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Hindi News उत्तर प्रदेशचकबंदी अफसरों पर कार्रवाई के बाद महाराजगंज के समाज कल्याण अधिकारी की सेवा समाप्त, एक्शन में सीएम योगी

चकबंदी अफसरों पर कार्रवाई के बाद महाराजगंज के समाज कल्याण अधिकारी की सेवा समाप्त, एक्शन में सीएम योगी

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकसभा चुनाव खत्म होते ही एक्शन में हैं। लापरवाही पर कई चकबंदी अधिकारियों पर एक्शन के बाद महाराजगंज के समाज कल्याण अधिकारी शंकर लाल की सेवा समाप्त कर दी गई है।

चकबंदी अफसरों पर कार्रवाई  के बाद महाराजगंज के समाज कल्याण अधिकारी की सेवा समाप्त, एक्शन में सीएम योगी
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊFri, 14 Jun 2024 09:03 PM
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकसभा चुनाव खत्म होते ही एक्शन में हैं। लापरवाही पर कई चकबंदी अधिकारियों पर एक्शन के बाद महाराजगंज के समाज कल्याण अधिकारी शंकर लाल की सेवा समाप्त कर दी गई है। 65 लाख रुपये के पेंशन घोटाले के दोषी महाराजगंज के समाज कल्याण अधिकारी शंकर लाल की उरई में तैनाती के दौरान घोटाला हुआ था। इस मामले में जांच बैठी थी, जिसमें शंकर लाल दोषी पाए गये थे, इस पर शंकर लाल से गबन की राशि की वसूली के भी आदेश जारी हुए हैं। इस प्रकरण में राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डा. हरिओम ने बीती 15 मार्च को नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया था कि नोटिस तामील होने के तीन महीने बीतने पर शंकर लाल सेवा से निवृत्त माने जाएंगे। इस लिहाज से उनकी सेवाएं 15 जून को समाप्त हो जाएंगी। इसके साथ ही रिकवरी के आदेश भी दिए हैं। 

सितंबर 2021 में वृद्धावस्था पेंशन के 558 लाभार्थियों के खाते बदलकर 65 लाख 22 हजार रुपये गबन का मामला सामने आया था। जांच में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी शंकर लाल समेत छह अफसरों-कर्मियों को आरोपी माना गया था। जांच में कई ऐसे तथ्य मिले, जिससे पेंशन में घोटाले की पुष्टि हुई थी। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जांच में समाज कल्याण अधिकारी को दोषी पाए जाने पर रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। 

शासन ने रिपोर्ट के आधार पर घोटाले में दोषी समाज कल्याण अधिकारी शंकर लाल को जबरिया रिटायर कर दिया गया है। राज्यपाल की ओर से मार्च में पत्र भेजा गया था, जिसमें 15 जून को दोषी समाज कल्याण अधिकारी को सेवानिवृत कर दिए जाने का आदेश है। शासन की ओर से घोटाले की धनराशि रिकवरी के आदेश भी दिए हैं।

वहीं चकबंदी विभाग ने दो जिलों के चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। शासन द्वारा मीरजापुर और बांदा के चकबंदी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मैनपुरी में भी चकबंदी से जुड़े आधा दर्जन अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। बांदा और मीरजापुर के दोनों निलंबित चंकबंदी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। मैनपुरी के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच और कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। 

चकबंदी आयुक्त जीएस नवीन ने बताया कि बांदा में वित्तीय वर्ष 2023-24 में धारा-27 व 52 के तहत ग्राम उमरेंहडा का कार्य पूर्ण न करने, ग्राम बहिंगा में सहायक चकबन्दी अधिकारी स्तर पर सृजित चकों की त्रुटियों का निराकरण कर कार्य आगे बढ़ाने के बजाय ग्राम को सहायक चकबन्दी अधिकारी स्तर पर प्रत्यावर्तित करने के कारण चकबंदी अधिकारी राणा प्रताप को निलंबित कर दिया गया है। उन पर  सीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से न्यायालय न चलाने और ग्राम उमरेंहडा के गाटा संख्या-1331 का रकबा बन्दोबस्त से अधिक बढ़ाने जैसी अनियमितताओं के लिए निलम्बित किया गया है। उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं।

इसी तरह मीरजापुर में ग्राम नवैया की चक संख्या-950 आदि से मृतक शेषनरायन सिंह की वरासत मनमाने तौर पर बिना जांच चार बार पृथक-पृथक आदेश पारित कर पद का दुरुप्रयोग करने और वाद संख्या-174, धारा-12 में बिना दस्तावेज का सम्यक परीक्षण और जांच के नामान्तरण आदेश पारित करने के लिए चकबंदी अधिकारी राजेन्द्र राम को निलम्बित कर विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं।

मैनपुरी में एडीएम एफआर को कारण बताओ नोटिस
दूसरी ओर मैनपुरी में चकबंदी अधिकारी मोहम्मद साजिद, चकबंदी कर्ता काली चरण और रविकांत, चकबंदी लेखपाल अमित कुमार और अजय कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। इसके अलावा मैनपुरी के ही उप संचालक चकबंदी-एडीएम एफआर रामजी मिश्र को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। इन सभी के खिलाफ कार्य में लापरवाही का आरोप है।