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बुंदेलखंड महोत्‍सव विस्‍फोट: चार मौतों का जिम्‍मेदार कौन? लोहे की ऊंची जाली पार कर अंदर कैसे पहुंचे किशोर 

चित्रकूट के CIC मैदान में बुंदेलखंड गौरव महोत्सव के लिए लगी आतिशबाजी में हुए विस्फोट से चार किशोरों की जान महज लापरवाही में चली गई। आतिशबाजी के लिए अत्यधिक क्षमता के वाले पटाखे लगाए गए थे।

बुंदेलखंड महोत्‍सव विस्‍फोट: चार मौतों का जिम्‍मेदार कौन? लोहे की ऊंची जाली पार कर अंदर कैसे पहुंचे किशोर 
Ajay Singhहिन्‍दुस्‍तान,चित्रकूटThu, 15 Feb 2024 07:42 AM
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Bundelkhand Gaurav Mahotsav blast:चित्रकूट के सीआईसी मैदान में बुंदेलखंड गौरव महोत्सव के लिए लगी आतिशबाजी में हुए विस्फोट से चार किशोरों की जान महज लापरवाही में चली गई। आतिशबाजी के लिए अत्यधिक क्षमता के वाले पटाखे लगाए गए थे। कोई वहां तक पहुंच न पाए, इसके लिए चारों तरफ करीब चार फीट ऊंची लोहे की जाली आयोजकों ने सुरक्षा के तौर पर लगाई थी। फिर भी चारों किशोर साइकिलें लेकर अंदर पहुंच गए। माना जा रहा है कि अंदर की तरफ आवागमन के लिए लगा गेट खुला था, किशोर पहुंचे और आतिशबाजी से कुछ छेडखानी हुई, जिससे हादसा हो गया।

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मुख्यालय के कर्वीमाफी में रहने वाले केशराज शर्मा का 13 वर्षीय बेटा पारस, विश्व प्रधान मिश्र का 11 वर्षीय पुत्र यश, धर्मेन्द्र सिंह का 11 वर्षीय बेटा प्रभात व विद्यानगर कर्वी माफी के मुकेश का पुत्र मोहित(15) आपस में दोस्त थे। यह सभी बुधवार दोपहर साइकिल लेकर घर से सीआईसी पहुंच गए। सीआईसी में बुंदेलखंड गौरव महोत्सव की लगी आतिशबाजी के विस्फोट में इन चारो की जानें चली गई। इधर शाम को जब चारों घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। परिजन जिला अस्पताल पहुंच गए। वहां प्रशासन के पास मौजूद फोटो के जरिए शिनाख्त की। शिनाख्त के साथ ही परिजनों में कोहराम मच गया। खास बात यह है कि सीआईसी परिसर में जिस तरफ आतिशबाजी लगाई गई थी, उधर चारों तरफ से लोहे की जाली लगाई गई थी, कोई भी अंदर प्रवेश न कर सके। आतिशबाजी टीम के सदस्य भी आसपास जरूर रहे होंगे, फिर भी चारो किशोर साइकिल समेत अंदर की तरफ चले गए। जानकारों की मानें तो आतिशबाजी के साथ कुछ छेड़खानी जैसी हरकत होने पर ही विस्फोट हुआ और चारों किशोर चपेट में आए।

पिता की इकलौती संतान था यश
यश मिश्र इकलौती संतान थी। उसके पिता विश्व प्रधान मिश्र ग्राम पंचायत सचिव हैं। यश कक्षा छह में पढ़ता था। पारस भी कक्षा छह का ही छात्र था। मृतक प्रभात सिंह कक्षा छह का छात्र था। उसके पिता धर्मेन्द्र मूलरुप से बछरन गांव के रहने वाले है। वह कर्वीमाफी में किराए का मकान लेकर रह रहे थे। प्रभात दो भाइयों में बड़ा था। इसी तरह मृतक मोहित तीन भाइयों में सबसे बड़ा था।

यश और पारस के परिजन प्रयागराज रवाना
विस्फोट में मोहित व प्रभात की मौत जिला अस्पताल में होने पर दोनों शव यहीं मर्चरी में रखवा दिए गए थे। जबकि यश व पारस ने प्रयागराज ले जाते समय दम तोड़ा था। इन दोनों के शव का पोस्टमार्टम प्रयागराज में होना है। शिनाख्त के बाद शाम को ही यश व पारस के परिजन प्रयागराज रवाना हो गए है। एक साथ चारो दोस्तों की मौत होने के बाद जिला अस्पताल में लोगों की देर रात तक भीड़ जुटी रही।

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