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यूपी में छह दिन बाद शुरू होगा कोरोना वैक्सीनेशन, जानें सबसे पहले किसे मिलेगा इसका फायदा

कोविड टीकाकरण अभियान की शुरूआत आगामी 16 जनवरी से शुरू किये जाने की घोषणा होते ही उत्तर प्रदेश में इसको लेकर तैयारियां और तेज हो गईं हैं।  यूं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की की निगरानी में इस...

यूपी में छह दिन बाद शुरू होगा कोरोना वैक्सीनेशन, जानें सबसे पहले किसे मिलेगा इसका फायदा
विशेष संवाददाता,लखनऊSat, 09 Jan 2021 11:32 PM
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कोविड टीकाकरण अभियान की शुरूआत आगामी 16 जनवरी से शुरू किये जाने की घोषणा होते ही उत्तर प्रदेश में इसको लेकर तैयारियां और तेज हो गईं हैं।  यूं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की की निगरानी में इस टीकाकरण अभियान की तैयारियां काफी पहले से ही शुरू हो चुकी थीं। शनिवार को केन्द्र से आए निर्देश के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के साथ ही गृह विभाग को भी अलर्ट कर दिया गया। सभी जिलाधिकारियों, सभी सीएमओ को खासतौर पर निर्देश जारी किये गये। इसी क्रम में फाईनल ड्राई रन सोमवार 11 जनवरी को किया जाएगा।  टीका लगाने पर किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल उपचार मुहैया करवाने के लिए हर जिले में पर्याप्त संख्या में बेड आरक्षित कर लिये गये हैं।

प्रदेश के अपर मुख्य सचिव सूचना  नवनीत सहगल ने  शनिवार को लोक भवन में प्रेस प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि वैक्सीनेशन की तैयारियों को लेकर ड्राई रन का फाइनल अभियान 11 जनवरी  को पूरे प्रदेश में चलाया जायेगा, जिससे किसी प्रकार की कमी को पहले से ही दूर कर लिया जायेगा। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य  अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि  वैक्सीनेशन की तैयारियों को लेकर 11 जनवरी  को पूरे प्रदेश के 1500 केन्द्रों पर ड्राई रन का फाइनल अभियान चलाया जायेगा। पहले चरण प्रदेश में निजी व सरकारी अस्पतालों में कुल नौ लाख  स्वास्थ्य कर्मियों को 16 जनवरी से हर सोमवार व शुक्रवार को कोविड का टीका लगाया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मियों का यह टीकाकरण कुल चार चरणों में सम्पन्न होगा। स्वास्थ्य कर्मियों के बाद कोविड संक्रमण नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभा रहे  अन्य फ्रंट लाइन वर्कर पुलिस, होमगार्ड, निकाय कर्मचारी आदि को टीके लगाए जाएंगे। इनकी तादाद लगभग चार करोड़ आंकी गयी है। इन स्वास्थ्यकर्मियों की जिलेवार सूची पहले ही बनायी जा चुकी है।

राजधानी लखनऊ हर जिले में कुछ निजी व कुछ सरकारी अस्पतालों को पहले चरण के इस टीकाकरण के लिए चिन्हित किया गया है जहां जिले के स्वास्थ्य कर्मी बुलाये जाने पर जाकर कोविड का टीका लगवाएंगे। देश भर में जिन पांच हजार केंद्रों पर टीकाकरण की शुरूआत होगी उसमें से 850 केंद्र यूपी के हैं। आक्सफोर्ड की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन लगाने को हरी झंडी पहले ही दी जा चुकी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि कोरोना टीकाकरण की पुख्ता तैयारियां की जा रही हैं। पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाए जाने के बाद दूसरे चरण में करीब 18 लाख फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लगाया जाएगा। इसमें राजस्व कर्मी, नगर निगम कर्मी और पुलिस आदि शामिल हैं। दूसरे चरण के टीकाकरण के लिए तीन हजार केंद्र बनाए गए हैं। तीसरे चरण में 50 साल से अधिक आयु के लाेगों को और चौथे चरण में 50 साल से कम उम्र के उन लोगों को जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, उन्हें टीका लगाया जाएगा। डॉ. नेगी ने बताया कि हर टीकाकरण केंद्र पर प्रतिदिन 100 लोगों को टीका लगाया जाना है। 

प्रदेश में भण्डारण क्षमता बढ़ी

यूपी में अभी तक 80 हजार लीटर वैक्सीन रखने की व्यवस्था थी लेकिन अब 1.23 लाख लीटर वैक्सीन रखने की और व्यवस्था कर दी गई है। ऐसे में अब 2.03 लाख लीटर वैक्सीन  रखी जा सकती है। दो डिग्री सेल्सियस से लेकर आठ डिग्री सेल्सियस तक तापमान पर वैक्सीन रखी जा सकेंगी। इसके लिए प्रदेश में आठ वॉक इन कूलर, चार वॉक इन फ्रीजर, 1,610 आइएलआर, 1,430 डीप फ्रीजर, 26,800 वैक्सीन कैरियर और 1,950 कोल्ड बॉक्स केंद्र सरकार ने दिए हैं। 22 जिलों में वैक्सीन रखने के लिए 500 वर्ग फीट के कमरे बनाए गए हैं। 

महाराष्ट्र के सरकारी अस्पताल में अग्निकांड के मद्देनजर सतर्कता 
अपर मुख्य सचिव सूचना श्री सहगल ने बताया कि महाराष्ट्र के भण्डारा जिले में सरकारी अस्पताल की दुर्घटना को देखते हुए  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने प्रदेश के सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम एवं अन्य चिकित्सा संस्थानों में फायर सेफ्टी के सभी प्रबंध मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किये जाने के निर्देश दिये हैं।
 उन्होंने बताया कि समस्त सरकारी, निजी अस्पतालों अथवा भीड़भाड़ वाले स्थान जहां ज्यादा लोग एकत्र रहते हैं वहां पर फायर सेफ्टी के सम्बंध में की गयी व्यवस्था का सत्यापन किया जाय। यह भी सुनिश्चित कराया जाय कि सभी अस्पतालों, मेडिकल काॅलेजों तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों आदि में फायर सेफ्टी से सम्बंधित उपकरण हों और इसको चलाने वाले आपरेटर भी उपलब्ध हों।

 

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