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अयोध्या-काशी धाम की तरह नैमिषारण्य तीर्थ स्थल का भी होगा विकास, सीएम योगी ने की घोषणा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वह तीर्थ नैमिषारण्य को अयोध्या धाम, काशी धाम, महाकाल धाम, बद्रीनाथ, केदारनाथ की तरह विकसित करेंगे। इस दिशा में काम शुरू हो गया है।

अयोध्या-काशी धाम की तरह नैमिषारण्य तीर्थ स्थल का भी होगा विकास, सीएम योगी ने की घोषणा
Pawan Kumar Sharmaहिन्दुस्तान,सीतापुरWed, 21 Feb 2024 10:09 PM
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि नैमिषारण्य की महिमा अपरम्पार है। तीर्थ नैमिषारण्य को भी अब अयोध्या धाम, काशी धाम, महाकाल धाम, बद्रीनाथ, केदारनाथ की तरह नया रूप देंगे, इस दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि पांच सदी के बाद अयोध्या धाम के दीपोत्सव को नई पीढ़ी ने देखा है। आस्था को संबल मिला है। ये सभी धाम सनातन की विरासत हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन्हें नया स्वरूप देने का संकल्प  लिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को नैमिषारण्य के स्कंदाश्रम में जगन्माता राजराजेश्वरी मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने आए थे। साधु संतों और देश के विभिन्न भागों से आए महामंडलेश्वरों के साथ उन्होंने मंदिर में पूजा अर्चना की और परिक्रमा कर अनुष्ठान में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य का वर्णन अनेक धर्म ग्रंथों में है। राम चरित मानस में इसकी महिमा का गान है। भगवान वेदव्यास के सानिध्य में 88 हजार ऋषियों ने यहां साधना की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। शास्त्र कहता है कि धर्म से हीन व्यक्ति और पशु में कोई अंतर नहीं है। पंथ-सम्प्रदाय आते-जाते रहेंगे। पूजा-पद्धतियां बदलती रहेंगी लेकिन सनातन शाश्वत है। यही सृष्टि का धर्म है। सनातन मानवता का धर्म है। सनातन पर खतरा आएगा तो माननवता पर खतरा आएगा। मानवता को बचाना है तो सनातन को बचाना होगा। 

सीएम योगी ने कहा कि नैमिष तीर्थ को नया रूप देने के लिए अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चार साल पूर्व काशी की गलियों में लोग जाने से कतराते थे अब वहां नया रूप सामने आया है। अयोध्या में विरासत को नया रूप देने से वहां के लोगों के कारोबार व आमदनी में समग्र रूप से 30 गुना तक बढ़ोतरी हुई है। योगी ने कहा कि भगवान राम की मर्यादा का पालन करते हुए न्यायालय के फैसले के लिए भारतवासियों ने जिस संयम का परिचय दिया, वह दुनिया के लिए अनोखा उदाहरण है। दर्जनों पीढ़ियां, जिनके मन में अभिलाषा थी कि हम भी रामलला को विराजमान होता देखेंगे, अधूरी आशा के साथ वे साकेत धाम में चले गए। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है, जिसने रामलला को अयोध्या धाम में फिर से विराजमान होते देखा है। कार्यक्रम में श्री राजराजेश्वरी मंदिर के महंत स्वामी हीरापुर और मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी विचार रखे।

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