अमेरिका के बच्चे पढ़ रहे लखनऊ के वैज्ञानिक की किताब

लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक व पर्यावरणविद् प्रो. भरत राज सिंह ने पर्यावरण परिवर्तन के प्रभाव पर इतनी सटीक जानकारी दी है कि अमेरिका ने उनकी पुस्तक का एक अध्याय ‘द मेल्टिंग ऑफ ग्लेशियर कैन नॉट बी...

अमेरिका के बच्चे पढ़ रहे लखनऊ के वैज्ञानिक की किताब

लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक व पर्यावरणविद् प्रो. भरत राज सिंह ने पर्यावरण परिवर्तन के प्रभाव पर इतनी सटीक जानकारी दी है कि अमेरिका ने उनकी पुस्तक का एक अध्याय ‘द मेल्टिंग ऑफ ग्लेशियर कैन नॉट बी रिवर्स्ड विद ग्लोबल वार्मिंग’ स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। जर्मनी, फ्रांस और कनाडा में भी बच्चों को यह पुस्तक अलग से पढ़ाई जा रही है। इस पुस्तक में विनाशकारी तूफानों का भी जिक्र है। 
लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में शामिल प्रो. सिंह की लिखी पुस्तक ‘ग्लोबल वार्मिंग-केसेज, इम्पैक्ट एण्ड रेमेडीज’ न्यूयार्क शहर में वर्ष 2014 में विमोचित की गई थी। इस पुस्तक को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड-2015 में शामिल किया जा चुका है। अमेरिका में सैंडी नामक तूफान ने जमकर उत्पात मचाया। न्यूयार्क शहर का एक तिहाई हिस्सा समुद्र में समा गया। तब से अमेरिका, कनाडा व इंग्लैंड में हर साल भीषण बर्फबारी हो रही है। इसकी आशंका उन्होंने मई 2014 में प्रकाशित हुई पुस्तक में पहले ही व्यक्त कर दी थी। 
हर वर्ष दस लाख टन पिघल रही बर्फ : स्कूल ऑफ मैनेजमेन्ट साइन्सेज के महानिदेशक प्रो. सिंह का दावा है कि ग्लोबल वार्मिंग से उत्तरी ध्रुव पर जमी बर्फ तेजी से पिघल रही है। ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं। पिघलने की इस गति से 2040 तक उत्तरी ध्रुव पर नाम मात्र की बर्फ बचेगी। अप्रैल 2013 तक आंकड़ों के मुताबिक आर्कटिक क्षेत्र में बर्फीली चट्टानें 10 लाख टन प्रतिवर्ष की दर से पिघल रही हैं। सदी के अंत तक समुद्र तल में 13 फुट तक की बढ़ोतरी की संभावना है। इससे ध्रुव के ग्लेशियर व बर्फीली चट्टानों की मध्य रेखा पर समुद्र के पानी के भार में 397 से लेकर 1450 अरब टन की वृद्धि होगी। इससे पृथ्वी का घुमाव कोण (23.43 डिग्री) भी परिवर्तित हो जाएगा। समुद्र की सतह बढ़ने से पृथ्वी की घूर्णन गति धीमी हो जाएगी। पृथ्वी के कोण व घूमने की गति में परिवर्तन से तबाही को कोई नहीं रोक सकता। 
नए ग्लेशियर का होगा निर्माण : प्रो. सिंह ने पुस्तक में बताया है कि आने वाले समय में यूएसए, इंग्लैंड आदि देशों के कुछ प्रमुख तटीय शहर समुद्र में समा सकते हैं। इसके साथ ही उत्तरी-पश्चिमी सीमाओं पर बहुतायत में बर्फबारी होगी। नए ग्लेशियर का निर्माण होगा। उत्तरी ध्रुव के बड़े-बड़े ग्लेशियर पिघलेंगे। विशाल हिमखण्ड टूटकर अटलांटिक महासागर में बहते हुए प्रमुख तटीय शहरों से टकराएंगे। देश में भी समुद्री तटों पर भीषण बारिश व हिमालय से सटे प्रदेशों में बर्फबारी व भीषण ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। जबकि उत्तर प्रदेश व बिहार में सूखा पड़ने की संभावना बढ़ रही है। उनके इस शोध को अमेरिका, जर्मनी, कनाडा आदि देशों के शोधकर्ता विवेचना कर आगे बढ़ा रहे हैं।
कनाडा के वैज्ञानिक का भी दावा : पिछले वर्ष दिसम्बर 2016 में कनाडा की अल्बर्टा युनिवर्सिटी के भौतिकी के प्रोफेसर व शोधकर्ता मैथ्यू डबारे में भी डवेरी ने कहा था कि ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पृथ्वी के घूर्णन गाति में बदलाव से 21वीं सदी के अन्त तक 24 घंटे में 1.7 मिली सेकेण्ड तक गति धीमी होने के अनुमान है। 

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