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Hindi News उत्तर प्रदेशकेजीएमयू में भर्ती नहीं करने पर कैंसर पीड़िता की तड़पकर मौत, परिजनों का हंगामा, डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

केजीएमयू में भर्ती नहीं करने पर कैंसर पीड़िता की तड़पकर मौत, परिजनों का हंगामा, डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

केजीएमयू के रैन बसेरे में रविवार को कैंसर पीड़ित महिला की तड़पकर मौत हो गई। आरोप हैं कि मरीज को डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। इलाज के अभाव में मरीज की सांसें थम गईं।

केजीएमयू में भर्ती नहीं करने पर कैंसर पीड़िता की तड़पकर मौत, परिजनों का हंगामा, डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप
Dinesh Rathourवरिष्ठ संवाददाता,लखनऊSun, 21 Apr 2024 10:30 PM
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केजीएमयू के रैन बसेरे में रविवार को कैंसर पीड़ित महिला की तड़पकर मौत हो गई। आरोप हैं कि मरीज को डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। इलाज के अभाव में मरीज की सांसें थम गईं। भड़के परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो कर्मचारियों ने समझाबुझाकर किसी तरह शांत कराया। सीतापुर निवासी शांति कैंसर पीड़ित थीं। मरीज का इलाज ओपीडी के माध्यम से चल रहा था। शनिवार दोपहर बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई थी। परिजनों ने उन्हें भर्ती कराने के लिए प्रयास किए। मगर डॉक्टरों ने इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया। नतीजतन परिजन मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर के रैन बसेरे में ठहर गए।

रविवार को मरीज की हालत और भी गंभीर हो गई। परिवारीजनों का आरोप है कि मरीज को भर्ती कराने के लिए ट्रॉमा सेंटर गए तो डॉक्टरों ने कैंसर मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करने का इंतजाम नहीं होने की दलील दी। परिवारीजनों ने डॉक्टरों के सामने कई बार मरीज की तबीयत नाजुक होने का हवाला दिया। इसके बावजूद डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा।

दोपहर में थमीं सांसे तो भड़क गए परिजन

इलाज के अभाव में मरीज की हालत गंभीर हो गई। दोपहर में मरीज की मौत हो गई। नाराज परिवारीजनों ने ट्रॉमा सेंटर में हंगामा किया। परिवारीजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने के बावजूद मरीज को भर्ती नहीं किया। समय पर समुचित इलाज न मिलने से मरीज की सांसें थम गईं। कर्मचारियों ने किसी तरह समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।

केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया, मरीज की हालत गंभीर थी। ट्रॉमा सेंटर में न तो रोगी का पर्चा बना था और न ही कोई जांच आदि हुई थी। रोगी ट्रॉमा में बने रैन बसेरे में रह रही थी। कैंसर की वजह से मरीज की मृत्यु हुई है। केजीएमयू प्रशासन दुखी परिवारीजनों के साथ है। मरीज का यथासंभव इलाज किया गया।

बिना इलाज मरीज की मौत की प्रमुख घटनाएं

15 अक्तूबर 2023 : राजाजीपुरम के बख्तामऊ निवासी फाजिल की पत्नी शमीम बानो को 10 अक्तूबर को लोकबंधु अस्पताल में प्रसव हुआ। कुछ देर बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी। डॉक्टरों ने मासूम को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। यहां पीड़ियाट्रिक विभाग में वेंटिलेटर नहीं मिला। नतीजतन बच्ची की मौत हो गई।
30 दिसंबर 2023 : इंदिरानगर निवासी मनभावती (40) किडनी रोग से पीड़ित थीं। गंभीर अवस्था में परिवारीजन उन्हें ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताई। डॉक्टरों ने वेंटिलेटर खाली न होने की बात कही। वेंटिलेटर न मिलने से मरीज की मौत हो गई।
9 अप्रैल 2022 : सिद्धार्थनगर निवासी रीमा को टीबी और रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर था। परिवारीजन मरीज को लेकर ट्रॉमा पहुंचे। यहां तीन घंटे तक इलाज न मिला। एम्बुलेंस में मरीज की सांसें थम गईं। 
14 जून 2021 : कन्नौज निवासी लक्ष्मी देवी (45) एनीमिया से पीड़ित थी। केजीएमयू ओपीडी से मरीज को ट्रॉमा सेंटर भेजा गया था। यहां बेड खाली न होने की बात कहकर मरीज को लौटा दिया गया थी। इलाज के अभाव में मरीज की मौत हो गई थी।
23 अप्रैल 2021 :  लखनऊ के 61 वर्षीय निर्मल की तबीयत काफी खराब हो गई थी। परिवारीजन मरीज को निजी मेडिकल कॉलेज ले गए। जहां मरीज को भर्ती नहीं किया गया। मरीज की एम्बुलेंस में सांसे थम गई थीं।