ट्रेंडिंग न्यूज़

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशनीतीश की तरह यूपी में मायावती भी पलटी मारने में रही हैं आगे, जानें बसपा का कब किससे हुआ गठबंधन

नीतीश की तरह यूपी में मायावती भी पलटी मारने में रही हैं आगे, जानें बसपा का कब किससे हुआ गठबंधन

यूपी के राजनीतिक सफर पर नज़र डालें तो बहुजन समाज पार्टी ही ऐसा सबसे बड़ा दल उभरकर सामने आता है, जिसने कमोबेश सभी सियासी दलों सपा, कांग्रेस और भाजपा से गठबंधन किए। बसपा भी जदयू से कम नहीं है।

नीतीश की तरह यूपी में मायावती भी पलटी मारने में रही हैं आगे, जानें बसपा का कब किससे हुआ गठबंधन
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,लखनऊWed, 10 Aug 2022 09:10 AM

इस खबर को सुनें

0:00
/
ऐप पर पढ़ें

यूपी की सियासत में वैसे तो पलटी मारने के कई घटनाक्रम हुए हैं पर बीते तीन दशकों के राजनीतिक सफर पर नज़र डालें तो बहुजन समाज पार्टी ही ऐसा सबसे बड़ा दल उभरकर सामने आता है, जिसने कमोबेश सभी सियासी दलों सपा, कांग्रेस और भाजपा से गठबंधन किए। इसके बावजूद ऐन वक्त पर पलटी मार कर अपने राजनीतिक हित साधने में कोई कोताही नहीं की। यह बात दीगर है कि पार्टी ने हर बार कोई न कोई नया तर्क गढ़ा और साथी दल पर ठीकरा फोड़ दिया।

बनता और छूटता रहा साथ
मायावती की पार्टी बसपा ने सपा से वर्ष 1993 में गठबंधन किया। बसपा संस्थापक कांशीराम और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने यूपी की राजनीति में नब्बे के दशक में गठबंधन का एक ऐसा काकटेल तैयार किया, जिससे अन्य दलों के पसीने छूट गए। पिछड़ों और एससी-एसटी वोट बैंक को केंद्रित इस गठबंधन ने यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी। सत्ता में गठबंधन आया तो जरूर, लेकिन 1995 में स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बाद टूट गया। सपा से नाता तोड़ मायावती भाजपा से गठबंधन कर पहली बार 3 जून 1995 को मुख्यमंत्री बनीं लेकिन भाजपा से उनका साथ ज्यादा समय नहीं चला। मध्यावधि चुनाव हो गए।

उसके बाद जब किसी को बहुमत नहीं मिला तो सरकार बनाने के लिए फिर भाजपा व बसपा साथ आए। तय हुआ था कि बसपा और भाजपा का मुख्यमंत्री छह-छह माह रहेगा। कल्याण सिंह हालांकि इसके लिए राज़ी नहीं थे, फिर भी उन्होंने सहमति के चलते भाजपा नेतृत्व या यूं कहें अटल बिहारी वाजपेयी की बात मानी लेकिन बसपा बीच में पलटी मार गई। बाद में सरकार बचाने के लिए कल्याण सिंह ने कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के नेताओं की मदद से खासी मशक्कत कर सरकार बनाई। मायावती ने इस बार बहाना बनाया कि दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने भाजपा को दलित विरोधी बनाने के साथ ही कल्याण सिंह पर भी निशाना साधा था।

सपा से 26 साल बाद दोस्ती

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली बसपा गिरते जनाधार को लेकर एक बार फिर गठबंधन की ओर बढ़ी। स्टेट गेस्ट हाउस कांड का कड़वा घूंट पीकर मायावती ने अखिलेश के युवा नेतृत्व वाले सपा के साथ 2019 में लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया। बसपा को 10 सीटें मिलीं। फायदा भले ही मायावती को हुआ हो, लेकिन छह माह के अंदर ही उन्होंने पलटी मारते हुए सपा से नाता तोड़ दिया। तर्क दिया कि उनका वोट तो सपा को ट्रांसफर हुआ, लेकिन हमें उनका वोट नहीं मिला। यह भी कहा कि सपा कॉडर आधारित पार्टी नहीं है।
 
यूपी में गठबंधन में कब क्या हुआ
- वर्ष 1993 में बसपा-सपा गठबंधन हुआ
- वर्ष 1995 में सपा के साथ गठबंधन तोड़ा
- वर्ष 1997 में छह-छह माह की शर्त पर भाजपा के समर्थन से सीएम बनीं
- कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं दिया
- छह माह से पहले भाजपा से नाता तोड़ लिया
- वर्ष 1996 में कांग्रेस से गठबंधन पर चुनाव लड़ी
- बसपा ने केंद्र की अटल सरकार से भी समर्थन वापस लिया
- वर्ष 2019 में सपा गठबंधन के साथ लोकसभा चुनाव लड़ा
- 4 जून 2019 को सपा से गठबंधन तोड़ लिया

epaper