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पहले भी हिट रही है बीजेपी और रालोद की दोस्ती, आरएलडी ने लहराया था परचम

पश्चिमी यूपी में बीजेपी और रालोद की दोस्ती पहले भी हिट रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रालोद से गठबंधन किया। इसमें रालोद को सात सीटों में पांच सीटों पर परचम लहराया था।

पहले भी हिट रही है बीजेपी और रालोद की दोस्ती, आरएलडी ने लहराया था परचम
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,शामलीFri, 09 Feb 2024 03:06 PM
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भाजपा रालोद के गठबंधन की अटकलों को लेकर छायी सियासी धुंध भले ही छटने का नाम नहीं ले रही हो लेकिन वेस्ट यूपी की सियासत के अतीत के पन्नों को पलटा जाए तो रालोद के लिए भाजपा से सियासी दोस्ती मुफीद रही है। इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा और रालोद की दोस्ती फिर से परवान चढ़ती है तो इससे वेस्ट यूपी में सियासी तस्वीर और समीकरण दोनों ही बदल जाएंगे। कारण इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों ही दलों इस प्रयोग का इस्तेमाल कर चुके है।

वेस्ट यूपी की राजनीति में रालोद का अहम रोल रहा है। हालांकि वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद एक समय ऐसा भी आया जब रालोद को वजूद भी दांव पर लग गया। तब से लेकर रालोद को पुन खड़ी करने में एक दशक समय लगा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा से गठबंधन रालोद के लिए संजीवनी साबित हुआ। नतीज अब रालोद के पास नौ विधायक है। सपा और रालोद ने इस गठबंधन के इस फार्मूले को आगामी लोकसभा चुनाव में भी कायम रखने पर अडिग रहे लेकिन अचानक बात बिगड़ गई। इस कारण रालोद भाजपा से गठबंधन की चर्चाए जोर पकड़ गई। अब यदि यह गठबंधन हो जाता है तो वेस्ट यूपी में नए समीकरणों के साथ ही सियासी तस्वीर भी बदल जायेगा। इससे पहले वर्ष 2009 में रालोद और भाजपा का रालोद के गठबंधन का यह फार्मूला हिट साबित रह है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रालोद से गठबंधन किया। इसमें रालोद को सात सीटें मुजफ्फरनगर, बागपत, हाथरस, मथुरा, अमरोहा, बिजनौर, नगीना दी गई थी। इसमें सात में से पांच लोकसभा सीटों पर रालोद जीतने में कामयाब रही थी। केवल मुजफ्फरनगर में अनुराधा चौधरी और नगीन में मुंशीराम पाल ही चुनाव नहीं जीत सके थे। अन्य पांचों सीटों पर रालोद ने अपना परचम लहराया था।
 

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