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फिटनेस कराने गए तो पता चला तीन बार चालान हो चुकी है कार, जानिए चुपके से किसने लगा दिया जुर्माना

अजय श्रीवास्‍तव ,गोरखपुर Published By: Ajay Singh
Fri, 18 Jun 2021 03:04 PM
फिटनेस कराने गए तो पता चला तीन बार चालान हो चुकी है कार, जानिए चुपके से किसने लगा दिया जुर्माना

गोरखपुर के बशारतपुर मोहल्ले में रहने वाले राजीव श्रीवास्तव ने दो साल पहले ऑटो खरीदा था। पिछले दिनों वह फिटनेस और टैक्स जमा करने पहुंचे तो पता चला कि ऑटो का तीन बार चालान हो चुका है। उन्हें टैक्स जमा करने से पहले 4500 रुपये जुर्माना भरना होगा। वे मोबाइल पर सूचना नहीं आने की दलील देते रहे लेकिन उन्हें आरटीओ में जुर्माना भरने के बाद ही टैक्स जमा करने की अनुमति मिली।

इस तरह का दर्द सिर्फ राजीव का ही नहीं है। छोटे काजीपुर निवासी मनीष कुमार की बाइक 15 साल पुरानी है। वह बीते दिनों बाइक का रिन्युअल कराने पहुंचे तो पता चला तीन-तीन बार चालान हो चुका है। मनीष ने बताया कि मोबाइल पर कोई मैसेज नहीं आया। 9 हजार जुर्माना भरने की बजाए उन्होंने घर में ही बाइक खड़ी कर दी है। ऑनलाइन चालान होने के चलते ट्रैफिक और आरटीओ के जिम्मेदार मोबाइल से फोटो खींच कर चालान कर दे रहे हैं। लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के मोबाइल पर मैसेज ही नहीं मिल रहा है।

 

पिछले वर्ष लॉकडाउन में जितना चालान हुआ था, उसका 40 फीसदी भी राजस्व में जमा नहीं हुआ। गोरखपुर में ट्रैफिक पुलिस आरटीओ के अधिकारियों द्वारा हर महीने औसमत 9 से 10 हजार गाड़ियों का चालान होता है। ट्रैफिक विभाग ने मई में 9414 वाहनों का चालान किया। इसमें से 177 वाहन सीज करते हुए 5 लाख जुर्माना लगाया गया। वहीं अप्रैल महीने में 9744 वाहनों का चालान कर 9.35 लाख का जुर्माना ठोका गया।

 

ट्रैफिक विभाग के जिम्मेदार बताते हैं कि ऑनलाइन चालान के बाद खजाने में पूरी रकम नहीं जमा हो रही है। शहर के आठ चौराहों पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगा तो है लेकिन ऑनलाइन चालान नहीं हो रहा है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ के अधिकारी ही चौराहों व सड़कों पर कानून तोड़ने वालों का चालान करते हैं।

 

आरटीओ आने के बाद पता चला गाड़ी का हुआ है चालान

आमतौर पर वाहनों का चालान होते ही वाहन स्वामी के मोबाइल नंबर पर सूचना जाती है। आरटीओ में हर महीने 200 से अधिक ऐसे चालान का मामला पहुंचता है, जिनमें गाड़ी मालिक को पता ही नहीं चलता। जब वे गाड़ियों का फिटनेस, बीमा, ट्रांसफर आदि कराने के लिए आरटीओ या एजेंट के पास जाते हैं तो पता चलता है कि दो से तीन बार गाड़ी का चालान हो चुका है। ऑटो एसोसिएशन के जीके द्विवेदी बताते हैं कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों को मिलाकर 20 हजार से अधिक आटो हैं। हर महीने 150 ऐसे मामले आते हैं, जिनमें मालिक को चालान के बारे में जानकारी नहीं है।

 

मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होने से दिक्कत

आरटीओ में 11 लाख से अधिक गाड़ियां पंजीकृत हैं। इनमें से बमुश्किल 20 फीसदी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ मोबाइल नंबर अपडेट हैं। आरटीओ में अधिवक्ता रणविजय सिंह बताते हैं कि तमाम ऐसे वाहन स्वामी होते हैं जो गाड़ी खरीदते समय मोबाइल नंबर पंजीकृत कराते हैं, उसे चंद महीनों बाद बदल देते हैं। ऐसे मामलों में ही दिक्कत अधिक है। ऑटो एसोसिएशन के जीके द्विवेदी कहते हैं कि आरटीओ के जिम्मेदारों से लगातार मांग करते हैं कि वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ नये सिरे से मोबाइल नंबर को अपडेट किया जाए। ताकि चालान होते ही वाहन स्वामी को इसकी सूचना पहुंचे।

 

बोले एआरटीओ प्रशासन

ऐसे चार से पांच मामले रोज आते हैं। मोबाइल नंबर बदले जाने से अधिक दिक्कत है। 2013 से पहले पंजीकृत वाहनों में अधिक दिक्कत है। हालांकि कुछ वाहन स्वामी जानबूझ कर चालान की अनदेखी भी करते हैं।

श्यामलाल, एआरटीओ प्रशासन

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