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Hindi News उत्तर प्रदेशकांग्रेस का दूसरे चरण में सबसे बड़ा दांव, मथुरा- गाजियाबाद-अमरोहा-बुलंदशहर में झोंकी ताकत 

कांग्रेस का दूसरे चरण में सबसे बड़ा दांव, मथुरा- गाजियाबाद-अमरोहा-बुलंदशहर में झोंकी ताकत 

कांग्रेस का दूसरे चरण में सबसे बड़ा दांव देखने को मिल रहा है। इसमें दोनों दल चार-चार सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने इन सीटों पर 2 दलित, 1 मुस्लिम और 1 ब्राह्मण महिला को उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस का दूसरे चरण में सबसे बड़ा दांव, मथुरा- गाजियाबाद-अमरोहा-बुलंदशहर में झोंकी ताकत 
Ajay Singhराजीव ओझा,लखनऊSun, 21 Apr 2024 05:46 AM
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Congress Politics in Second Phase: समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर लोकसभा चुनाव में उतरी कांग्रेस का दूसरे चरण में सबसे बड़ा दांव देखने को मिल रहा है। इसमें दोनों दल चार-चार सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने इन सीटों पर दो दलित, एक मुस्लिम और एक ब्राह्मण महिला को उम्मीदवार बनाया है। मथुरा की सामान्य सीट पर भी कांग्रेस ने दलित प्रत्याशी पर दांव लगाया है। पार्टी इन सीटों पर अपने स्टार प्रचारकों के जरिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। इन सीटों पर चुनाव 26 अप्रैल को है। 

दूसरे चरण में मथुरा के अलावा गाजियाबाद, अमरोहा व बुलंदशहर सुरक्षित सीट कांग्रेस के कोटे में है। इन सीटों में मथुरा से दलित समाज के मुकेश धनगर, बुलंदशहर सुरक्षित से शिवराम वाल्मिकी, गाजियाबाद से डॉली शर्मा व अमरोहा से कुंवर दानिश अली को कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया है। इसमें दानिश अली को छोड़कर शेष तीनों कांग्रेस के अपने कैडर के हैं। दानिश अली अमरोहा के मौजूदा सांसद हैं और बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए हैं। अन्य तीनों सीटों पर भी हाल के चुनावों का रिकार्ड कांग्रेस के लिए संतोषजनक नहीं है।

गाजियाबाद लोकसभा सीट पर कांग्रेस का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से बेहतर रहा है। वर्ष 2009 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा के राजनाथ सिंह सांसद चुने गए थे तो कांग्रेस के सुरेन्द्र प्रकाश गोयल दूसरे स्थान पर थे। फिर 2014 व 2019 में भाजपा के जनरल वीके सिंह सांसद चुने गए। वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस के राजबब्बर को हराया तो 2019 में सपा के सुरेश बंसल को हराया। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस की डॉली शर्मा तीसरे स्थान पर थीं। इस बार भाजपा ने जनरल वीके सिंह की जगह अतुल गर्ग को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने डॉली शर्मा को ही दोबारा मैदान में उतारा है। हालांकि इस बार उनके साथ सपा का समर्थन भी है।

मथुरा लोकसभा सीट पर ‌हाल के वर्षों में 2004 में कांग्रेस को सफलता मिली थी, तब उसके प्रत्याशी मानवेन्द्र सिंह सांसद चुने गए थे। इसके बाद 2009 में रालोद के जयंत चौधरी तथा 2014 व 2019 में भाजपा की हेमामालिनी सांसद चुनी गईं। वर्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह तीसरे स्थान पर चले गए थे। फिर 2019 के चुनाव में भी कांग्रेस के महेश पाठक तीसरे स्थान पर चले गए थे। इस बार भाजपा व रालोद की साझा प्रत्याशी हेमामालिनी के सामने कांग्रेस व सपा के साझा उम्मीदवार मुकेश धनगर मैदान में हैं। 

अमरोहा लोकसभा सीट पर तो 1984 के बाद कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला है। हाल के वर्षों में 2019 में बसपा के कुंवर दानिश अली, 2014 में भाजपा के कंवर सिंह तंवर व 2009 में रालोद के देवेन्द्र नागपाल सांसद चुने गए थे, जबकि 2004 में निर्दलीय हरीश नागपाल सांसद चुने गए थे। कांग्रेस को इस बार सपा के साथ बदौलत बसपा सांसद पर अपना दांव लगाया है। सपा भी 1996 में एक बार यह सीट जीत चुकी है। इस बार कांग्रेस व सपा के साझा प्रत्याशी के रूप में दानिश अली का मुकाबला भाजपा व रालोद के साझा प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर से है। बसपा ने मुजाहिद्दीन हुसैन को प्रत्याशी बनाया है। 

बुलंदशहर सुरक्षित लोकसभा सीट पर भी भाजपा का कब्जा है। वर्ष 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के भोला सिंह ने बसपा प्रत्याशियों को हराकर जीत दर्ज की थी, जबकि 2019 के चुनाव में कांग्रेस तीसरे स्थान पर थी। इस बार कांग्रेस व सपा के साझा उम्मीदवार शिवराम वाल्मीकि हैं तो भाजपा व रालोद के साझा प्रत्याशी भोला सिंह। बसपा ने नगीना के सांसद गिरीश चंद जाटव को इस सीट से प्रत्याशी बनाया है।