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18 नवंबर, 2020|10:58|IST

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यूपी के इस जिले में भी होगा कोरोना वैक्सीन का ट्रायल, 400 पूर्ण रूप से स्वस्थ लोगों पर किया जाएगा परीक्षण

two vaccine candidates in the fray were shortlisted after successful toxicity studies in animals  re

कोरोना महामारी से चल रही लड़ाई में आगरा जिले का एसएन मेडिकल कालेज बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। संभवत: 15 अगस्त से यहां कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया जाएगा। कालेज की एथीकल कमेटी ने इसे हरी झंडी दे दी है। कागजी खानापूरी और विधि संबंधी परामर्श के बाद एम्स की तर्ज पर ट्रायल किए जाएंगे। परीक्षण के लिए कुछ डाक्टरों ने भी हामी भर दी है। 

दुनिया भर में कोविड की वैक्सीन के परीक्षण शुरू हो गए हैं। यहां भी एम्स के साथ कुछ और अस्पतालों में ट्रायल शुरू करने की तैयारी है। एसएन मेडिकल कालेज भी उनमें से एक होगा। कालेज की एथीकल कमेटी के सामने इस युद्ध में अस्पताल के भागीदार बनने का प्रस्ताव रखा गया था। इसे मंजूर कर लिया गया। अब परीक्षण के प्रोटोकाल का अध्ययन होगा। परीक्षण की विधि का डाक्यूमेंटेशन तैयार किया जाएगा। विधि संबंधी परामर्श भी लिए जाएंगे। इस काम में आठ से 10 दिन लग सकते हैं। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चुने गए स्वयंसेवकों पर प्रयोग शुरू कर दिए जाएंगे। खुद पर परीक्षण कराने के लिए फिलहाल एसएनएमसी के कुछ डाक्टर तैयार हो गए हैं। अस्पताल को प्रयोग के लिए करीब 400 स्वयंसेवक चाहिए होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रयोग सफल रहे तो सामान्य लोगों को भी इसकी खुराक दी जा सकेगी। स्वयंसेवक बनने के लिए एसएन प्रशासन जल्द ही पंजीकरण शुरू करने जा रहा है। इच्छुक लोग अस्पताल के मेडीसिन विभाग में भी संपर्क कर सकते हैं। 

डा. बलवीर सिंह, विभागाध्यक्ष मेडीसिन विभाग ने बताया कि हमें कम से कम 400 स्वस्थ लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल करना होगा। इसके लिए स्वयंसेवक चाहिए होंगे। इनकी उपलब्धता पर ही ट्रायल की सफलता निर्भर रहेगी। प्रोटोकाल के मुताबिक हरेक को दो इंजेक्शन दिए जाएंगे। लगातार मानीटरिंग की जाती रहेगी। अभी अस्पताल के कुछ डाक्टरों ने अपनी सहमति दे दी है। डा. संजय काला, प्राचार्य एसएनएमसी ने बताया कि वैक्सीन में कोई जिंदा वायरस नहीं है। मृत वायरस से परीक्षण किया जा रहा है। इसलिए प्रयोग करने वालों पर इसका खतरा नहीं है। हमारी कोशिश जनवरी या फरवरी तक इसके सफल परीक्षण की है। ऐसा हुआ तो हम बड़ी आबादी को टीका या खुराक देने में सक्षम हो सकेंगे। एसएनएमसी की टीम ने तैयारी शुरू कर दी है। 

 

18 से 50 साल तक वालों पर प्रयोग 
वैक्सीन के ट्रायल के लिए अस्पताल को 18 से 50 साल तक के 100 स्वस्थ लोगों की जरूरत पड़ेगी। उन्हें किसी तरह की कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उनके क्लीनिकल ट्रायल लिए जाएंगे। इनमें रक्त, उदर, हृदय, संक्रमण संबंधी सभी जांचें की जाएंगी। इनके आधार पर सभी स्वयंसेवकों की रिपोर्ट तैयार करके विश्लेषण किया जाएगा। परीक्षण से पहले और बाद में कोविड की जांच भी की जाएगी। 

हर स्वयंसेवक को दी जाएंगी दो खुराक 
जांच के लिए पात्र पाए गए हर स्वयंसेवक को दो खुराक दी जाएंगी। पहली खुराक देने के बाद 14 दिन तक परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद कोविड टेस्ट कराया जाएगा। नेगेटिव रिपोर्ट आने पर उसे फिर 14 दिन के लिए दूसरी खुराक दी जाएगी। इस अवधि के बाद दोबारा कोविड टेस्ट होगा। इस बार फिर रिपोर्ट और दूसरी जांच करने के बाद सफलता या असफलता तय की जाएगी। इस दौरान एंटीबॉडी की भी जांच होगी। 

मेडीसिन विभाग की टीम करेगी काम 
परीक्षण में सबसे बड़ी भूमिका मेडीसिन विभाग की टीम निभाएगी। विभागाध्यक्ष डा. बलवीर सिंह नेतृत्व करेंगे। इसमें दूसरे विभागों के अनुभवी डाक्टरों को भी लिया जाएगा। परीक्षण की तैयारी, कागजी खानापूरी और प्रोटोकाल का अध्ययन करने के लिए हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डा. सीपी पाल का भी सहयोग लिया जाएगा। जबकि प्राचार्य डा. संजय काला पूरी प्रक्रिया पर निगाह रखेंगे। समय-समय पर रिपोर्ट लेंगे। 

कोविड के बारे में जानिए
फेफड़ों तक पहुंच जाता है 
वायरस नाक या मुंह से गले के रास्ते होते हुए सांस नली में जाता है। यहां से फेफड़ों तक पहुंच जाता है। यह श्वांस नली को प्रभावित या रुकावट पैदा करता है। फेफड़ों के अंदरूनी सिस्टम में अगर हवा नहीं जाती तो वेंटीलेटर, नेजल स्प्रे या वाईपैप मशीन का सहारा लिया जा सकता है। लेकिन अगर वायरस ने खून की नलियां बंद कर दीं तो सभी इलाज फेल हो जाते हैं। ऐसे मरीज को बचाना मुश्किल होता है। 

इस तरह मरता है कोविड 
इस वायरस में तीन तरह के प्रोटीन हैं। 'एम' प्रोटीन शरीर के अंदर पहुंच जाता है। यह वायरस एंटीबॉडी विकसित होने पर मरता है। इसके लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानी होती है। 'एनवलप' यानि लिफाफा और 'स्पाइक' यानि कांटे सतहों पर चिपके रहते हैं। साबुन-पानी से धोने पर एनवलप (लिफाफा) खुल जाता है और वायरस मर जाता है। स्पाइक का अंत इसी तरह होता है। इसीलिए बार-बार हाथ धोने को कहा जाता है। 

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  • Web Title:Corona Vaccine trial will be conducted in agra district of UP 400 completely healthy people will be tested