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जौनपुर से संदेश देकर पूर्वांचल में क्षत्रिय समीकरण साधने में जुटी BJP, इन सीटों पर नई बिसात बिछानी शुरू

Lok Sabha Election 2024: धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला का टिकट भले ही BSP ने काटा है लेकिन इसके जरिये भारतीय जनता पार्टी असल में क्षत्रिय वोट बैंक में सेंध से होने वाले नुकसान को साधने में जुटी है।

जौनपुर से संदेश देकर पूर्वांचल में क्षत्रिय समीकरण साधने में जुटी BJP, इन सीटों पर नई बिसात बिछानी शुरू
Ajay Singhआनंद सिन्‍हा,लखनऊWed, 08 May 2024 06:41 AM
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Lok Sabha Election 2024: जौनपुर में धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला का टिकट भले ही बसपा ने काटा है लेकिन इसके जरिये भारतीय जनता पार्टी असल में क्षत्रिय वोट बैंक में सेंध से होने वाले नुकसान को साधने में जुटी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ क्षत्रियों की नाराज़गी या यूं कहें उदासीनता का दौर पूर्वांचल में असर न करे लिहाजा भाजपा ने नई बिसात बिछानी शुरू की है।

जौनपुर दरअसल यादव और मुस्लिम बहुल सीट मानी जाती है। यहां दलितों की आबादी भी अच्छी खासी यानी करीब 21 फीसदी हैं। इसके अलावा यादव 12 फीसदी, मुस्लिम 10 फीसदी, क्षत्रिय 9 और ब्राह्मण 7 फीसदी  और ओबीसी की जातियों में केवट-निषाद-6, लोनिया चौहान, प्रजापति, लोहार व साहू करीब 12 फीसदी हैं। दलित, यादव व मुस्लिम गठजोड़ की वजह से ही यहां बसपा के सांसद श्याम सिंह यादव वर्ष 2019 में जीते थे। वर्ष 2009 में इसी समीकरण यानी क्षत्रिय, मुस्लिम व दलित वोट बैंक के चलते धनंजय सिंह सांसद बने थे। उन्हें 39.6 फीसदी वोट मिले थे। यह समीकरण जब वर्ष 2014 में पलटा तो सीट भाजपा के खाते में चली गई। भाजपा के कृष्ण प्रताप केपी(क्षत्रिय) व अन्य सवर्ण जातियां के साथ ओबीसी वोट पाकर जीते। इसी समीकरण के आधार पर भाजपा ने इस बार कांग्रेस से भाजपा में आए कृपाशंकर सिंह को उतारा है। धनंजय सिंह के मैदान में रहने से क्षत्रिय वोटों में विभाजन तय था। धनंजय के न रहने से अब भाजपा के रणनीतिकार सहज महसूस कर रहे हैं।

भाजपा को दरअसल इस सीट के करीब की सीट कौशांबी में भी क्षत्रियों की नाराज़गी का असर पड़ने के आसार नज़र आ रहे थे। कौशांबी में रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का वर्चस्व है। यहां की दो सीटें बाबागंज सुरक्षित से जनसत्ता दल के विनोद कुमार और कुंडा से खुद राजा भैया विधायक हैं। ऐसे में कौशांबी लोकसभा में जीत के लिए क्षत्रिय समाज का साथ जरूरी था, लिहाजा जौनपुर के साथ कौशांबी में भी समीकरण साधे गए हैं। यही वजह है कि रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया की भाजपा के वरिष्ठ नेता से मुलाकात को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है।

कुछ ऐसे ही हालात प्रयागराज सीट पर हैं। वहां केसरीनाथ त्रिपाठी के बेटे नीरज त्रिपाठी सपा-कांग्रेस के उज्जवल रमण सिंह के सामने हैं। भाजपा यहां पर भी राजा भैया के जरिये क्षत्रिय समीकरण साधने में जुटी है, ताकि मतों का विभाजन भाजपा के पक्ष में हो सके।

केराकत-पिंड्रा में भी क्षत्रिय निर्णायक
मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र की चार विधानसभा सीटें मछलीशहर, पिंड्रा, केराकत, मड़ियाहूं और जाफराबाद, जौनपुर जिले में पड़ती हैं। इन सीटों पर सवर्ण जातियों के साथ एससी-एसटी और क्षत्रिय आबादी निर्णायक है। क्षत्रियों की आबादी केराकत, जाफराबाद, मड़ियाहूं में असरकारी हैं। पिंड्रा सीट पर भूमिहार बिरादरी के साथ क्षत्रियों की संख्या निर्णायक मानी जाती है। लिहाजा, भाजपा ने इसी जातीय समीकरण के मद्देनज़र इन इलाकों में भूमिहार के साथ क्षत्रिय समीकरण साधने की कवायद जोरदार तरीके से शुरू की है।