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बनारस रेल इंजन कारखाना परिसर में डेंगू का कहर, 24 नए मरीजों के साथ 110 हुई पीड़ितों की संख्या

वाराणसी कार्यालय संवाददाताPublished By: Yogesh Yadav
Wed, 28 Jul 2021 08:45 PM
बनारस रेल इंजन कारखाना परिसर में डेंगू का कहर, 24 नए मरीजों के साथ 110 हुई पीड़ितों की संख्या

सफाई और स्वच्छता के लिहाज से नजीर माने जाने वाले बनारस रेल इंजन (बरेका) परिसर में डेंगू कहर बरपा रहा है। पिछले पांच दिनों के दौरान यहां डेंगू के 110 मरीज मिले हैं। बुधवार को 24 मरीज बरेका के केन्द्रीय अस्पताल में भर्ती हुए। उनमें 10 बच्चे हैं। पिछले तीन-चार दिनों से रोज 25-26 मरीजों के मिलने से हालात की गंभीरता समझी जा सकती है। वैसे, केन्द्रीय अस्पताल के सीएमओ डॉ. सुजीत मलिक ने कहा कि हालात नियंत्रण में है। उन्होंने परिसर स्थित आवासों, कॉलोनियों में एंटी लार्वा के छिड़काव और समुचित सफाई का दावा किया। वहीं, बरेका की जीएम अंजली गोयल गुरुवार को अस्पताल का जायजा लेने के साथ मरीजों का हालचाल लेंगी। 

बरेका परिसर से अभी कोरोना का संक्रमण खत्म हुआ है। अब डेंगू ने पैर पसार लिए हैं। केंद्रीय अस्पताल का वार्ड डेंगू के मरीजों से पटा हुआ है। महज चार से पांच दिन में डेंगू के मरीजों की संख्या 110 तक पहुंच गई है। अचानक इतनी संख्या में मरीजों के मिलने से परिसर में घबराहट का माहौल है। 

कंचनपुर कॉलोनी में अधिक मरीज

बरेका परिसर से सटी, केंद्रीय विद्यालय के निकट कंचनपुर कॉलोनी में अधिक मरीज मिल रहे हैं। उनमें भी बच्चे अधिक संक्रमित हैं। पीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि बुधवार को 24 मरीज मिले हैं जिनमें 10 कर्मचारी और 14 हैं। सीएमओ डॉ. सुजीत मलिक के मुताबिक सभी डेंगू पीड़ितों का बेहतर इलाज चल रहा है। 

घरों में नाले का पानी, उसी में सोना मजबूरी

बरेका प्रशासन परिसर में सफाई व्यवस्था पर भले ही अपनी पीठ थपथपा रहा हो लेकिन हकीकत कोसो दूर है। परिसर में कर्मचारी आवासों की दशा और बाहर सड़क, पार्क में जलजमाव ही डेंगू का प्रमुख कारण है। इससे असंख्य मच्छर पैदा हो रहे हैं। सबसे बदतर हालत कंचनपुर रेल कॉलोनी की है। यहां घरों में नाले के पानी के बीच सोना लोगों की मजबूरी है। बाशिंदे बोले, इससे अच्छा कहीं किराये पर मकान लेकर रह लें। उनके मुताबिक सिविल विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों ने बारिश में एक बार भी कॉलोनी का दौरा नहीं किया। 

परिसर में सफाई बदतर

कंचनपुर के अलावा बरेका परिसर में ईस्ट और वेस्ट रेल कॉलोनियों की दशा भी बदतर है। तीन हजार आवासों वाली इन कॉलोनियों में नाले चोक हैं, सीवर का पानी ओवरफ्लो कर रहा है। जल निकासी का प्रबंध न होने से पार्क, सड़कों व आवास तक जाने वाली गलियों में पानी लंबे समय से जमा है। इससे बीमारियां फैल रही हैं।

बेहतर कर रहा बरेका : पीआरओ

पीआरओ राजेश कुमार का कहना है कि बरेका ने कोविड की दूसरी लहर में अच्छा काम किया। इस समय भी बेहतर करने की कोशिश हो रही है। आवासीय कॉलोनियों में निरंतर सफाई हो रही है। जलजमाव की बात झूठ है। दवाओं का छिड़काव जारी है।

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