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सीबीआई ने अपने ही अफसरों पर कसा शिकंजा, नोएडा समेत कई जिलों में छापेमारी

सीबीआई ने बैंक के साथ धोखाधड़ी करने की आरोपी कंपनियों की मदद करने के आरोप में अपने डीएसपी समेत कई अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक पद के दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए हैं। सीबीआई ने गुरुवार...

सीबीआई ने अपने ही अफसरों पर कसा शिकंजा, नोएडा समेत कई जिलों में छापेमारी
नई दिल्ली लखनऊ हिटीThu, 14 Jan 2021 09:27 PM
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सीबीआई ने बैंक के साथ धोखाधड़ी करने की आरोपी कंपनियों की मदद करने के आरोप में अपने डीएसपी समेत कई अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक पद के दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए हैं। सीबीआई ने गुरुवार सुबह तलाशी अभियान चलाया और इस सिलसिले में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव, मेरठ और कानपुर में छापे मारे। दूसरी ओर सीबीआई ने एसटी जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर नौकरी पाने के मामले में भी मथुरा व हाथरस में पड़ताल की। 

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई अकादमी में तैनात डिप्टी एसपी के कौशांबी स्थित आवास पर गुरुवार सुबह सीबीआई टीम ने छापा मारा। टीम ने कई घंटे तक दस्तावेज खंगाले। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक कौशांबी में शिवालिक टावर में रहने वाले आरके ऋषि हापुड़ रोड स्थित सीबीआई अकादमी में डिप्टी एसपी के पद पर तैनात हैं। गुरुवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे सीबीआई के 10 से ज्यादा अधिकारियों ने शिवालिक टावर में आरके ऋषि के आवास पर छापा मारा। मामले की जांच में आरके ऋषि का नाम सामने आने के बाद उनके यहां जांच की गई है। 

पड़ताल में सामने आया है कि अधिकारी बैंकों से धोखाधड़ी करने की आरोपी उन कंपनियों से कथित रूप से रिश्वत ले रहे थे। इनके खिलाफ सीबीआई जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ अधिकारी आरोपी कंपनियों से कथित रूप से नियमित भुगतान ले रहे थे।

करोड़ों के फर्जीवाड़े में सीबीआई का छापा
दूसरी ओर मेघालय की राजधानी शिलांग में फर्जी फर्म बना कर करोड़ों की जालसाजी के मामले मे गुरुवार को सीबीआई की एंटी करेप्शन ब्यूरो शिलांग की टीम ने अनपरा में छापा मारा। बजरंग नगर निवासी रंजीत गुप्ता पुत्र अशोक कुमार गुप्ता को हिरासत में ले थाने लाकर गहन पूछताछ की गई।

कई घंटे की पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर सीबीआई इंस्पेक्टर शिवकुमार सिंह ने न्यायालय में पेश किया। मेघालय की अदालत से जारी गैरजमानती वारंट के आधार पर उसे कस्टडी में लेकर टीम वापस लौट गई है। सीबीआई सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मामला मेघालय में हुए करोड़ों के निर्माण कार्य के फर्जीवाड़े से जुड़ा है। जांच में उजागर हुआ है कि कार्य हुआ ही नहीं और धन की बंदर बांट ली गई।

कागजों में हुए इस कार्य में बिल आदि पर जीएसटी नम्बर की जांच में पाया गया कि तमाम प्रपत्र रंजीत गुप्ता के लगाए गए हैं। इस संदर्भ में वहां की अदालत ने आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट पहले ही जारी कर दिया था। पूछताछ में रंजीत गुप्ता ने बताया कि उससे महज बिल लिए गए थे, जिसके लिए कुछ रकम दी गई। पूरा धन बाकी साजिशकर्ता डकार गए।