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BHU और JNU के वैज्ञानिकों ने टीबी और मलेरिया उपचार के लिए की नई खोज

बीएचयू और जेएनयू के वैज्ञानिकों ने तपेदिक (टीबी) और मलेरिया के उपचार के लिए एक महत्वपूर्ण शोध किया है जिससे दवाई से ठीक नहीं होने वाली ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों के उपचार में मदद मिल सकती है।...

BHU और JNU के वैज्ञानिकों ने टीबी और मलेरिया उपचार के लिए की नई खोज
हिन्दुस्तान टीम, वाराणसीMon, 18 Jan 2021 12:39 PM
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बीएचयू और जेएनयू के वैज्ञानिकों ने तपेदिक (टीबी) और मलेरिया के उपचार के लिए एक महत्वपूर्ण शोध किया है जिससे दवाई से ठीक नहीं होने वाली ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों के उपचार में मदद मिल सकती है।  

बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग और जेएनयू के स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन में चार वर्षो तक चले शोध के नतीजे से भविष्य में ऐसी दवाइयां  विकसित की जा सकती हैं जो दवा प्रतिरोधक टीबी और मलेरिया के उपचार में कारगर हों। इस शोध में 22 अनुभवी और युवा वैज्ञानिकों ने योगदान किया है। शोध में बीएचयू के रसायन विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. रामसागर मिश्र और जेएनयू के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन, प्रोफेसर गोबर्धन दास एवं शैलजा सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई है।

इन वैज्ञानिकों का शोधपत्र दुनिया की प्रमुख ऑनलाइन विज्ञान पत्रिका 'नेचरडॉटकॉम' के 'सेल डेथ एंड डिस्कवरी' जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इन वैज्ञानिकों ने औषधि जैसे एक मोलेक्युल्स (अणुकणिका) की खोज की है, जिससे टीबी और मलेरिया के संक्रमण का मुकाबला किया जा सकता है। इस शोध का भविष्य में औषधि क्षेत्र में दवाइयां बनाने  के लिए उपयोग किया जा सकता है।

शोधपत्र में बीएचयू के तीन वैज्ञानिकों डॉ. रामसागर मिश्र, आशीष खन्ना और चिन्तम नारायणा का नाम शामिल है। डॉ. मिश्र हाल में जेएनयू में प्रोफेसर नियुक्त हुए हैं। इन वैज्ञानिकों ने टीबी और मलेरिया के बैक्टीरिया व परजीवी रोगाणुओं के सुरक्षाकवच का उपयोग उन्हीं के खिलाफ करने की प्रक्रिया विकसित की है। इन वैज्ञानिकों के अनुसार रोगाणु मरीज के सेल्स पर काबिज होकर संक्रमण फैलाते हैं।

इस प्रक्रिया में वे ट्यूबरक्लोसिस नेक्रोटीज़िंग टोक्सिन (टीएनटी) नामक विषतत्व पैदा करते हैं जो सामान्य सेल्स की रोग प्रतिरक्षण क्षमता सुनिश्चित करने वाले निकोटिनॉमाइड अडेनाइन डिनुक्लेओटाइड (एनएडी) का संतुलन बिगाड़ देते हैं। लेकिन टीएनटी विषतत्व रोगाणुओं के लिए भी घातक होता, जिससे बचने के लिए रोगाणु 'इम्युनिटी फैक्टर फॉर टीएनटी' (आईएफटी) नामक रसायन पैदा करते हैं। अपने शोध में वैज्ञानिकों ने आईएफटी का उपयोग संक्रमित सेल्स में फ़ैल रहे विषतत्व टीएनटी के खिलाफ किया। इससे सेल्स का क्षरण रुक गया, एनएडी का संतुलन कायम रहा और टीबी के बैक्टीरिया का प्रसार कम हो गया। 

चिकित्सा विज्ञान से जुड़े लोग वैज्ञानिकों के शोध की सराहना कर रहे हैं और उन्हें बधाइयों का तांता लगा है। बीएचयू के वैज्ञानिकों की शोध प्रतिभा भी देश और विश्व स्तर उजागर हुई है।

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