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उत्तर प्रदेशगोरखपुर पहुंचा ब्‍लैक फंगस, सपा पार्षद के पति समेत दो आए चपेट में

वरिष्‍ठ संवाददाता ,गोरखपुर Published By: Ajay Singh
Sat, 15 May 2021 05:55 PM
गोरखपुर पहुंचा ब्‍लैक फंगस, सपा पार्षद के पति समेत दो आए चपेट में

गोरखपुर में ब्लैक फंगस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह बीमारी लोगों की आंखों से रोशनी छीन रही है। शनिवार को समाजवादी पार्टी की महिला पार्षद के पति ब्लैक फंगस का शिकार बने हैं। उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा एक अन्य मरीज को भी लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ब्लैक फंगस के कारण बीमार हुए पांच मरीजों का लखनऊ के निजी अस्पतालों में पहले से ही इलाज चल रहा है। जबकि चार अन्य का दिल्ली के अस्पताल में चल रहा है। इसके साथ ही जिले में अब संक्रमितों की संख्या 12 हो गई है। शुक्रवार को शहर के समाजवादी पार्टी के पार्षद के पति व प्रतिनिधि की दाहिनी आंख ब्लैक फंगस से खराब हो गई। उन्हें किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ में भर्ती कराया गया है। डाक्टरों की सलाह पर घर में इलाज करा रहे 50 वर्षीय व्यक्ति की भी एक आंख ब्लैक फंगस की वजह से खराब हो गई है। अब संक्रमण दिमाग की ओर तेजी से बढ़ रहा है। डॉक्टरों ने हायर सेंटर जाने को कह दिया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में बेड उपलब्ध न होने के बाद स्वजन उन्हें लखनऊ स्थित एक नर्सिंग होम ले गए हैं। हालत गंभीर बताई जा रही है।

पार्षद के पति कोरोना संक्रमित थे और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी रखना पड़ा था। वह तेजी से स्वस्थ हो रहे थे कि अचानक आंख में दर्द के साथ सूजन आने लगी। शहर के एक डॉक्टर से सलाह ली तो उन्होंने ब्लैक फंगस बताकर लखनऊ जाने को कहा। सांसद रविकिशन की पहल पर उनके प्रतिनिधि पवन दुबे ने पार्षद के पति को लखनऊ में भर्ती कराया है। देर रात पार्षद के पति ने बताया कि उनकी दाहिनी आंख से कुछ दिख नहीं रहा है। उन्हें इमरजेंसी में भर्ती किया गया है। इधर, जिस 50 वर्षीय व्यक्ति को पिछले महीने कोरोना का संक्रमण हुआ था उनके नाक से काला पानी आने लगा था और जबड़ों में तेज दर्द शुरू हो गया था। आक्सीजन सपोर्ट पर उनका काफी समय तक इलाज चला था। अभी घर वाले डाक्टरों से सलाह लेते कि आंख लाल हो गई और आंख के आसपास तेज दर्द के साथ सूजन होना शुरू हो गया।

स्वजन ने पहले आंख के डाक्टर से बात की तो उन्होंने फोन पर दवा बताई। फायदा न होने पर नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ से परामर्श को कहा। परीक्षण के बाद डाक्टर ने ब्लैक फंगस की पुष्टि कर दवाएं शुरू कर दी। इलाज में इस्तेमाल होने वाला एंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन की पहली डोज किसी तरह व्यवस्था कर लगाई गई लेकिन दूसरी डोज नहीं मिल सकी। इधर, हालात लगातार बिगड़ती रही। संक्रमण के कारण एक आंख खराब हो गई है। डाक्टरों ने जल्द आपरेशन न होने पर जीवन पर खतरा बताया है।

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