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डिफेंस कॉरिडोर झांसी नोड को पर्यावरण मंत्रालय से मिली हरी झंडी, 15 मीटर चौड़े क्षेत्र में होगा पौधारोपण

यूपी डिफेंस औद्योगिक कॉरिडोर झांसी नोड के लिए केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। पर्यावरणीय मंजूरी देते हुए परियोजना क्षेत्र के चारों ओर पौधारोपण की शर्त रखी है।

डिफेंस कॉरिडोर झांसी नोड को पर्यावरण मंत्रालय से मिली हरी झंडी, 15 मीटर चौड़े क्षेत्र में होगा पौधारोपण
Pawan Kumar Sharmaहिन्दुस्तान,लखनऊMon, 12 Feb 2024 08:32 PM
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यूपी डिफेंस औद्योगिक कॉरिडोर झांसी नोड के लिए केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। केंद्र सरकार ने पर्यावरणीय मंजूरी देते हुए परियोजना क्षेत्र के चारों ओर 15 मीटर चौड़े क्षेत्र में पौधारोपण कराने की शर्त रखी है। यूपी एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डवलपमेंट अथारिटी (यूपीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। यूपीडा झांसी के गरौठा तहसील में एरेच गेंदाकबूला, झबरा, कथरी, नैकेरा, लभेरा गांव में 1076.7040 हेक्टेयर क्षेत्र में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना करेगा। इसमें रक्षा संबंधी उपकरण बनाए जाएंगे और नए रोजगार के द्वार भी खुलेंगे।

यूपीडा ने पर्यावरण मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय झांसी द्वारा 17 अगस्त 2023 तक लोक सुनवाई की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों द्वारा किए गए प्रश्नों और समस्याओं के समाधान के संबंध में यूपीडा द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की गई। उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में कम से कम 33 प्रतिशत भू-भाग पर पौधारोपण भी कराया जाएगा।

औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले घरेलू मल जल के शुद्धीकरण के लिए आठ एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इससे शुद्ध होने वाले पानी का इस्तेमाल हरियाली बनाए रखने में किया जाएगा। उद्योगों से निकलने वाले जल को शुद्ध करने की व्यवस्था की जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र में किसी प्रकार से प्रदूषित उत्प्रवाह का निस्तारण नहीं होगा। उद्योगों द्वारा रूफटाप रैन वाटर रीचार्ज की व्यवस्था भी की जाएगी।

परियोजना स्थल के विकास व उसे चलाने से वायु गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव के आंकलन के लिए वायु व ध्वनि प्रदूषण की नियमित जांच कराई जाएगी। जल, वायु व ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण के लिए भी व्यवस्थाएं यूपीडा द्वारा की जाएंगी। सभी उद्योगों द्वारा जरूरत के अनुसार विभिन्न संस्थाओं से स्वीकृतियां, पर्यावरीय स्वीकृतियां प्रमाण पत्र प्राप्त करने होंगे।

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