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20 अक्तूबर, 2020|11:31|IST

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मौतों की गुत्‍थी सुलझाने में बाधक बन रही गोलमोल पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट, गोरखपुर पुलिस उलझन में 

मौत की गुत्थी सुलझाने की जगह कई मामलों में ‘गोलमोल’ पीएम रिपोर्ट पुलिस की उलझन बढ़ा रही है। नतीजतन पुलिस तो परेशान हो रही रही है बेगुनाहों पर भी मुकदमा दर्ज करने का दबाव बढ़ जा रहा है। यही वजह है कि एसएसपी जोगेन्द्र कुमार ने सीएमओ को पत्र लिखकर पीएम रिपोर्ट को लेकर आ रही परेशानी से अवगत कराया और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट लिखने को कहा है।

चौरीचौरा के डुमरी खास गांव के गुलरोदन चौरसिया की घर के बगल में पड़ से लटकती लाश मिली थी। इस मामले में ढाई महीने में बाद पुलिस ने उसकी पत्नी सुनीता देवी की तहरीर पर गांव के प्रधान प्रतिनिधि पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस और गांव के लोग शुरू में इसे हैंगिंग मान रहे थे लेकिन पीएम रिपोर्ट ने केस को उलझा दिया। उसमें हैंगिग के साथ ही स्टैंगुलेशन भी लिखा था। इसका मतलब हत्या के बाद लटकाना। यही वजह थी कि पुलिस को केस दर्ज करना पड़ा। हालांकि विवेचक ने इस मामले में डॉक्टर से बात की तो डॉक्टर ने भी माना कि सुसाइड है लेकिन वह स्पष्ट तौर पर लिखकर देने के लिए तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि वह कोर्ट में ही बता पाएंगे। 

यह अकेला मामला नहीं है कई मामले हैं जिसमें पुलिस उलझी हुई है। जिसकी सजा बेगुनाहों को भुगतनी पड़ रही है। क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही आधार बनाकर बाद में आपसी विवाद में भी एक पक्ष दूसरे पक्ष पर नामजद केस दर्ज करा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट होने की वजह से पुलिस भी केस दर्ज कर लेती है लेकिन जांच में सच्चाई कुछ और आने के बाद भी पुलिस अपने स्तर से बेगुनाह को इंसाफ नहीं दे पाती है। 

रिपोर्ट में इन शब्दों से उलझन 
फांसी लगाकर खुदकुशी के मामले में अगर तड़पने के दौरान चोट आई है तो उसमें भी डॉक्टर हेड एंजरी लिख दे रहे हैं। यही नहीं खुदकुशी स्पष्ट होने पर स्टैंगुलेशन भी उलझा रहा है। स्टांगुलेशन से पूरा आशय ही बदल जाता है। इन मामलों में पुलिस को केस दर्ज करना ही पड़ता है। पीएम को आधार बनाकर दुश्मनी में कई लोग आरोपित बनाए जाते हैं और जेल चले जाते है। पुलिस की जांच में निर्दोष पाए जाने पर अगर नाम निकल गया तो फिर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठता है। नहीं निकला तो फिर डॉक्टर के बयान पर निर्भर करता है। 

मौत की वजह स्पष्ट लिखने का 2012 में आया था शासनादेश
दरअसल, मौत की वजह स्पष्ट न लिखी होने से पूरे प्रदेश में जब समस्या सामने आनी लगी तब 2012 में एक शासनादेश जारी कर पोस्टर्माटम रिपोर्ट का प्रोफार्मा बदल दिया गया और डॉक्टरों को स्पष्ट आदेश दिया गया कि मौत की वजह पीएम रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर दर्ज करें ताकि विवेचना में दिक्कत न आए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक नए फार्मेट के पूरे नियम का पालन डॉक्टर नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से अब भी पहले जैसी दिक्कत आ रही है।

मौत की वजह जानने के लिए पोष्टमार्टम रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन कुछ मामलों में पीएम रिपोर्ट एक जैसी ही सामने आने पर सीएमओ को पत्र भेजा गया है।
जोगेंद्र कुमार, एसएसपी

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  • Web Title:confusing postmortem reports are hurdles in investigation of deaths gorakhpur police facing problems