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विलुप्त सरस्वती की खोजः टेढ़ीमेढ़ी मिली पतली जलधारा यमुना नदी से जुड़ी! वैज्ञानिकों का दल पहुंचा कौशांबी

सरायअकिल। (कौशाम्बी) हिन्दुस्तान संवादPublished By: Yogesh Yadav
Mon, 11 Oct 2021 10:00 PM
विलुप्त सरस्वती की खोजः टेढ़ीमेढ़ी मिली पतली जलधारा यमुना नदी से जुड़ी! वैज्ञानिकों का दल पहुंचा कौशांबी

राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम सोमवार को प्रयागराज के पड़ोसी जिले कौशांबी के सरायअकिल के इछना गांव पहुंची। इसके पहले इछना में केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्लूबी) ने ड्रिलिंग का काम किया था। इस दौरान 400 फीट जमीन के अंदर की सतह में मिले जल, मिट्टी, कंकड़, सिल्ट और सैंड का सैंपल लिया गया था। अब वैज्ञानिक अगली जांच के लिए सेडीमेंट कोर ड्रिलिंग करेंगे। फिर लिए गए सेंपल को ओएसएल डेटिंग के लिए एनजीआरआई के लैब भेजेंगे।

राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान हैदराबाद की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रभा पांडेय, जियोलाजिस्ट डॉ. श्रीनिवासन, फिजिसिस्ट डॉ. श्रीहरि, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्चर (सीएसआईआर) के सीनियर रिसर्चर डॉ. इमरान खान, टेक्निकल ऑफिसर बी. किरण टीम के साथ इछना पहुंचे। वे यहां सेडीमेंट कोर ड्रिलिंग करेंगे। फिर जमीन की 50 से 80 मीटर नीचे सतह में दबे खनिजों की ऑप्टिकली स्टिम्युलेटेड ल्यूमिनेसिसेंस (ओएसएल) प्रक्रिया के जरिए सेंपल एकत्रित करेंगे। ओएसएल से यह पता चलेगा कि नीचे की सतह में दबे खनिज कितने हजार साल पहले सूर्य की किरणों के संपर्क में थे।

हेलीकॉप्टर की मदद से किया था सर्वे

इसके पहले डेनमार्क और एनजीआरआई के वैज्ञानिकों ने हेलीकॉप्टर लेकर हेलिबोन ट्रांजिएंट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम से जमीन की सतह से 500 मीटर नीचे तक सर्वे किया था। यह सर्वे करारी के अगियौना गांव, मंझनपुर और सैनी के समीप यमुना तट किनारे उपरहार पहाड़पुर कोदन गांव में किया गया था। वहीं केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने इन जगहों पर 450 फीट गहरी ड्रिलिंग कर सिल्ट, सैंड, रेता और कंकड़ के नमूनों को एकत्रित कर परीक्षण की खातिर भेजा है। अब ओएसएल डेटिंग के लिए यहां से नमूने एकत्रित कर मिलान किया जाएगा।

टेढ़ीमेढ़ी मिली पतली जलधारा यमुना नदी से जुड़ी!

राष्ट्रीय जल विज्ञान अनुसंधान संस्थान रुढ़की में केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की ओर से भेजे गए पानी के सैंपल की जांच चल रही है। बताया जा रहा है कि संस्थान के केमिकल डिपार्टमेंट ने पहले चरण की कार्बन डेटिंग कर ली है। जिसकी रिपोर्ट भारत सरकार को भेज दी गई है। फिलहाल वैज्ञानिकों को टेढ़ीमेढ़ी मिली पतली जलधारा यमुना नदी से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

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