बसपा छोटी-छोटी बैठकें कर सरकार की नीतियों की पोल खोलेगी: मायावती
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे छोटी-छोटी बैठकें कर केंद्र व राज्य सरकार की गलत न जनविरोधी नीतियों की पोल खोलें। साथ ही पार्टी कमेटियों के कामों की समीक्षा कर...

बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे छोटी-छोटी बैठकें कर केंद्र व राज्य सरकार की गलत न जनविरोधी नीतियों की पोल खोलें। साथ ही पार्टी कमेटियों के कामों की समीक्षा कर प्रदेश भर में सदस्यता अभियान चलाया जाए।
बसपा सुप्रीमो ने पांच फरवरी से यूपी में पार्टी संगठन की जमीनी गतिविधियों, कैडर बैठकों व चुनावी तैयारी के संबंध में मंडल व जिलावार बैठकें कर संगठन गतिविधियों की समीक्षा की। उनके समक्ष प्रदेश के 18 मंडलों व 75 जिलों ने अपनी कमेटी की गतिविधियों के संबंध में विस्तार से रिपोर्ट पेश की। लगभग एक माह से अधिक समय तक चली इन समीक्षा बैठकों में कांशीराम की 15 मार्च को होने वाली जयंती को मंडलों में मनाने का निर्देश दिया।
लखनऊ, कानपुर व फैजाबाद मंडल के लोग लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल और मेरठ मंडल के लोग नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल में पहुंचकर श्रद्धा समुन अर्पित करेंगे। इसमें कोरोना प्रोटोकाल का पालन किया जाएगा। भाजपा आजादी के बाद लगभग 70 वर्षों तक लगभग लुप्तप्रायः रही। उसकी साम्प्रदायिकता व घिनौनी जनविरोधी व जातिवादी नीतियां, कांग्रेस पार्टी की तरह ही चरम पर हैं। कांग्रेस के चलते भाजपा आज सरकार में है।
उन्होंने कहा कि बसपा व अपरकास्ट समाज के गरीबों को अपना उद्धार स्वयं करने के योग्य बनना है, तो गुलाम मानसिकता वाले समाज के बिकाऊ लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। कांशीराम के बताए रास्ते पर चलते हुए वर्ष 2007 की तरह आगे ही बढ़ते रहना है। उन्होंने पंचायत चुनाव से संबंध में पार्टी की तैयारियों की समीक्षा की। उत्तर प्रदेश में ये चुनाव अगर स्वतंत्र व निष्पक्ष ढंग से कराए गए तो आगामी विधानसभा आम चुनाव से पहले जनाक्रोश भाजपा के खिलाफ दिखाई देगा। खासकर ऐसे समय में बसपा बेहतर विकल्प बनकर सामने आएगी।
लेखक के बारे में
Abhishek Tiwariअभिषेक तिवारी
और पढ़ें

