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राज्यसभा में भाजपा की 7 सीटें पक्की, आठवें के लिए संजय सेठ पर लगाया दांव!, ऐन वक्त पर BJP ने बदली रणनीति

भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए आठवें प्रत्याशी को मैदान में उतार कर कुछ ऐसी रणनीति अख्तियार की है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। पीडीए के प्रत्याशियों को राज्यसभा चुनाव में...

राज्यसभा में भाजपा की 7 सीटें पक्की, आठवें के लिए संजय सेठ पर लगाया दांव!, ऐन वक्त पर BJP ने बदली रणनीति
Dinesh Rathourआनंद सिन्हा,लखनऊ Thu, 15 Feb 2024 06:50 PM
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कुछ दिन बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव में यूपी की 10 में से सात सीटें भाजपा की पक्की हैं, लेकिन आठवीं सीट पर भाजपा अपने कब्जे में लाने के लिए जुगत में जुट गई है। इसके लिए भाजपा ने आठवां उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है। भाजपा ने आठवें प्रत्याशी को मैदान में उतार कर कुछ ऐसी रणनीति अख्तियार की है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। पीडीए के प्रत्याशियों को राज्यसभा चुनाव में तरजीह न देने को लेकर समाजवादी पार्टी में उपजे असंतोष को भाजपा कुछ यूं भुनाएगी गुरुवार की सुबह तक किसी को भान तक न था। दरअसल, भाजपा इसके जरिये एक तीर से कई निशाने साधना चाहती है। अव्वल तो उसका मकसद अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ के दावों की हकीकत को सामने लाना है। दूसरा भाजपा क्रास वोटिंग सुनिश्चित कर सपा में पैदा हुए असंतोष को उजागर कर इसे मिशन-2024 के लिए हथियार बनाते हुए मनोवैज्ञानिक दवाब बनाना चाहती है।

सपा तीसरे प्रत्याशी का गणित बनाने में जुटी 

सियासी जानकारों की मानें तो 8वें उम्मीदवार के उतरते ही सपा का गणित डांवाडोल होने लगा है। दरअसल, चुनाव से पहले पार्टी को तय करना होगा कि उसके तीनों उम्मीदवारों को कौन-कौन विधायक मतदान करेंगे, या यूं कहें हर प्रत्याशी का कोटा तय होगा। सपा ने तीन प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। इसमें जया बच्चन, आलोक रंजन और रामजी लाल सुमन। एक प्रत्याशी को जिताने के लिए 37 विधायकों के मत की जरूरत बताई गई है। तीनों को जिताने के लिए सपा को 37 गुणे तीन यानी 111 वोट चाहिए। 

सपा के पास मौजूदा वक्त 108 विधायक हैं। इसमें से दो यानी रमाकांत यादव और इरफान सोलंकी जेल में हैं। पूर्व में हुए कुछेक चुनावों को नजीर माने तो 27 फरवरी को होने वाले मतदान में इन दोनों विधायकों का वोट डालना अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा। इन 108 में से सिराथू से विधायक पल्लवी पटेल साफ कह चुकी हैं कि वह सपा को वोट नहीं करेंगी। ऐसे में सपा के तीन विधायक कम होकर 105 रह जाते हैं। इसमें से अगर मान लें कि कांग्रेस के दो विधायक सपा के पक्ष में वोट करेंगे, तब भी सपा को जरूरी 111 मतों के लिए 4 अतिरिक्त वोट की जरूरत होगी। यही चार वोट सपा के तीसरे प्रत्याशी के लिए मुसीबत का सबब बन रहे हैं। इसके अलावा सुभासपा के एक अब्बास अंसारी का अगर वोट पड़ा तो वह सपा को जा सकता है लेकिन अब्बास अंसारी जेल में हैं। ऐसे में उनके वोट डाने के लिए आने पर संशय है।

कहां से आएंगे पांच वोट

सवाल है कि यह चार मत कहां से और किस दल में सेंध लगाकर हासिल होंगे। सपा के पास तीसरे प्रत्याशी के लिए 32 वोट बच रहे हैं। ऐसे में गणना दूसरे और तीसरे वरीयता के मतों से हो तो हैरत नहीं। ऐसे में सपा की आस रालोद के विधायकों पर टिकी है। रालोद के नौ विधायकों में दो सपा मुखिया के करीबी कहे जाते हैं। हालांकि रालोद ने अपनी एकजुट का मुजाहरा कर सभी नौ विधायकों के साथ होने का दावा किया है। फिर भी सपा के लिए कांग्रेस के अलावा रालोद के कुछ विधायकों से ही आस है।

संजय सेठ ने फेरा सपा के मंसूबों पर पानी

कभी सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के करीबी और बाद में अखिलेश के करीबी रहे संजय सेठ के लिए भी जीत की राह इतनी आसान नहीं है। हां, यह बात दीगर है कि उन्हें जोड़-तोड़ का माहिर माना जाता है। लिहाजा, अपने लिए जरूर मतों का ‘मैनेजमेंट’ उनके लिए अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है। दरअसल, भाजपा के पास कुल 288 मत हैं यानी भाजपा के 252, अपना दल 13, रालोद 9, निषाद पार्टी 6, सुभासपा के 5( अब्बास अंसारी को छोड़कर) और राजा भैया की जनसत्ता दल-2 यानी कुल 287 मत हैं। भाजपा को सात उम्मीदवारों को जिताने के लिए कुल 259 मतों की जरूरत होगी, जो वह आसानी से हासिल कर लेगी। अब बचे 28 मत। अगर यह मान भी लें कि रालोद के सभी 9 भाजपा के साथ जाएंगे तो भाजपा को 8वें प्रत्याशी संजय सेठ के लिए 9 मतों की और जरूरत होगी। संजय सेठ चूंकि सपा के कोषाध्यक्ष रहे हैं और सपा के कई विधायकों से उनकी खुद नजदीकियां रही हैं। ऐसे में उनके लिए 9 मतों का ‘मैनेजमेंट’ फिलहाल आसान न हो तो असंभव भी नहीं माना जा रहा। हां, सपा के लिए जरूर 4 मतों का आंकड़ा हासिल करना मौजूदा नाराजगी के चलते टेढ़ीखीर प्रतीत हो रहा है।

बसपा की रणनीति का खुलासा नहीं

बसपा का विधानसभा में मात्र एक विधायक है। उनकी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से खासी निकटता कही जाती है। वहीं संजय सेठ के भी वह करीब माने जाते हैं। ऐसे में उनका मत किस ओर जाएगा, इसे लेकर ज्यादा असमंजस नहीं है।

कौन हैं संजय सेठ

मुलायम सिंह के करीबी रहे संजय सेठ समाजवादी पार्टी के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। अखिलेश ने वर्ष 2016 में राज्यसभा भेजा था। बाद में वह वर्ष 2019 में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने भी उन्हें राज्यसभा भेजा। प्रदेश के बड़े बिल्डर हैं। उनके पार्टनर भी सपा के करीबी कहे जाते हैं।

वर्ष 2018 में भी पैदा हुई थी कुछ ऐसी ही स्थिति

भाजपा ने वर्ष 2018 में हुए राज्यसभा चुनाव में भी अंतिम समय में अपने 9वें प्रत्याशी डा. अनिल अग्रवाल को उतार दिया था। अनिल अग्रवाल दूसरी वरीयता के ज्यादा वोट मिलने पर जीते थे। उनके प्रतिद्वंद्वी बसपा के भीमराव अंबेडकर को हालांकि पहली वरीयता के 37 वोट मिले थे लेकिन दूसरी वरीयता के मत न मिले के कारण वह हार गए और भाजपा सेंधमारी कर अपना 9वां प्रत्याशी जितवाने में सफल रही थी।

विधानसभा में दलीय स्थिति

  • भारतीय जनता पार्टी                                  252
  • समाजवादी पार्टी                                      108
  • अपना दल (सोनेलाल)                               13
  • राष्ट्रीय लोक दल                                       09
  • निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल         06
  • सुलेहदेव भारतीय समाज पार्टी                    06
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस                              02
  • जनसत्ता दल लोकतांत्रिक                          02
  • बहुजन समाज पार्टी                                  01
  • मौजूदा समय चार सीटें सदस्यों के निधन से रिक्त हैं।
  • सपा के दो सदस्य  इरफान सोलंकी और रमाकांत जेल में हैं। साथ में सुभासपा के अब्बास अंसारी भी जेल में हैं। उनके वोट डालने पर संशय है।

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