DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जानिए उस शख्स के बारे में जिसने गायों की सेवा के लिए छोड़ दिया घर-परिवार

cattle

यह खबर खास उनके लिए है, जो गौरक्षा के नाम पर उन्मादी हैं। और उनके लिए भी जो गोकशी से नहीं चूकते। यह संदेश है एक युवा का उस फसाद के खिलाफ जिसने बुलंदशहर में दो की जान ले ली। हर रोज सुबह उठकर गायों की सेवा करना, उनका चारा देना और बीमार हो तो पूरीदेखभाल करने वाले इस शख्स का नाम है मोहम्मद जाहिद हुसैन। ऐसा युवा, जिसने रूह में गंगा-जमुनी तहजीब को हर सांस के साथ जीते रहने का जज्बा पाल रखा है। 

चौबारी स्थित गौशाला में बीते एक साल से मोहम्मद जाहिद हुसैन दिन-रात गायों की सेवा में मनोयोग से जुटे रहते हैं। उनका जज्बा किसी भी गौरक्षा प्रेमी से कमतर नहीं। इसके लिए उसे घर तक छोड़ना पड़ गया और अपने ही लोगों ने रार ठान ली। भोजीपुरा के गांव घंघोरा पिपलिया के रहने वाले मोहम्मद जाहिद हुसैन एमबी इंटर कालेज से 10 वीं तक पढ़े हैं। कई साल पहले उनकी भैंस को दबंगों ने जलाकर मार डाला था। वह घटना जाहिद को अंदर तक झकझोर गई। उसी समय पीएफए के कार्यकर्ता धीरज से जाहिद का परिचय हुआ।

एक जैसे विचार और पशु प्रेम ने इन दो युवाओं को एक राह पर ला दिया। फिर क्या था, पीएफए के साथ जाहिद का संबंध जुड़ता गया और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की चौबारी की गौशाला में आ गए। गायों की सेवा शुरू कर दी। बात गांव पहुंची तो मजहबी लंबरदार नाराज हो गए, अपनों ने ही उनसे राबता रखना बंद कर दिया। घरवालों ने बिरादरी का कठोर विरोध देखा तो समझाने की कोशिश की लेकिन जाहिद तब तक अपने गाय प्रेम के प्रति समर्पण के अंकुर को पौध बनाने की ठान चुके थे। जब विरोध बढ़ा तो घर-गांव छोड़ दिया और गौशाला को ही नया पता बना लिया। अब धीरज के साथ गायों की सेवा करते हैं।

बुलंदशहर हिंसा: 4 दिन, 200 दबिशें, 100 पुलिसकर्मी और गिरफ्तारी सिर्फ 4

मजहबी कट्टरता छू तक नहीं पाई
जाहिद हुसैन कहते हैं, भगवान और खुदा में कोई फासला रखना ही गलत है। कोई मजहबी कट्टरता नहीं सिखाता, उन्माद में फसादी नहीं बनाता। बीते एक साल में जाहिद ने संस्कृत भी काफी सीख ली है और गायत्री मंत्र, गणेश वंदना तक पढ़ लेते हैं। पत्तल में खाना खाते हैं और गौशाला में ही वक्त गुजारते हैं।

धीरज से हुई दोस्ती बनी सहारा
घर छोड़ने के बाद जाहिद की युवा धीरज से दोस्ती का रंग भी और चटख होता गया। जाहिद कहते हैं, पशु तस्कर जान के दुश्मन बन गए थे और अपने लोगों ने विरोध का झंडा ही थाम लिया था। ऐसे में धीरज ने सहारा दिया, हर संभव मदद की। गौसेवा का सुख मिला और दोस्ती की तासीर महसूस की। गांव कभी जाना होता भी है तो चोरी-छिपे जाते हैं।

इंस्पेक्टर की पत्नी ने योगी से कहा- मेरे पति को आते थे धमकी भरे कॉल्स

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Bulandshahr Violence know about the man who drop his home and family for cow service