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Hindi News उत्तर प्रदेशबसपा के खेवनहारों ने पार लगाई अखिलेश यादव की नैय्या, सपा ने चुन-चुन कर दिए टिकट 

बसपा के खेवनहारों ने पार लगाई अखिलेश यादव की नैय्या, सपा ने चुन-चुन कर दिए टिकट 

भारतीय जनता पार्टी ने जिस तीर को अपने तरकश में रखकर प्रदेश में शासन के 15 साल का सूखा खत्म किया था, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उसे ही बखूबी इस्तेमाल कर BJP को उसी के हथियार से करारी मात दे दी।

बसपा के खेवनहारों ने पार लगाई अखिलेश यादव की नैय्या, सपा ने चुन-चुन कर दिए टिकट 
Ajay Singhआनंद सिन्हा,लखनऊ Wed, 12 Jun 2024 05:57 AM
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Who got BSP votes: भारतीय जनता पार्टी ने जिस तीर को अपने तरकश में रखकर प्रदेश में शासन के 15 साल का सूखा खत्म किया था, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उसे ही बखूबी इस्तेमाल कर भाजपा को उसी के हथियार से करारी मात दे दी। वर्ष 2022 के विधानसभा और 2024 दोनों चुनावों में बसपा के इन्हीं पुराने सिपाहसलारों ने समाजवादी पार्टी की नैय्या पार लगाई। जी हां, सपा मुखिया ने चुन-चुन कर बसपा के ऐसे पुराने 13 खेवनहारों को टिकट दिया जो बसपा के न केवल फाउंडर मेंबर रहे बल्कि मायावती सरकारों में सत्ता का स्वाद भी चखा। नतीजा, यह रहा कि इनकी सीटों पर बसपा का दलित वोट धड़ल्ले से सपा की झोली में चला गया।

बसपा के 13 पुराने खेवनहार सपा से लड़े
सपा की पीडीए की रणनीति पर अमल में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि आखिर दलितों का साथ कैसे लिया जाए? सपा ने इसके लिए ज्यादा से ज्यादा बड़े बसपाई नेताओं को पार्टी में शामिल कराया। अखिलेश यादव ने बिना किसी परवाह के उन्हें टिकट दिया। इनमें बसपा के संस्थापक सदस्यों में रहे जौनपुर से बाबूसिंह कुशवाहा और अंबेडकरनगर से लालजी वर्मा, बसपा से दो बार विधायक रहे आंवला से नीरज मौर्य, बसपा के जिला अध्यक्ष रहे इटावा से जितेंद्र दोहरे, बसपा संस्थापक रहे मोहनलालगंज से आरके चौधरी, जालौन सु. से जिला कोआर्टिनेडर रहे नारायण दास अहिरवार, बसपा के फाउंडर मेंबर कौशांबी से इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज, सुल्तानपुर से बसपा के पूर्व मंत्री रहे रामभुआल निषाद, श्रावस्ती से राम शिरोमणि वर्मा, बस्ती से राम प्रसाद चौधरी, सलेमपुर से रामशंकर राजभर, मुरादाबाद से रुचिवीरा और गाजीपुर से अफ़जाल अंसारी मैदान में उतारे गए।

पूर्व आईजी और राजनीतिक विश्लेषक अरुण कुमार गुप्ता कहते हैं-‘इन्हीं कारणों से बसपा का दलित वोट समाजवादी पार्टी के इन कद्दावर नेताओं की झोली में भरपूर तरीके से गया। दरअसल, इन सभी चेहरों को दलित समाज अपने प्रतीक के रूप में देखता और मानता रहा है। इनकी बसपा के काडर वोट पर गहरी पकड़ रही है। इन्हीं चेहरों के सहारे ही सपा इस तथ्य को गलत साबित करने में कामयाब रही कि दलित वोट सपा को नहीं जाता।’

भाजपा ने वर्ष 2014 में अपनाई थी यही रणनीति
भारतीय जनता पार्टी ने इसी रणनीति पर वर्ष 2014 में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित समीकरण पर काम किया था। भाजपा ने बसपा के बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल करवाया। मसलन, स्वामी प्रसाद मौर्य, खीरी से बसपा के बड़े नेता जुगुल किशोर, वर्ष 2012 में दीनानाथ भास्कर जैसे तमाम नेता पार्टी में शामिल हुए। यही नहीं भाजपा ने दलित समाज से आने वाले आईपीएस ब्रजलाल, वर्ष 2022 में दलित आईपीएस असीम अरुण को पार्टी में शामिल कराया। भाजपा ने गौतम समाज से आने वाले करीब 24 विधायकों को टिकट दिया, जिसमें से 22 एमएलए जीते भी। कहना गलत न होगा कि विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को दलितों का अच्छा वोट हासिल हुआ था।

अखिलेश ने भी 2022 में दलितों और ओबीसी पर लगाया था दांव
समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2022 के चुनाव में दलितों के साथ ही ओबीसी वोट बैंक पर दांव लगाया था। न केवल बसपा से भाजपा में आए ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का सपा में लिया। दारा सिंह चौहान व ओम प्रकाश राजभर को पार्टी में लाए बल्कि राज्यसभा चुनावों के दौरान बसपा के सात विधायकों असलम राईनी, असलम अली, हाकिमलाल बिंद, हरगोविंद भार्गव, सुषमा पटेल व वंदना सिंह को अपने पाले में कर बड़ा संदेश दिया था। इसका उन्हें लाभ भी मिला। जो सपा वर्ष 2017 में 47 सीटों पर अटक गई थी वही सपा अपने सहयोगी दलों के साथ 125 का ग्राफ छू सकी।

यूं ट्रांसफर हुआ बसपा खेवनहारों को दलित वोट
सलेमपुर में दो बार भाजपा के रवींद्र कुशवाहा 2014 में 45.89 व वर्ष 2019 में 52.72% वोट पाते थे जबकि सपा इस सीट पर सपा वर्ष 2014 में 18.68 और बसपा के गठबंधन के बाद वर्ष 2019 में 38.52 पर ही अटक गई थी। सपा-बसपा का वोट प्रतिशत वर्ष 2019 में सिर्फ 19 फीसदी बढ़ सका था लेकिन 2024 में करीब 25.52 फीसदी बढ़ गया है। इस बार भाजपा का करीब 6.91 फीसदी वोट कम मिले हैं यानी बसपा और भाजपा दोनों के वोटों की कमी सपा की झोली में गई है। ऐसी स्थिति कमोबेश सपा की जीत वाली सभी सीटों पर रही है।

सीट             बसपा-2014         बसपा-2024         सपा 2024
सलेमपुर          18.73%                8.79%               44.23 %