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Hindi News उत्तर प्रदेशदो लड़कों की जोड़ी...हाथ का साथ और साइकिल ने पकड़ी रफ्तार; ऐसे बदले UP के समीकरण

दो लड़कों की जोड़ी...हाथ का साथ और साइकिल ने पकड़ी रफ्तार; ऐसे बदले UP के समीकरण

‘दो लड़कों की जोड़ी’ यानी अखिलेश और राहुल गांधी ने पीडीए की बिसात पर समीकरण बिछा कर मुस्लिमों और दलितों का भी विश्वास हासिल कर लिया। इसके साथ ही उसके लिए कामयाबी की राह भी खुलती गई।

दो लड़कों की जोड़ी...हाथ का साथ और साइकिल ने पकड़ी रफ्तार; ऐसे बदले UP के समीकरण
Ajay Singhहिन्‍दुस्‍तान,लखनऊWed, 05 Jun 2024 02:32 PM
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Akhilesh Yadav- Rahul Gandhi: यूपी में अखिलेश यादव ने अपने दम पर सपा को जहां नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया, वहीं कांग्रेस के साथ गठबंधन को भी कामयाबी की राह पर ला दिया। ‘दो लड़कों की जोड़ी’ यानी अखिलेश और राहुल गांधी ने पीडीए की बिसात पर समीकरण बदलकर मुस्लिमों और दलितों का भी विश्वास हासिल कर लिया तो इसके साथ ही उनके लिए कामयाबी की राह भी खुलती गई। सपा लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर देते हुए बड़ी ताकत बन कर उभरी है जबकि इंडिया गठबंधन ने यूपी में एनडीए को पीछे छोड़ दिया है। 2019 में महज पांच सीट पर सिमटने वाली सपा ने भाजपा को पछाड़ दिया है। सपा ने 2004 वाला प्रदर्शन फिर एक बार दोहराकर भाजपा को सकते में डाल दिया है।

ऐसे में लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब वे नेता क्‍या सोच रहे होंगे जिन्‍होंने पिछले दिनों एक-एक कर अखिलेश यादव का साथ छोड़ दिया था।  बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के साथ रहे स्वामी प्रसाद मौर्या, जयंत चौधरी, ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, पल्लवी पटेल, जैसे सहयोगी नेताओं ने एक-एक कर अखिलेश यादव का साथ छोड़ दिया था। ऐन चुनाव के वक्त जनवादी पार्टी और महान दल ने भी सपा को आंखे दिखानी शुरू कर दीं। लेकिन अखिलेश ने किसी की मान मनौव्वल नहीं की।

कांग्रेस को 17 सीटें देकर गठबंधन बचाया 
यूपी में इंडिया गठबंधन के तहत सपा कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खासी खींचतान रही पर अंतत अखिलेश कांग्रेस को 17 सीटें देना स्वीकार कर लिया। यह निर्णय दोनों के हक में अच्छा गया। 

मजबूत समीकरण को कई जगह बदले प्रत्याशी
प्रत्याशी बदलने पर सपा नेतृत्व को भले ही अपने लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा हो लेकिन टिकट देने में उन्होंने केवल जीत का फैक्टर देखा। मुरादाबाद जैसी मुस्लिम बाहुल्य सीट पर सीटिंग सांसद एसटी हसन का टिकट काट कर वैश्य समाज की रुचि वीरा को टिकट देना सही निर्णय साबित हुआ। इसी तरह आजम खां के क्षेत्र रामपुर में उनकी पसंद का ख्याल किए बिना जिसको प्रत्याशी बनाया है। वह जीत गया।