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दिल्ली के एनजीओ में मिलीं खीरी की 27 लड़कियां, सीडब्ल्यूसी ने वापस घर भेजा

सीडब्ल्यूसी दिल्ली ने नजफगढ़ स्थित एक एनजीओ से 27 जनजाति लड़कियों को बरामद किया है। सभी लखीमपुर खीरी की रहने वाली है। वैरिफिकेशन कराने के बाद सभी को वापस घर भेज दिया गया है।

दिल्ली के एनजीओ में मिलीं खीरी की 27 लड़कियां, सीडब्ल्यूसी ने वापस घर भेजा
Pawan Kumar Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,लखीमपुर खीरीSat, 15 Jun 2024 10:08 PM
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दिल्ली के हॉस्टल में रह रही खीरी जिले के थारू बाहुल्य इलाके की 27 लड़कियों को दिल्ली सीडब्ल्यूसी ने रेस्क्यू कर खीरी भिजवाया। उनके पतों के सत्यापन के बाद खीरी की सीडब्ल्यूसी यानी बाल कल्याण समिति ने उनको अभिभावकों के सुपुर्द किया है। वहीं करीब 15 लड़कियां अभी भी दिल्ली में हैं। इनकी परीक्षा होने के कारण इनको सरकारी हास्टल में रहने की सुविधा दी गई है। एक साथ एक ही जगह पर आदिवासी समाज की इन किशोरियों का मामला चर्चा का विषय बना है। यह किशोरियां कब से दिल्ली में रह रही थी, कौन इनको लेकर गया। 

मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली में चल रहे एक एनजीओ के हॉस्टल में छापा मारकर दिल्ली की बाल कल्याण समिति ने यहां रह रही किशोरियों के बारे में जानकारी ली। खीरी जिले के चंदनचौकी इलाके की 10 से 17 साल की इन किशोरियों के बारे में बाल कल्याण समिति खीरी से बात की और उनके बताए जा रहे पतों के सत्यापन के लिए कहा। सीडब्ल्यूसी ने सभी किशोरियों के पते का सत्यापन कराया गया। खीरी जिले की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एसपी सिंह ने बताया कि 27 किशोरियों को दिल्ली से लाया गया। उनको यहां वन स्टाप सेंटर में रखकर उनके बयान दर्ज किए गए व काउंसलिंग की गई। किशोरियों ने बताया कि वह दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही थी। 

अभिभावकों ने भी पढ़ाई के लिए किशोरियों को भेजने की बात कही है। सभी किशोरियों का बयान दर्ज करने के बाद इनको अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया। उधर जानकारी यह भी मिली है कि इनके अलावा दिल्ली में रह रही और अन्य लड़कियों को एनजीओ के हास्टल से हटाकर सरकारी हास्टल में पहुंचाया गया। इन लड़कियों की अभी परीक्षा चल रही। परीक्षा समाप्त होने के बाद इन लड़कियों को दिल्ली से लाया जाएगा। परियोजना अधिकारी चंदनचौकी यूके सिंह का कहना है कि सीडब्ल्यूसी से इन लड़कियों के बारे में जानकारी मिली है। पता चला है कि लड़कियों को पढ़ाई के लिए उनके अभिभावकों की सहमति से भेजा गया।

करीब एक महीने पहले आई थी सूचना

जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एसपी सिंह का कहना है कि करीब एक महीना पहले बाल कल्याण समिति दिल्ली की अध्यक्ष अलका श्रीवास्तव से लड़कियों के बारे में सूचना दी थी और उनके पते का सत्यापन करने को कहा था। सूचना मिलते ही इन सभी लड़कियों के पते का सत्यापन कराया गया। इसमें से पांच किशोरियों के अभिभावकों के घर में सत्यापन नहीं हो पाया था। सत्यापन को गई टीम को उनके घरों में ताला लगा मिला था। उस समय चुनाव चल रहा थे, इसलिए चुनाव निपटते ही सभी किशोरियों को जिले में लाया गया। यहां उनके बयान दर्ज करने के बाद किशोरियों को उनके अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया। सभी किशोरियों ने एक ही तरह का बयान दिया है जिसमें सभी ने बताया है कि वह वहां रहकर पढ़ाई कर रही थी।

कैसे दिल्ली पहुंची यह लड़कियां, कई सवाल बरकरार

खीरी जिले के भारत-नेपाल सीमा पर जंगलों के बीच आबाद आदिवासी समाज की यह लड़कियां कब दिल्ली ले जाई गईं। लड़कियों को दिल्ली लेकर कौन गया, इसकी जानकारी खीरी जिले के अफसरों को फिलहाल नहीं है। हालांकि इन लड़कियों के परिजनो की ओर से कोई शिकायत भी यहां दर्ज नहीं है। अधिकारियों की मानें तो इन लड़कियों ने भी समिति के सामने कोई शिकायत या गलत व्यहार का मामला नहीं उठाया है। 

चंदनचौकी में आवासीय विद्यालय, फिर भी दिल्ली में पढ़ाई?

दिल्ली में पढ़ाई के लिए लड़कियों को ही ले जाया गया। दिल्ली में 42 लड़कियां पढ़ने के लिए भेजी गई थी। सीडब्ल्यूसी ने एनजीओ के यहां छापा मारकर लड़कियों के बारे में डिटेल एकत्र की। अब सवाल यह उठता है कि आखिर पढ़ाई के लिए लड़कों को क्यों नहीं ले जाया गया। लड़कियों को ही क्यों ले जाया गया यह भी बड़ा सवाल है। जनजातीय परियोजना अधिकारी यूके सिंह कहते हैं कि दिल्ली से लाई गई लड़कियों के माता-पिता गरीब हैं। हो सकता है कि वे दिल्ली में पढ़ाई के खर्च  की वजह से उनको भेज रहे हों। हालांकि चंदनचौकी में आदिवासी समाज के लिए आवासीय विद्यालय है, जहां से टॉपर निकलते हैं।

इस मामले में खीरी डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि दिल्ली की इन 27 बालिकाएं  12 जून को लखीमपुर में सुबह 5 बजे दिल्ली से आई थी। उसी दिन उन्हें उनके माता-पिता को बाल कल्याण समिति द्वारा सुपुर्द  कर दिया गया था।