bundelkhand 19 seat result: बुंदेलखंड में 16 सीटों पर खिला कमल का फूल, तीन पर साइकिल दौड़ी
बुंदेलखंड में भाजपा की लहर इस बार भी बरकरार रही। भाजपा गठबंधन ने 19 में से 16 सीटों पर जीत हासिल की है। इनमें से 14 सीटें भाजपा और दो सीटें गठबंधन साथी अपना दल (एस) ने जीती हैं। हालांकि इस बार सपा ने...

बुंदेलखंड में भाजपा की लहर इस बार भी बरकरार रही। भाजपा गठबंधन ने 19 में से 16 सीटों पर जीत हासिल की है। इनमें से 14 सीटें भाजपा और दो सीटें गठबंधन साथी अपना दल (एस) ने जीती हैं। हालांकि इस बार सपा ने उससे तीन सीटें छीन ली हैं। इनमें चित्रकूट की सदर और बांदा की बबेरू सीट शामिल है। कालपी सीट पर देर रात तक सपा के प्रत्याशी की बढ़त है पर परिणाम जारी नहीं हुआ है।
अन्ना पशु, जल-संकट, बेरोजगारी, पलायन जैसे मुद्दों पर बुंदेलखंड में चुनाव लड़ा गया। सपा ने इन मुद्दों पर भाजपा को खूब घेरा लेकिन बुंदेलखंड की जनता ने भाजपा को ही चुना। यहां प्रचार के दौरान भाजपा ने जल परियोजनाओं, डिफेंस कारीडोर और अन्य योजनाओं को प्रचार का आधार बनाया था। इसी का असर रहा कि झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा जिलों की सभी 10 सीटें भाजपा गठबंधन ने जीत लीं।
बांदा में बबेरू सपा ने जीती, बाकी तीन सीटें भाजपा को मिलीं। चित्रकूट की सदर सीट पर लोनिवि राज्य मंत्री सीपी उपाध्याय सपा के अनिल प्रधान पटेल से हार गए हैं। गठनबंधन साथी अपना दल (एस) ने क्रमश: झांसी की मऊरानीपुर और चित्रकूट की मानिकपुर सीट जीत ली। कालपी सीट पर देर रात तक पेंच फंसा है। जहां भाजपा गठबंधन ंसे निषाद पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह मैदान में हैं। उनका कड़ा मुकाबला सपा के विनोद चतुर्वेदी से हुआ।
दलबदलू विधायक हार गए
ऐन चुनाव से पहले भाजपा छोड़ सपा में गए तिंदवारी के बृजेश प्रजापति चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के रामकेश निषाद ने हराया।
दो मंत्रियों में एक जीते, एक हारे
बुंदेलखंड से भाजपा सरकार में दो राज्यमंत्री थे। इनमें से चित्रकूट से सीपी उपाध्याय सपा से हार गए जबकि ललितपुर की मेहरौनी सीट से लड़े श्रम राज्यमंत्री मनोहीरलाल पंथ 1.10 लाख वोटों से जीत गए हैं।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


