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डीडीयू  प्रोफेसर ने राजभवन को दूसरी बार लिखी चिट्ठी, जांच की मांग; फेसबुक के जरिए भी उठाए सवाल

डीडीयू में शिक्षकों के वरिष्ठता निर्धारण के बाद एक बार फिर गर्माहट आ गई है। कार्य परिषद सदस्य प्रो. सुभी धुसिया ने एक महीने में दूसरी बार राजभवन को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की है।

डीडीयू  प्रोफेसर ने राजभवन को दूसरी बार लिखी चिट्ठी, जांच की मांग; फेसबुक के जरिए भी उठाए सवाल
Ajay Singhहिन्‍दुस्‍तान,गोरखपुरSat, 03 Feb 2024 12:04 PM
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DDU News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों के वरिष्ठता निर्धारण के बाद एक बार फिर गर्माहट आ गई है। कार्य परिषद सदस्य प्रो. सुभी धुसिया ने एक महीने में दूसरी बार राजभवन को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठता को लेकर कार्य परिषद की कार्यवाही रजिस्टर में भी उन्होंने नोट ऑफ डिसेंट लगाया है। प्रो. सुभी धुसिया जुलाई महीने में ही वरिष्ठता के चक्रानुक्रम में समाजशास्त्रत्त् की विभागाध्यक्ष बनीं थीं। एक फरवरी को कार्य परिषद की बैठक के बाद डीडीयू प्रशासन द्वारा जारी आदेश के बाद प्रो. अनुराग द्विवेदी को समाजशास्त्र का विभागाध्यक्ष बनाया गया है। 

प्रो. अनुराग द्विवेदी ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। वरिष्ठता निर्धारण में उन्हें जूनियर बताए जाने पर एक महीने पहले भी प्रो. धुसिया ने राजभवन को पत्र लिखा था। इस सम्बंध में राजभवन ने डीडीयू प्रशासन से जांच कराकर आख्या मांगी थी। इस बीच एक फरवरी को कार्य परिषद की बैठक के दिन ही उन्होंने पुन राजभवन को पत्र लिखा है। कुलपति और कुलसचिव को भी उन्होंने इसकी प्रति भेजी है। यह पत्र वायरल हो रहा है। पत्र के मुताबिक प्रो. सुभी और प्रो. अनुराग की नियुक्ति वर्ष 2001 में हुई थी। प्रो. सुभी ने 20 जुलाई और प्रो. अनुराग ने 21 जुलाई को विभाग में ज्वाइन किया था।

तीन विभागों में अध्यक्ष बदलने की सुगबुगाहट
कार्य परिषद में वरिष्ठता सूची की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद तीन अन्य विभागों में भी विभागाध्यक्ष बदलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा है कि हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर जल्द ही आदेश जारी हो सकता है। दिसंबर 2021 में प्रो. कमलेश गुप्त के निलंबन के कारण वे विभागाध्यक्ष नहीं बन पाए थे। वरिष्ठता के चक्रानुक्रम में वे विभागाध्यक्ष बन सकते हैं। विज्ञान संकाय के दो प्रमुख विभागों में भी अध्यक्ष बदल सकते हैं।

फेसबुक पर भी की टिप्पणी
प्रो. सुभी ने सोशल मीडिया ‘फेसबुक’ पर भी इस सम्बंध में पोस्ट किया है। उन्होंने प्रो. अनुराग को बधाई देते हुए लिखा है, इससे कुछ इतर सवाल हैं। जानती हूं ये फोरम इसके लिए नही है, पर जहां से जवाब मिलना था, उस संस्था ने कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा। अगर कोई मसला किसी सर्वोच्च संस्था में विचाराधीन है तो क्या उसकी अधीन संस्था फैसला ले सकती है?

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