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शुद्र होने से दानवीर कर्ण को भी झेलना पड़ा अपमान, पिछड़े-दलित की लड़ाई को अखिलेश यादव ने दी और धार

रामचरितमानस पर बयान से शुरू हुआ विवाद महाभारत तक पहुंच गया है। अखिलेश यादव ने रविवार को दानवीर कर्ण का उदाहरण देते हुए सीएम योगी पर निशाना साधा। बोले- शुद्र होने से कर्ण को अपमान झेलना पड़ा।

शुद्र होने से दानवीर कर्ण को भी झेलना पड़ा अपमान, पिछड़े-दलित की लड़ाई को अखिलेश यादव ने दी और धार
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,मैनपुरीSun, 05 Feb 2023 09:02 PM

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रामचरितमानस पर बयान से शुरू हुआ विवाद महाभारत तक पहुंच गया है। अखिलेश यादव ने रविवार को दानवीर कर्ण का उदाहरण देते हुए सीएम योगी पर निशाना साधा। कहा कि शुद्र होने के कारण ही दानवीर कर्ण को भी अपमान झेलना पड़ा। अखिलेश ने यहां तक कहा कि जिन लोगों ने समाज को जातियों में बांटा वही लोग जातीय जनगणना नहीं कराना चाहते हैं। कहा कि पिछड़ों-दलितों को संविधान में मिले अधिकारी भी भाजपा नहीं देना चाहती है। जब तक जातीय गणना नहीं होगी, तब तक पिछड़ों और दलितों को भागीदारी कैसे मिलेगी। अगर यह लोग जातीय गणना नहीं करा सकते तो सरकार से हट जाएं। हम लोग तीन महीने में जातीय गणना करा देंगे। 

मैनपुरी में रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश ने कहा कि जातीय व्यवस्था की समस्या आज की नहीं है। यह पांच हजार साल पुरानी समस्या है। यह एक दिन में हल नहीं होगी। कहा कि महाभारत पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि कर्ण को शुद्र होने के कारण क्या-क्या झेलना पड़ा था। योगी जी आ रहे हैं आप लोग उनसे इस पर पूछिए। कहा कि रामधारी सिंह दिनकर जी ने कर्ण के बारे में जो लिखा है उसे पढ़िए। उन्होंने लिखा है कि कर्ण को केवल शुद्र होने के कारण किस तरह से अपमानित होना पड़ा था। 

अखिलेश ने भाजपा का नाम लेकर कहा कि यह वही लोग हैं जिन्होंने जाति व्यवस्था बनाई है। यह लोग जाति खत्म नहीं करना चाहते। यह लोग जातियों को अधिकार नहीं देना चाहते हैं। संविधान में मिला हक भी यह पिछड़े और दलित जातियों को नहीं देना चाहते हैं। भाजपा के लोग जातीय व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहते हैं। इसलिए ही जातीय गणना नहीं कराने को तैयार हैं। जातीय गणना के बाद ही सभी जातियों को उनका हक और भागीदारी मिल सकेगी।

अखिलेश ने कहा कि संविधान में मिले अधिकार को भी नहीं दिया जा रहा है। इस सरकार को बताना चाहिए कि राज्य के विश्वविद्यालयों में कितने कुलपति पिछड़े-दलित और आदिवासी हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कितने वीसी पिछड़े-दलित और आदिवासी हैं। संविधान में जो अधिकारी पिछड़ों दलितों को मिले हैं। वह भी छीने जा रहे हैं।

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