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दिल्ली-एनसीआर में पांव पसार रहा ब्लैक फंगस, 160 मरीज अस्पताल में भर्ती

कार्यालय संवाददाता, नई दिल्लीPublished By: Shivendra Singh
Sun, 16 May 2021 09:22 AM
दिल्ली-एनसीआर में पांव पसार रहा ब्लैक फंगस, 160 मरीज अस्पताल में भर्ती

दिल्ली-एनसीआर में ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस तेजी से पांव पसार रहा है। दिल्ली में ही अब तक 160 मरीज मिले हैं जो विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने ब्लैक फंगस बढ़ने का कारण अनियंत्रित मधुमेह और स्टेरॉयड युक्त दवाओं का सेवन बताया है।

एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि कई बार लोगों को पता ही नहीं होता है कि वह मुधमेह की बीमारी से ग्रसित है। स्टेरॉयड लेने के बाद मधुमेह का स्तर 300 से 400 हो जाता है जिससे सीधे तौर पर नुकसान पहुंचता है। इस बीमारी से चेहरा प्रभावित होता है। फेफड़ों, दिमाग और आंखों में भी फैल सकता है। सिरदर्द, नाक से खून आना, चेहरे पर सूजन, बुखार, खांसी में खून, छाती में दर्द जैसे लक्षण मिलते हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से यह अधिक खतरनाक हो चुका है।

उन्होंने बताया कि अगर स्टेरॉयड दे रहे है तो मरीज की निगरानी का जिम्मा स्वास्थ्य कर्मचारी का है। मरीज को जरूरत के हिसाब से स्टेरॉयड पांच से दस दिन तक के लिए दिया जाता है। अगर अधिक मात्रा में मरीज को यह दवाएं दी जाती है तो ब्लैक फंगस की आशंका काफी बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिए मरीज की निगरानी करना बहुत जरूरी है। साथ ही स्टेरॉयड तब तक नहीं देनी चाहिए जब तक मरीज को मोडरेट और गंभीर लक्षण न हो। मरीज का मधुमेह का स्तर देखना भी आवश्यक है।

मृत्यु का कारण भी बन रहा
डॉ. रणदीप गुलेरिया बताते है कि ब्लैक फंगस के बीजाणु मिट्टी, हवा बल्कि भोजन में भी मिलते है। लेकिन वह कमजोर होते है और संक्रमण का कारण नहीं बनते है। कोरोना से पहले इसके मामले बहुत कम थे। लेकिन कोरोना के कारण ऐसे मामले तेजी से बढ़ रही है। बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण मृत्यु का कारण भी बन रहे है।

इस बीमारी से चेहरा प्रभावित होता है
ब्लैक फंगस से चेहरा प्रभावित होता है। फेफड़ों, दिमाग और आंखों में भी फैल सकता है। सिरदर्द, नाक से खून आना, चेहरे पर सूजन, बुखार, खांसी में खून, छाती में दर्द जैसे लक्षण मिलते हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से यह अधिक खतरनाक हो चुका है। अगर स्टेरॉयड दे रहे हैं तो मरीज की निगरानी का जिम्मा स्वास्थ्य कर्मचारी का है। जरूरत के हिसाब से स्टेरॉयड पांच से दस दिन तक दिया जाता है। अगर अधिक मात्रा में मरीज की यह दवाएं दी जाती है तो ब्लैक फंगस की आशंका बढ़ जाती है।

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