठीक किया जा सकता है। इसी से जुड़े शोध प्रोजेक्ट को आईसीएमआर ने मंजूरी दे दी है। -प्रो. यशवंत राव, विभागाध्यक्ष बाल रोग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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  • Web Title:Doctors will save the lives of malnourished children without medicine