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Hindi News उत्तर प्रदेशनगीना में बसपा को खा गए चंद्रशेखर आजाद, मायावती के कैंडिडेट की जमानत तक नहीं बची

नगीना में बसपा को खा गए चंद्रशेखर आजाद, मायावती के कैंडिडेट की जमानत तक नहीं बची

उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन ने 80 में से 79 सीटों पर कब्जा किया है। इन दोनों गठबंधनों को हराकर नगीना लोकसभा सीट जिस शख्स ने जीती है, उसका नाम चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण है।

नगीना में बसपा को खा गए चंद्रशेखर आजाद, मायावती के कैंडिडेट की जमानत तक नहीं बची
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊWed, 05 Jun 2024 11:11 PM
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यूपी के लोकसभा चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन ने 80 में से 79 सीटों पर कब्जा किया है। इन दोनों गठबंधनों को हराकर नगीना लोकसभा सीट जिस शख्स ने जीती है, उसका नाम चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण है। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने अपनी राजनीतिक पार्टी आजाद समाज पार्टी बनाई और पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर बाजी मार ली है। चंद्रशेखर ने नगीना सीट पर न सिर्फ समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को हराया बल्कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी की जमानत तक जब्त करा दी है। जबकि नगीना सीट पर पिछली बार बसपा ने ही कब्जा कर लिया था। मंगलवार को मायावती ने अपनी पार्टी की हार की समीक्षा की तो उसमें नगीना और चंद्रशेखर पर भी बातें हुईं। कहा जा रहा है कि चंद्रशेखऱ को लेकर मायावती की चिंता अब बहुत बढ़ गई है। माना जा रहा है कि चंद्रशेखर युवा दलितों में आईकन की तरह उभरे हैं।

नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद ने 5 लाख 12 हजार 552 वोट हासिल कर 3 लाख 61 हजार 79 वोट पाने वाले भाजपा के ओम कुमार को 1 लाख 51 हजार 473 वोटों से हरा दिया। यहां सपा प्रत्याशी मनोज कुमार को 1 लाख 2 हजार 374 वोट ही हासिल कर सके। सबसे खराब हालत बसपा की हो गई। बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र पाल सिंह केवल 13 हजार 272 वोट हासिल कर सके। बसपा की ऐसी हालत यूपी में पिछले कुछ दो तीन दशक में किसी विधानसभा सीट पर भी शायद ही हुई हो। 

चंद्रशेखर आजाद का अपने दम पर चुनाव जीतना यूपी में दलित राजनीति की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। बसपा अभी तक दलित समाज के वोट बैंक पर अधिकार जताती रही है, लेकिन चंद्रशेखर की जीत ने यूपी में इस वोट बैंक को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

यूपी में दलित राजनीति की धुरी बसपा के आसपास ही मानी जाती रही है। कांशीराम के बाद मायावती ने पार्टी की कमान संभाली। वह लोकसभा का पहला चुनाव पश्चिमी यूपी के बिजनौर सीट से वर्ष 1989 में जीती। हारनपुर की एक सीट ने 1996 में मायावती को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया था। इसके बाद धीरे-धीरे मायावती का राजनीतिक ग्राफ पश्चिमी यूपी में बढ़ता गया। वह चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने मात्र 19 सीटें हासिल की थीं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा का प्रदर्शन 2007 के मुकाबले काफी खराब रहा।

उसी पश्चिमी यूपी से अब चंद्रशेखर आजाद का उदय हुआ है। जब सपा की लहर और भाजपा के दबदबे के बाद भी चंद्रशेखर ने जीत हासिल कर ली है। कहा जा रहा है कि मंगलवार को ही मायावती ने अपने नेताओं के साथ चुनाव पर मंथन किया तो नगीना सीट और चंद्रशेखर पर खास चर्चा हुई। पिछली बार नगीना सीट बसपा ने ही जीती थी। मायावती ने चंद्रशेखर की जीत और बसपा के परायजय के कारणों के बारे में भी जानकारी मांगी है।