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16 जुलाई, 2020|5:46|IST

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गुनाहगारों की फांसी के बाद निर्भया के गांव में एक साथ होली-दिवाली, परिजनों ने ग्रामीणों संग गाया फाग

celebration in nirbhaya village after convicts hanged in tihar jail

सात साल से भी अधिक वक्त के इंतजार के बाद अंततः निर्भया के गुनहगारों को शुक्रवार की सुबह फांसी हो गयी। इस लम्हे का इंतजार कर रहे निर्भया के गांव में मौजूद उसके परिजनों के लिए यह मौका बेहद खास था। अपनी बिटिया को न्याय मिला तो एक-दूसरे को मिठाई ख़िलाने का दौर शुरु हो गया। सात साल बाद निर्भया के परिवार वालों ने आसपास के लोगों के साथ अबीर-गुलाल उड़ाकर होली मनाई। ढोलक व मजीरे की थाप पर निर्भया के दादा व चाचा थिरकने लगे। सबने मिलकर होली गीत भी गाए।

16 दिसम्बर 2012 की रात की मनहूस रात में निर्भया के साथ दरिंदगी के बाद यह पहला अवसर था, जब उसके परिजनों के चेहरे पर खुशी के रंग दिखे। मौत से 13 दिनों तक चली लड़ाई के बाद 29 दिसम्बर को निर्भया के हार जाने के बाद सात साल तक दरिंदों का जीवित रहना पूरे परिवार को सालता रहा। घर में तीज-त्योहार रस्मी तौर पर ही मनाए जाते रहे। 

बीती होली निर्भया के परिजनों के लिए बेरंग ही रही। निर्भया के गुनहगारों की फांसी न्यायिक उलझनों में फंसकर लगातार टलती रही। इससे परिजनों के घाव हरे होते रहे। शायद यही कारण था कि पैतृक गांव ने होली नहीं मनाने का निर्णय लिया था। 

निर्भया के चाचा ने कहा कि हमने इस बार होली नहीं मनाई थी। आज हमसब खुश हैं। जिसका इजहार हमने फाग गीत गाकर किया। उन्होंने अपने चाचा यानी निर्भया के दादा व अन्य परिवारीजनों के साथ घर के सामने ढोलक व मजीरे लेकर गाना शुरू कर दिया। 'मिल गइल निर्भया के न्याय ...' गाकर अपनी खुशी बयां की। इसमें लोगों ने उनका साथ दिया। निर्भया के दादा खासा खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि सात सालों तक हमारे सारे त्योहार फीके रहे। अब हमारी बिटिया को न्याय मिला है तो हम खुश हैं।

फांसी की खबर आते ही निर्भया के परिजनों के छलके आंसू

निर्भया के गुनहगारों को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाए जाने की पल-पल की खबर पर पैतृक गांव में परिजनों के साथ ही ग्रामीणों की नजर थी। फांसी पर लटकाए जाने की खबर टीवी पर देखते ही गांव में मौजूद निर्भया के दादा-दादी व चाचा-चाची की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। 

निर्भया के गांव में उसके चाचा व उनकी पत्नी तथा दादा-दादी हैं। परिवार के बाकी सदस्य बाहर हैं। गांव वाले घर में रात को टीवी देखते हुए सो गए। शुक्रवार को चार बजे ही जगकर फिर से टीवी के सामने बैठ गए। जैसे-जैसे बहादुर बेटी के गुनहगारों को फांसी देने का समय नजदीक आ रहा था, सभी की निगाहें टीवी पर केंद्रित होते गईं। गांव के अन्य लोग भी अपने टीवी सेटों से भोर से ही चिपक गए। बबलू पांडेय के घर भी सभी लोग टीवी देख रहे थे। जैसे ही यह जानकारी मिली कि चारों गुनहगारों मुकेश, पवन, विनय व अक्षय को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया है, निर्भया के पैतृक घर में मौजूद सभी ने एक-दूसरे को देखा। सबकी आंखों में आंसू छलक पड़े।

निर्भया के चाचा ने बताया कि हमें इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। आखिरकार न्याय हुआ। इसीलिए कहा जाता है कि भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। बोले, निर्भया को हम बचा तो नहीं सके लेकिन अब कोई निर्भया जैसी दरिंदगी न झेले, इस फांसी का यही संदेश जाना चाहिए। हमें लगता है कि इससे यही सबक निकलेगा। 

गांव में मीडिया का जमावड़ा

निर्भया का पैतृक गांव जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर है। उसके चारों गुनहगारों को फांसी दिए जाने के समय भोर में ही दर्जन भर मीडियाकर्मियों का जमावड़ा हो गया था। जैसे ही फांसी दी गयी, निर्भया के परिजनों से बाइट लेने की होड़ शुरू हो गयी। निर्भया के दादा व चाचा लगातार मीडिया से बातचीत करते रहे। इस दौरान उनके चेहरे का हाव स्पष्ट बयां कर रहा था कि दरिंदों को फांसी ने उन्हें कितनी बड़ी राहत दी है।

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  • Web Title:Celebration In Nirbhaya Village In Ballia Uttar Pradesh After All Convicts Hanged In Tihar Jail