Chinmayanand case : Shahjahanpur court rejected chinmayanand and student bail plea - Chinmayanand case : चिन्मयानंद और छात्रा की जमानत अर्जियां नामंजूर DA Image
16 दिसंबर, 2019|2:36|IST

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Chinmayanand case : चिन्मयानंद और छात्रा की जमानत अर्जियां नामंजूर

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Chinmayanand case : गहमागहमी के माहौल में जिला जज की अदालत ने सोमवार को दुराचार के आरोपी चिन्मयानंद और रंगदारी मांगने की आरोपी छात्रा की जमानत अर्जियां नामंजूर कर दीं।

सोमवार सुबह से ही शाहजहांपुर कोर्ट कैंपस में गहमागहमी का माहौल था। क्राइम के मुकदमे के तमाम वकीलों ने अन्य केसों में तारीख ले ली थी। सबकी निगाहें हाईप्रोफाइल स्वामी चिन्यामंद और एलएलएम छात्रा की जमानत को लेकर होने वाली सुनवाई पर टिकी थीं। नए और पुराने वकील इन दोनों केसों में जमानत पर होने वाली बहस को सुनने के लिए उत्सुक दिखे। जिला जज रामबाबू शर्मा की अदालत में सोमवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे से रंगदारी मांगने की आरोपी छात्रा की जमानत के लिए उनके वकील अनूप त्रिवेदी ने अपना पक्ष रखा, बाद में जमानत रद्द करने के लिए शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा। 

दुराचार के आरोपी पूर्व गृहराज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद के वीडियो वायरल हुए थे। बहुतों ने देखे। ऐसे में उनकी जमानत कैसे हो पाएगी। ऐसी कौन सी दलील होगी, कौन से तर्क होंगे जो चिन्मयानंद को जेल से जमानत दिला सकते हैं। चिन्मयानंद की जमानत को लेकर बहुतों में उत्सुकता थी। इसीलिए उनकी जमानत पर हुई बहस को सुनने के लिए नए-पुराने वकीलों की भीड़ कोर्ट रूम में जमा थी। 

छात्रा के वकील बोले, सभी धाराएं जमानती 
छात्रा के वकील अनूप त्रिवेदी ने कहा कि सभी धाराएं जमानती हैं और 67 ए आईटी एक्ट में छात्रा का कोई लेना देना नहीं है, इसलिए जमानत दी जाए। वकील ने कहा कि छात्रा खुद पीड़िता है, इसलिए उसकी जमानत के लिए ध्यान रखा जाए। कहा कि छात्रा यानी मिस ए जमानत के बाद किसी तरह का साक्ष्य खंडन नहीं करेगी, कहीं भी पलायन नहीं करेगी, पहले से उस पर कोई केस भी नहीं है। अदालत के हर निर्देश का पालन करेगी। अपील की गई कि छात्रा को जमानत दी जाए। 

शासकीय अधिवक्ता ने किया विरोध 
शासकीय अधिवक्ता ने कॉल डिटेल का हवाला देकर बताया कि जब मैसेज भेजा गया, उस वक्त छात्रा और उसके साथी एक साथ थे। उन्होंने ऑन लाइन कैमरा मंगाने, उससे वीडियो बनाने और फिर रंगदारी की योजना बनाने की बात विस्तार से कही। उन्होंने इस पूरी बहस के दौरान कोर्ट को यह भी बताया कि राजस्थान में दौंसा में जिस गेस्ट हाउस में छात्रा और संजय रुके थे, वहां उन्होंने अपने आप को पति और पत्नी दर्ज कराया था। 

बेल पर बात करें ट्रायल की नहीं 
छात्रा के वकील ने कहा कि अभी तो बेल पर बात हो रही है। शासकीय अधिवक्ता तो टेक्नीकल ग्राउंड की बात कर रहे हैं। यह सब बातें तो ट्रायल के दौरान होती हैं। अभी फिलहाल हम बेल के लिए अपील करते हैं।

चिन्यामनंद के वकीलों ने किया विरोध 
चिन्मयानंद के वकील मनेंद्र सिंह चौहान ने बहस के दौरान छात्रा की जमानत न हो, इसके लिए बताया कि एक वीडियो और भी है, जिसमें कहा गया है कि 75 लाख रुपए और एक कार देने के लिए कह रहे थे, जो नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि रंगदारी की एफआईआर से आठ महीने पहले पूरी तैयारी की गई।

चिन्मयानंद की ओर से दूसरी वकील पूजा सिंह ने कहा कि छात्रा ही 67-ए एक्ट की पहली आरोपी है, क्योंकि उसने ही सबसे पहले वीडियो बनाए। इसलिए उसे जमानत न दी जाए। 67-ए एक्ट छात्रा पर लगी है, जो सही है। यह विवेचना और तमाम मजबूत साक्ष्यों के आधार पर लगाई है। 

चिन्मयानंद के वकील बोले, दुराचार नहीं किया 
इस दौरान चिन्मयानंद के वकील मनेंद्र सिंह चौहान ने पहले साजिश करने और फिर वीडियो बनाकर चिन्मयानंद को फंसाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि चिन्मयानंद ने दुराचार नहीं किया है, उन्होंने दावा किया कि किसी भी वीडियो में वह दुराचार नहीं करते देखे गए हैं। उन्होंने कहा कि चिन्मयानंद मसाज कराते हुए दिख रहे हैं, जिस वीडियो में वह दिख रहे हैं, वह वीडियो फेक है, क्योंकि लैब से उसकी रिपोर्ट ही नहीं आई है। उन्होंने कहा कि अगर चिन्मयानंद ने मसाज कराई भी है तो उन्होंने नैतिक अपराध किया है, वह गैर कानूनी नहीं है। 

शासकीय अधिवक्ता ने कहा- चिन्मयानंद ने ब्लैकमेल किया 
शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि लड़की ने कहा कि चिन्मयानंद ने नहाते वक्त वीडियो बनाया, उसे दिखाकर ही वह उसे ब्लैकमेल करते थे। पहले मालिश कराते थे, फिर वह दुराचार करते थे। मार्च 2019 तक उन्होंने ऐसा किया। जब वह थक गई, तब उसने ऑन लाइन चश्मा मंगाया और वीडियो बनाए। लड़की ने यह भी बताया कि एक भी वीडियो ऐसा नहीं है, जिसमें दुराचार किया गया हो, अंधेरा होने के कारण वैसा वीडियो संभव नहीं हो पाया। शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि चिन्मयानंद को जेल में ही रखा जाए। उन पर 2011 में भी दुराचार का मुकदमा दर्ज कराया गया था।

जिला जज रामबाबू सिंह का फैसला
जमानत प्रार्थना पत्र दोनों पक्षों के वकीलों ने अलग-अलग पक्षों ने प्रस्तुत किए, अपने अपने तथ्य प्रस्तुत किए। शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सिंह के तर्कों से सहमत होते हुए चिन्मयानंद और छात्रा की जमानत खारिज की जाती है।

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