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14 सितम्बर, 2020|7:27|IST

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कानपुर अपहरण केस में सीएम योगी की कार्रवाई : आईपीएस डिप्टी एसपी सहित 11 पुलिसकर्मी सस्पेंड

cm yogi expresses satisfaction over daily testing of 48 thousand in up

कानुपर में लैब टेक्नीशियन संजीत यादव की हत्या कर लाश नहर में फेंक देने का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर नगर की एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता समेत 11 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस लापरवाही की जांच एडीजी बीपी जोगदंड को सौंपी है।

शुक्रवार को कानपुर पुलिस ने खुलासा किया था कि संजीत यादव की उसके दो दोस्तों ने ही फिरौती के लिए उसका अपहरण कर हत्या कर दी थी। हालांकि पुलिस ने शुक्रवार को अपहरण में शामिल एक महिला समेत पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। कानुपर पुलिस न केवल वक्त रहते हत्यारों को दबोचने में नाकाम रही बल्कि उसने हीलाहवाली करते हुए अपहरणकर्ताओं को फिरौती की 30 लाख रुपये की रकम भी दिलवा दी। दूसरी ओर सियासी दलों ने इस कांड को लेकर एक बार फिर प्रदेश की भाजपा सरकार पर ध्वस्त कानून-व्यवस्था का आरोप लगाते हुए जोरदार हमला किया है।

सुजीत हत्याकांड में कानपुर पुलिस ने खुलासा किया है कि बर्रा-5 इलाके से 22 जून को अगवा किए गए लैब टेक्नीशियन संजीत यादव की हत्या कर दी गई है। अपहर्ताओं ने संजीत की हत्या 27 जून की सुबह ही कर दी थी। यह खुलासा दबोचे गए पांच अपहर्ताओं ने पुलिस की पूछताछ में किया है। अपहर्ताओं में दो संजीत के करीबी दोस्त थे। पुलिस अब तक शव बरामद नहीं कर पाई है। 

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मुख्यमंत्री की कड़ी नाराजगी
पूरे मामले में पुलिस की नाकामी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त नाराज़गी जताई। उन्होंने लखनऊ में शुक्रवार सुबह ही मुख्य सचिव, डीजीपी व अपर मुख्य सचिव गृह को तलब किया और पूरे मामले की समीक्षा की। उन्होंने कानपुर की एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता व तत्कालीन सीओ मनोज गुप्ता सहित 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित होने वालों में मुख्य रूप से बर्रा थाने के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर रणजीत राय, चौकी इंचार्ज राजेश कुमार और सब इंस्पेक्टर योगेन्द्र प्रताप सिंह के अलावा कांस्टेबल अवधेश, दिशु भारती, विनोद कुमार, सौरभ पांडेय, मनीष व शिव प्रताप शामिल हैं। इन सब पर आरोप है कि इन्होंने अपहरण के बाद सख्ती से कार्रवाई नहीं की, न ही इलेक्ट्रानिक सर्विलांस कर अभियुक्तों का सटीक सुराग लगाया।

एडीजी बीपी जोगदंड करेंगे जांच
मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण में पुलिस लापरवाही को गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुलिस द्वारा फिरौती में तीस लाख रुपये दिलाए जाने व लापरवाही की जांच के लिए एडीजी पुलिस मुख्यालय बीपी जोगदंड को तत्काल कानपुर भेज दिया। वह जांच करेंगे कि फिरौती की कितनी रकम दी गई। रकम देने में किन पुलिस कर्मियों की भूमिका रही?आखिर फिरौती देने का फैसला क्यों किया गया?

 

पुलिस संजीत का शव बरामद नहीं कर सकी
अपहरण कांड को लेकर पुलिस की अच्छी खासी फजीहत हो रही थी। किसी तरह से पुलिस ने अपहर्ता तो दबोच लिए लेकिन संजीत को नहीं बचा पाई। शुक्रवार सुबह आईजी मोहित अग्रवाल और एसएसपी दिनेश कुमार पी ने मीडिया को बताया कि बर्रा-5 निवासी चमन सिंह यादव के बेटे संजीत का अपहरण 22 जून को उसके दो दोस्तों समेत पांच लोगों ने अस्पताल से निकलने के बाद कर लिया था। उसे संजीत के घर से महज एक किलोमीटर दूर रतनलाल नगर स्थित एक घर में बंधक रखा गया था। भागने की कोशिश में अपहर्ताओं ने संजीत को 27 जून की भोर में ही रस्सी से गला घोंटकर मार डाला था। शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे एक प्लास्टिक की बोरी में भरा और ले जाकर पांडु नदी में फेंक दिया। बेखौफ अपहर्ताओं ने हत्या के दो दिन बाद 29 जून को परिजनों को फोन कर 30 लाख की फिरौती मांगी।

मौज मस्ती के बहाने बुलाया
पुलिस ने दावा किया कि अपहरण के मास्टर माइंड ज्ञानेन्द्र यादव और कुलदीप गोस्वामी थे। ये दोनों संजीत के साथ नौबस्ता के एक अस्पताल में काम कर चुके थे। 22 जून को कुलदीप ने फोन कर संजीत को बुलाया। संजीत अपने अस्पताल से मिलने के लिए निकला, 500 मीटर आगे ही ज्ञानेन्द्र और कुलदीप मिल गए। सड़क किनारे एक पार्क के पास बाइक खड़ी कर वह ज्ञानेन्द्र की कार में बैठ गया। रास्ते में सभी ने शराब पी।

दवा देकर किया बेहोश
एसएसपी के मुताबिक, दोनों आरोपितों ने शराब में नशे की दवा देकर संजीत को बेहोश कर दिया और रतनलाल नगर स्थित कमरे में ले गए। वहां पर प्रीति शर्मा नाम की महिला पहले से मौजूद थी। यह कमरा भी अपहृत को रखने के लिए ही किराए पर लिया गया था।

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  • Web Title:CM Yogi action in Kanpur kidnapping sanjit gupta case IPS officer Dupty SP Aparna Gupta CO Manoj Gupta SO including 4 officers suspended