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हमीरपुर में जेल अधीक्षक के खिलाफ डॉक्टरों ने खोला मोर्चा

डीएम को ज्ञापन सौंपकर बाहर निकले प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के सदस्य

प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने गुरुवार को जेल अधीक्षक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जेल के अंदर बंदियों की पिटाई से लेकर नर्तकियों के फूहड़ ठुमकों के बाद जो माहौल तैयार हुआ है, उसका ठीकरा जेल अधीक्षक डॉक्टर के ऊपर फोड़ रहे हैं। इससे जेल अधीक्षक के खिलाफ आक्रोश फैल रहा है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने चेतावनी दी है कि अगर तीन दिन के अंदर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो संघ आंदोलन शुरू कर देगा। 
जेल के दो वीडियो सोशल मीडिया में आए तो हर तरफ सनसनी फैल गई। जिसके बाद मामला मीडिया में आ गया। इस काण्ड को लेकर जारी जांच-पड़ताल के दौरान जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने अपने बयान में जेल के डॉ.विक्रम सिंह को कठघरे में खड़ा कर दिया। जिससे प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ आंदोलित हो गया है। गुरुवार को संघ के अध्यक्ष डॉ.आरपी वर्मा व सचिव डॉ.अशोक कुमार की अगुवाई में जिले भर के डॉक्टरों ने जिलाधिकारी को चार सूत्री ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया है कि डॉ.विक्रम सिंह ने समय-समय पर बंदियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। बंदियों को मेन्यू के अनुसार भोजन न देने पर डॉ.सिंह की टीका-टिप्पणी पर जेल अधीक्षक नाराज हो गए। जेल अधीक्षक ने सामान्य स्वस्थ बंदियों को गंभीर बीमार बताकर जबरदस्ती जेल के अस्पताल में भर्ती कराने का दबाव बनाया। 31 मई को बाबू सिंह नामक बंदी को भी दबाव बनाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो पूर्णरूप से स्वस्थ है। इसकी सूचना एमओ रिपोर्ट बुक के जरिए जेल अधीक्षक व ई-मेल भेजकर आईजी कारागार को दी गई थी।
मनमुताबिक काम न करने से नाराज थे जेल अधीक्षक 
ज्ञापन में कहा गया है कि डॉ.विक्रम सिंह ने जेल अधीक्षक के मनमुताबिक गलत कार्य नहीं किए, जिससे वो उनसे नाराज हो गए। इसी के चलते कई बार डॉ.सिंह को जेल अधीक्षक ने अपमानित किया और उनकी जेल गेट पर चेकिंग तक करवाई गई। जेल अधीक्षक जेल के अंदर की जो करतूतें वीडियो के माध्यम से सोशल मीडिया में वायरल हुई, उसका ठीकरा डॉ.सिंह के सिर फोड़कर साफ बचने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि पिटाई वाले वीडियो में वो स्वयं कक्ष में मौजूद हैं। 
जेल अधीक्षक पर कार्रवाई न हुई तो स्वास्थ्य सेवाएं ठप होंगी 
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन में जेल अधीक्षक को स्थानांतरित नहीं किया जाता और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं की जाती है तो संघ आंदोलन करने से पीछे नहीं रहेगा। इन हालातों में जेल में भी कोई डॉक्टर काम करने को तैयार नहीं है। इस मौके पर संघ के डॉ.विकास यादव, डॉ.आरजी संखवार, डॉ.आशुतोष निरंजन, डॉ.राज, डॉ.एके सिंह, डॉ.अनिल सचान, डॉ.राघवेंद्र मिश्र सहित भारी संख्या में जिले  के पीएचसी, सीएचसी का स्टाफ मौजूद रहा। 
जिम्मेदारों के बयानों से जांच टीमें संतुष्ट नहीं 
11 जून को जिला कारागार के दो वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए थे। एक वीडियो में जेल अधीक्षक के कक्ष में बंदियों को बारी-बारी से मुर्गा बनाकर पट्टों से पीटा जा रहा है। दूसरे वीडियो में ठीक इसके उलट नर्तकियों का ग्रुप स्टेज पर फूहड़ ठुमके लगा रहा है। जहां जेल के तमाम अधिकारी और बंदी भी इस कार्यक्रम का मजा लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। फूहड़ ठुमके के वीडियो को जेल प्रशासन ने नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित रंगारंग कार्यक्रम का हिस्सा बताते हुए कहा था कि नाचने वाली महिलाएं नहीं बल्कि जेल के बंदी थे, जिन्होंने महिलाओं का रूप धारण करके कार्यक्रम पेश किया। बर्बर पिटाई वाले वीडियो को जेल अधीक्षक ने यह कहते हुए बचाने की कोशिश की कि यह सब कुछ उनके अवकाश में रहने के दौरान हुआ। लेकिन इन दलीलों से जांच टीमें संतुष्ट नहीं हैं। जिसके चलते कार्रवाई की तलवार अभी भी लटक रही है। जेल डीआईजी बीआर वर्मा ने दो दिनों तक अपनी जांच के बाद ऐसे संकेत भी दिए हैं कि इस मामले में किसी न किसी पर गाज जरूर गिरेगी। उन्होंने जेल अधीक्षक को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने की भी हिदायत दी। वहीं डीएम ने भी इस प्रकरण की जांच एसडीएम सदर से कराई है। 

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  • Web Title:doctor opposed prison superintendent in Hamirpur