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फर्जी गन लाइसेंस केस में असलहा बाबुओं को बड़ी राहत, गैंगस्‍टर बनने से बचे; प्रशासन ने लौटाई फाइल 

फर्जी असलहा लाइसेंस बनाने के प्रकरण में असलहा बाबुओं पर भले चार्जशीट दाखिल कर दी गई है लेकिन अब उन्हें गैंगस्टर नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन की तरफ से लौटाई गई फाइल को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है।

फर्जी गन लाइसेंस केस में असलहा बाबुओं को बड़ी राहत, गैंगस्‍टर बनने से बचे; प्रशासन ने लौटाई फाइल 
Ajay Singhवरिष्ठ संवाददाता,गोरखपुरWed, 28 Feb 2024 11:44 AM
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Fake Arms License Case:  फर्जी असलहा लाइसेंस बनाने के प्रकरण में असलहा बाबुओं पर भले ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई है लेकिन अब उन्हें गैंगस्टर नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन की तरफ से आपत्ति लगाकर लौटाई गई फाइल को अब ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है। गैंग में असली किंगपिन रवि गन हाउस के संचालक रवि पाण्डेय को मानते हुए इस प्रकरण को यहीं पर क्लोज करने की तैयारी है। इसके पीछे का तर्क है कि रवि ने ही पासवर्ड चोरी कर फर्जीवाड़ा किया है। रवि पाण्डेय सहित 12 लोगों पर पहले ही गैंगस्टर की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है।

फर्जी असलहा लाइसेंस के सूत्रधार बताए जा रहे असलहा बाबुओं पर पांच महीने पहले ही चार्जशीट दाखिल कर लम्बे समय से चल रही जांच पूरी कर ली गई थी। अन्य आरोपितों की तरह उन पर भी अब गैंगस्टर की कार्रवाई करने की तैयारी थी। गैंगस्टर की फाइल डीएम के यहां भेज दी गई थी लेकिन आपत्ति के साथ वहां से लौटा दी गई। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे। लेकिन अब यह तर्क सामने आया है कि रवि गन हाउस के संचालक ने ही पासवर्ड चोरी किया था और बाबु उसी चक्कर में फंस गए थे। रवि पाण्डेय और उसके साथियों पर गैंगेस्टर की कार्रवाई पूरी कर दी गई है, ऐसे में बाबुओं पर कार्रवाई नहीं बनती है।

यह थी घटना साल 2019, 14 अगस्त की शाम को गोरखनाथ पुलिस ने तनवीर अहमद नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसके पास से असलहे का फर्जी लाइसेंस बरामद हुआ। पूछताछ आगे बढ़ी तो पता चला कि तनवीर अकेला नहीं है, जिसके पास फर्जी लाइसेंस है। इस तरह के कई लोग शहर में न सिर्फ लाइसेंस, बल्कि असलहा लेकर घूम रहे हैं। जांच की आंच असलहा लाइसेंस बाबुओं तक भी पहुंची। पता चला कि डीएम दफ्तर के असलहा बाबू और कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से रवि गन हाउस से यह फर्जी शस्त्रत्त् लाइसेंस जारी हो रहे थे। पुलिस ने पूरे प्रकरण में 15 लोगों को मुल्जिम बनाया। 20 मार्च 2021 को इनमें से 12 लोगों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। इसमें से दो पूर्व असलहा बाबू और एक रिटायर कर्मचारी को बाहर रखा गया। सरकारी कर्मी होने की वजह से तीनों पर चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई थी। जांच जारी रही और छह महीने पहले उनके ऊपर चार्जशीट दाखिल की गई।

इन पर हो चुकी है कार्रवाई डीएम के निर्देश पर मार्च 2021 में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कैंट अनिल उपाध्याय ने विजय प्रताप सिंह, विकास तिवारी, तनवीर, शमशेर आलम, प्रणय प्रताप सिंह, शमशाद, आजम लारी, शाहिद अली, अशफाक अहमद, विवेक मद्धेशिया, रवि प्रताप पांडेय, अजय प्रताप गिरी के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कराया।

20 जुलाई 2021 में बनी एसआईटी
20 जुलाई 2021 को तत्कालीन एसएसपी दिनेश कुमार पी ने दोबारा जांच के निर्देश दे दिए। इस प्रकरण के लिए उन्होंने एसआईटी भी गठित कर दी। तब से प्रकरण में पुलिस की जांच जारी थी, जो सितम्बर 2023 में पूरी हुई है। डीएम के पास इसकी संस्तुति के लिए पुलिस ने पत्राचार किया था। आदेश मिलने के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दिया।

इन कर्मचारियों की फाइल लौटाई गई
असलहा बाबू रहे राम सिंह, पूर्व असलहा बाबू अशोक गुप्ता, रिटायरकर्मी विजय प्रताप श्रीवास्तव पर गैंगस्टर की कार्रवाई के लिए भेजी गई फाइल पांच महीने बाद आपित्त लगाकर लौटा दी गई है। पुलिस अफसर आपत्ति का निस्तारण कर उसे दोबारा भेज रहे हैं।

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