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13 साल की उम्र में डाकू बनी सीमा परिहार 20 साल बाद फिर सलाखों के पीछे, सैकड़ों अपहरण व हत्याओं से फैलाई थी दहशत

चर्चित महिला दस्यु सीमा परिहार और उनके साथियों को 30 साल पुराने मामले में कोर्ट ने चार साल की सजा सुनाई है। साथ ही पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

13 साल की उम्र में डाकू बनी सीमा परिहार 20 साल बाद फिर सलाखों के पीछे, सैकड़ों अपहरण व हत्याओं से फैलाई थी दहशत
Pawan Kumar Sharmaसंवाददाता,औरैयाWed, 21 Feb 2024 08:45 PM
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चंबल के बीहड़ में कई दशकों तक डाकुओं का राज रहा लेकिन फूलन देवी के बाद एक और चर्चित महिला दस्यु हुई जिसका नाम सीमा परिहार रहा। हालांकि, सीमा ने 18 साल तक राज करने के बाद साल 2000 में बेटे की परवरिश की खातिर बीहड़ को अलविदा कहकर औरैया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद 2004 में जमानत पर रिहा हुई। अब 20 साल बाद फिर जेल भेज दी गई।

30 साल पुराने अपहरण के मामले में दस्यु सुंदरी सीमा परिहार सहित चार लोगों को कोर्ट ने चार साल की सजा सुनाई है। सभी पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दरअसल 19 मार्च 1994 को गढ़िया बक्शी निवासी श्रीकृष्ण त्रिपाठी ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उसका भाई प्रमोद त्रिपाठी ट्यूबवेल पर बने कमरे में लेटा हुआ था। रात 12:30 बजे 10 से 15 बदमाश आए और दरवाजा खुलवाकर प्रमोद को पकड़कर अजनपुर गांव की तरफ चले गए। बाद में गिरोह की पहचान डकैत लालाराम व सीमा परिहार के रूप में हुई। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया। बाद में अपह्त गिरोह के चंगुल से छूटकर घर आ गया। 

पहले केस इटावा में चला, बाद में औरैया जिला बनने पर यहां ट्रांसफर हो गया। दस्यु सरगना लालाराम की मौत हो चुकी है। सीमा परिहार, रामकिशन, छोटे सिंह और अनुरुद्ध के खिलाफ विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम औरैया सुनील सिंह के समक्ष केस चला। एडीजे सुनील सिंह ने चारों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। बुधवार को सीमा परिहार समेत चारों को कोर्ट में पेश किया। जज ने चार-चार साल की सजा सुनाई। अभियोजन की ओर से डीजीसी अभिषेक मिश्रा व एडीजीसी मुकेश पोरवाल ने बताया कि चारों को इटावा जेल भेज दिया गया।

फूलन देवी को आदर्श मानती थी सीमा

सीमा परिहार का जन्म 1970 के औरैया में गरीब परिवार में हुआ था। उन दिनों इस क्षेत्र में डाकुओं का आतंक था। यहीं से कुछ दूर चंबल और यमुना नदी के किनारे स्थित बीहड़ ही डकैतों का मुख्य ठिकाना था। साल 1983 में सीमा के गांव में डाकुओं ने धावा बोला और दस्यु सरगना लालाराम सीमा को 13 साल की उम्र में अपने साथ लेकर चला गया। जो बच्ची अपने गांव में रहती थी वह अब खूंखार डकैतों के बीच रहने लगी। धीरे-धीरे वह खुद चंबल की दस्यु सुंदरी बन गई।

डकैतों के साथ रहने के दौरान ही सीमा ने फूलन देवी का नाम सुना था और फूलन को आदर्श मानने लगी। लंबी कद काठी पर वर्दी के साथ माथे पर टीका, सिर पर लाल पट्टी और बंदूक सीमा की पहचान बन गई। उस समय सीमा परिहार खौफ का दूसरा नाम थी। सीमा परिहार चंबल की सबसे कुख्यात और पुलिस के लिए मोस्टवांटेड अपराधी बन गई और उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर लाखों का इनाम भी रखा गया।

खौफ से पसर जाता था सन्नाटा

सीमा परिहार के खौफ के कारण 80-90 के दशक में सन्नाटा पसर जाता था। कई सालों तक डाकू लालाराम के साथ काम करने के बाद वह मशहूर डाकू निर्भय गुर्जर के साथ काम करने लगी। निर्भय के साथ आने के बाद कई बार सीमा का मुकाबला पुलिस के साथ हुआ। घंटों चलने वाली मुठभेड़ों के बाद भी सीमा और निर्भय बच निकलते थे। 90 के दशक के अंत तक सीमा का खौफ करीब 6 लाख एकड़ जमीन के हिस्से पर था।

30 डकैती, 150 से ज्यादा अपहरण

सीमा ने डकैतों के बीच ही बीहड़ में डाकू निर्भय गुर्जर से शादी की थी। चंबल में आतंक मचाने के दौरान सीमा ने करीब 30 डकैती और 150 से ज्यादा अपहरण किए थे। लेकिन सीमा परिहार का बीहड़ों से मन तब उचट गया, जब साल 2000 में डाकू लालराम को पुलिस एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया।

चंबल में 18 साल रही धाक

18 साल चंबल के इलाके में धाक और खौफ का दूसरा नाम रही सीमा परिहार ने साल 2000 के जून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सीमा के सरेंडर करने के बाद उन पर करीब 29 केस दर्ज हुए। सीमा को इसके बाद इटावा जेल भेज दिया गया। जहां उन्होंने तीन साल 7 महीने गुजारे और 2004 में वह बाहर आ गई। 

कभी महिलाओं से जेवर नहीं उतरवाए 

सीमा परिहार ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे जब गांव में लूट या डकैती करने जाती थीं तो कभी भी उन्होंने महिलाओं के पहने हुए जीवन नहीं उतराए। विशेष कर नाक, कान और गले में पहने हुए जेवर उन्होंने कभी नहीं लूटे, वे केवल उतने ही गहने लूट कर लाती थीं जो महिलाएं पहने नहीं होती थीं।

फूलन की तरह राजनीतिक बुलंदी छूना चाहती थी सीमा

दस्यु सरगना लालाराम के कानपुर देहात में मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से सीमा परिहार जिले के औद्योगिक नगर दिबियापुर के संजय नगर में भाई-भाभी के साथ रहने लगी थी। वह बेटे के लालन पालन और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हो गई। दस्यु जीवन से निकलकर संसद तक का सफर तय करने वाली फूलन देवी की तरह सीमा परिहार की भी राजनीति में मुकाम हासिल करने की चाहत थी। इसी के चलते पिछले दो दशक में राजनीतिक दलों में भी सक्रिय रही पर सफलता नहीं मिल सकी थी।

सीमा परिहार ने 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना को सपोर्ट किया और फिर 2006 में इंडियन जस्टिस पार्टी से जुड़ गईं। सीमा परिहार ने फिर 2008 में सपा जॉइन की। साल 2010 में सीमा को ''बिग बॉस 4'' का ऑफर मिला। सीमा ने शो में सलमान खान समेत सबका दिल जीत लिया था। वह 76 वें दिन शो से बाहर हो गई। ''बिग बॉस'' के एक साल बाद सीमा परिहार को 2011 में नेशनल करप्शन एजुकेशन काउंसिल के महिला आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया। सीमा परिहार की जिंदगी पर बुंडेड नाम से एक फिल्म भी बनी थी, जिसमें स्वयं सीमा ने लीड रोल निभाया है। सीमा परिहार राजनीति के अलावा सोशल वर्क में भी जुटी रही। फफूंद स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन में भी उसकी भागीदारी रही थी।

सीमा परिहार ने की थी दो शादियां 

कुख्यात लाला राम अपहरण कर उसे चंबल ले गया, जहां सीमा रेप किया जाता रहा। सीमा परिहार ने जैसा अपने एक इंटरव्यू में कवि व पत्रकार कुमार मनोज को बताया था कि बीहड़ में जाने पर पहले उसका विवाह दस्यु निर्भय गुर्जर के साथ कर दिया गया पर शादी कुछ महीने ही चली थी। बाद में दस्यु लालाराम से हुई। सीमा ने अपने इस इंटरव्यू में बेटे सागर को लालाराम का ही बताया था।
      
2004 से जमानत पर चल रही थी सीमा

सीमा परिहार ने अन्य मामलों में 29 नवंबर 2000 को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। 28 मार्च 2003 को सीआरपीसी की धारा 309  में वारंट तलब कर इस मामले में जेला भेजा गया था। 26 मार्च 2004 को कोर्ट से जमानत पर रिहा किया गया था। तब से वह जमानत पर चल रही थी।  दस्यु सुंदरी सीमा परिहार पर जालौन, कानपुर देहातऔर औरैया के विभिन्न थानों पर करीब 30 आपराधिक मुकदमें पंजीकृत हैं।

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