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Hindi News उत्तर प्रदेशहादसे रोकने की नई तकनीक तैयार, ड्राइवर को उबासी-झपकी आते ही अफसर को मिलेगा अलर्ट

हादसे रोकने की नई तकनीक तैयार, ड्राइवर को उबासी-झपकी आते ही अफसर को मिलेगा अलर्ट

नई तकनीक से ड्राइवर को उबासी-झपकी आते ही अफसर को अलर्ट मिलेगा। सशस्त्र बलों के ड्राइवरों के लिए रक्षा मंत्रालय ने विकसित प्रणाली करवाई। ड्राइवर केबिन में लगा कैमरा चालक के चेहरे को मॉनिटर करेगा।

हादसे रोकने की नई तकनीक तैयार, ड्राइवर को उबासी-झपकी आते ही अफसर को मिलेगा अलर्ट
Srishti Kunjसुहेल खान,कानपुरSun, 26 May 2024 06:02 AM
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ड्राइवर ने कई बार उबासी ली या उसे झपकी आई तो उसके इंचार्ज अफसर को फौरन अलर्ट पहुंच जाएगा। सशस्त्र बलों के वाहनों को दुर्घटना से बचाने के लिए आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) युक्त कैमरे यह काम करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने बेंगलुरु की एक कंपनी से यह प्रणाली विकसित कराई है। जल्द ही इसका इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। इसे ड्राइवर फटीग मॉनीटरिंग सिस्टम (डीएफएमएस) नाम दिया गया है।

वाहन चालकों के झपकी आने या थकान के कारण स्टीयरिंग असंतुलित से होने वाले सड़क हादसों पर रोक लगाने में आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस एक बड़ी भूमिका अदा करने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के वाहन चालकों के लिए एआई मॉडल तैयार कराया है। इस तकनीक को बेंगलुरु की बीईएमएल लिमिटेड ने विकसित किया है। यह वाहन चालकों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखेगा। ड्राइविंग करने में चालक की असहज स्थिति का एहसास होते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट करेगा। इससे संबंधित नोडल अफसर के मोबाइल पर भी अलर्ट का मैसेज आ जाएगा। इस मॉडल को ड्राइवर फैटीग मॉनिटरिंग सिस्टम (डीएफएमएस) नाम दिया गया है।

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ऐसे काम करेगा यह एआई मॉडल 
प्रयोगशाला प्रतिष्ठान (रक्षा मंत्रालय) के अधिकारियों के मुताबिक ड्राइवर केबिन में स्वचालित कैमरा होगा, जिसका एक लेंस लगातार ड्राइवर के चेहरे पर फोकस रहेगा। यह कंट्रोलरूम से जुड़ा होगा। फुटेज की पहचान प्रणाली वीडियो का विश्लेषण करती रहेगी। चालक की थकान, उबासी, झपकी, पलक झपकने की दर, ऊंघने पर सिर का मूवमेंट मॉनीटर होता रहेगा। इन्फ्रारेड के जरिये चेहरे के तापमान पर भी नजर रहेगी। यह तकनीक भरपूर नींद ले चुके सक्रिय व्यक्ति के चेहरे से ड्राइवर के चेहरे का मिलान कर उसके अंतर का आकलन करेगी। असामान्य लक्षण मिलते ही नोडल अफसर के मोबाइल पर अलर्ट भेज देगी। 

सशस्त्र बलों के बाद अन्य संगठन भी कर सकेंगे उपयोग
प्रयोगशाला प्रतिष्ठान के अधिकारियों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की मांग पर प्रणाली विकसित कराई गई है। पहले इसका इस्तेमाल सेना और सशस्त्र बलों के ड्राइवरों पर नजर रखने के लिए होगा। युद्ध या आपात स्थिति में लगातार काम करने वाले वाहन चालकों की स्थिति के सटीक आकलन से दुर्घटनाएं बचेंगी। बाद में सड़क परिवहन निगम समेत सार्वजनिक और निजी उपक्रमों में भी इस तकनीकी का लाभ मिल सकेगा। 

विशेषताएं
- ड्राइवर की शारीरिक-मानसिक स्थिति का सटीक आकलन
- उबासी, झपकी और पलकों के बार-बार झपकने पर अलर्ट
- ड्राइवर के चेहरे की इमेज प्रोसेसिंग से फुटेज अलर्ट भेजेगा