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नीतीश-राजभर को 'पलटूराम' बता पोस्‍टर लगाना पड़ गया भारी, आशुतोष सिंह सपा से निष्‍कासित

बिहार का राजनीतिक घटनाक्रम और सीएम नीतीश कुमार लगातार सुर्खियों में हैं। इधर, लखनऊ में सपा दफ्तर के बाहर नीतीश कुमार और ओपी राजभर पर विवादित पोस्‍टर लगवाना पार्टी नेता आशुतोष सिंह को भारी पड़ गया।

नीतीश-राजभर को 'पलटूराम' बता पोस्‍टर लगाना पड़ गया भारी, आशुतोष सिंह सपा से निष्‍कासित
Ajay Singhहिन्‍दुस्‍तान,लखनऊTue, 30 Jan 2024 02:44 PM
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Samajwadi Party: बिहार का राजनीतिक घटनाक्रम और सीएम नीतीश कुमार लगातार सुर्खियों में हैं। इधर, लखनऊ में समाजवादी पार्टी दफ्तर के बाहर नीतीश कुमार और ओपी राजभर पर विवादित पोस्‍टर लगवाना पार्टी के एक नेता को भारी पड़ गया। पार्टी ने उन्‍हें बाहर का रास्‍ता दिखा दिया है। मंगलवार को कार्यालय प्रभारी अरविन्‍द कुमार सिंह की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि समाजवादी युवजन सभा के पूर्व प्रदेश सचिव आशुतोष सिंह को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्‍त होने के चलते समाजवादी पार्टी से निष्‍कासित कर दिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर एक पोस्‍टर लगाया गया था जिस पर बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्‍यक्ष ओमप्रकाश राजभर के लिए 'पलटूराम' लिखा गया था। पोस्‍टर में एक तरफ ब‍िहार के सीएम नीतीश कुमार और दूसरी तरफ सुभासपा अध्‍यक्ष ओपी राजभर की तस्‍वीर लगी थी। पोस्‍टर पर ल‍िखा था, 'राजनीत‍ि के दो पल्‍टूराम, जनता रहे इनसे सावधान।' बताया जा रहा है कि ये पोस्‍टर आशुतोष सिंह की ओर से लगाया गया था इसीलिए उनके खिलाफ ऐक्‍शन लिया गया है। 

सपा ने लिया ऐक्‍शन 
कार्यालय प्रभारी अरविन्‍द कुमार सिंह की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार आशुतोष सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्‍त रहने और अनुशासनहीनता के चलते हटाया गया है। पोस्‍टर लगने के बाद उनके खिलाफ यह ऐक्‍शन हुआ है। पार्टी ने इसे काफी गम्‍भीरता से लेते तत्‍काल कार्रवाई की है।

बताया जा रहा है कि ये विवादित पोस्‍टर सोमवार की रात को लगाया गया था जिसे जानकारी होते ही हटवा भी दिया गया। सपा की इस तुरत-फुरत कार्रवाई के पीछे राजनीति के जानकार अखिलेश यादव की रणनीति बता रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अखिलेश, नीतीश कुमार के एनडीए में जाने के बाद भी उन पर सीधी और तीखी प्रतिक्रिया से बच रहे हैं। इसके पीछे यूपी के सामाजिक समीकरण हैं। नीतीश कुमार कुर्मी बिरादरी से आते हैं। यूपी में इस बिरादरी की आबादी करीब छह प्रतिशत मानी जाती है। अखिलेश नहीं चाहते कि लोकसभा  चुनाव से ऐन पहले समाज के किसी वर्ग के मतदाताओं में उनकी ओर से कोई निगेटिव मैसेज जाए। वह इस मामले में बेहद सतर्क हैं। यहां याद दिला दें कि पिछले दिनों उन्‍होंने पार्टी की मीटिंग में एक सपा विधायक को बसपा सुप्रीमो मायावती का उल्‍लेख करने पर टोका था और उनका नाम सम्‍मान से लेने की नसीहत भी दी थी।

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