ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशडॉक्टर बच्चों को अपने पेशे में नहीं लाना चाहते, सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा

डॉक्टर बच्चों को अपने पेशे में नहीं लाना चाहते, सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा

डॉक्टर अपने बच्चों को डॉक्टर नहीं बनाना चाहते। पहली पसंद इंजीनियरिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कैट के साथ सिविल सर्विस है। चौंकाने वाला यह खुलासा सर्वे में हुआ है।

डॉक्टर बच्चों को अपने पेशे में नहीं लाना चाहते, सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा
Deep Pandeyआशीष दीक्षित,कानपुरFri, 01 Mar 2024 08:45 AM
ऐप पर पढ़ें

जीवन और मृत्यु के बीच चट्टान बनकर खड़े होने वाले चिकित्सक अपने बच्चों को डॉक्टर नहीं बनाना चाहते। पहली पसंद इंजीनियरिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कैट के साथ सिविल सर्विस है। चौंकाने वाला यह खुलासा भारतीय बाल रोग अकादमी नेशनल मेडिको लीगल चैप्टर के सर्वे में हुआ है। देशभर के पांच सौ से अधिक डॉक्टरों के सर्वे में 85 फीसदी डॉक्टरों ने अपने बच्चों के लिए मेडिकल क्षेत्र को फिट नहीं माना है।  यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, झारखंड समेत कई प्रदेशों के सरकारी व प्राइवेट डॉक्टरों ने सर्वे में सहभागिता निभाई। डॉक्टरों से पूछा गया कि क्या वह अपनी ही तरह अपने व परिवार के बच्चों को डॉक्टर बनाना पसंद करते हैं। सर्वे के दौरान करीब 425 चिकित्सकों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह बच्चों का करियर डॉक्टरी क्षेत्र में नहीं देखना चाहते हैं।
 
मेडिकल की पढ़ाई संग सेट होने में भी कई साल 
बच्चों के लिए मेडिकल क्षेत्र को बेहतर नहीं बताने के पीछे डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल की पढ़ाई के साथ स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट बनने में लगभग 10 साल लग जाते हैं। समुचित पढ़ाई करने के बाद सेट होने में भी कई साल बीत जाते हैं। नर्सिंग होम खोलने से लेकर मरीजों की ठीक-ठाक संख्या आने तक में जिंदगी का बड़ा हिस्सा चला जाता है। लाखों खर्च के बाद भी अच्छी आमदनी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। 

सबसे ज्यादा डॉक्टर से उम्मीद, इसे भी मान रहे असुरक्षित 
सर्वे रिपोर्ट में डॉक्टरों ने कहा कि समाज को सबसे ज्यादा उम्मीद डॉक्टर से होती है। खासकर गरीब मरीज उनसे कम खर्च में बेहतर इलाज की उम्मीद लगा बैठते हैं। इसको लेकर अधिकांश बार अतिरिक्त दबाव बनाया जाता है। इस स्थिति को डॉक्टर अपने लिए असुरक्षित मानते हैं।
 
हमले, मुकदमे से भी पीछे खींच रहे कदम
डॉक्टरों ने कहा कि हमले, बेवजह के मुकदमे, तीमारदारों की ओर से की जा रही बदसलूकी, नर्सिंग होम में तोड़फोड़ जैसी घटनाओें ने भी डॉक्टरों में डर पैदा किया है। वह नहीं चाहते कि उनके बच्चों को भी डॉक्टर बनकर इसी असुरक्षा की भावना से जूझना पड़े।

मल्टीनेशनल कंपनियों की लग्जरी लाइफ भी लुभा रही 
इंजीनियरिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कैट के साथ सिविल सर्विस में डॉक्टर अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य को तलाश रहे हैं। वहीं विदेशों में बड़े पैकेज वाली नौकरी के जरिए लग्जरी लाइफ के सपने भी हैं।
 
क्या कहते हैं विशेषज्ञ 
देशस्तर में हुए सर्वे में 85 फीसदी डॉक्टर अपने बच्चों को मेडिकल क्षेत्र में नहीं लाना चाहते हैं। मेडिकल की लंबी पढ़ाई के साथ सेट होने में सालों लगने को प्रमुख कारण बताया है। इंजीनियरिंग समेत कई क्षेत्र को बेहतर माना गया है। 
- डॉ. जेके गुप्ता, नेशनल प्रेसिडेंट, आईएपी मेडिको लीगल चैप्टर
 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें